तैत्तिरीय शाखा कृष्ण यजुर्वेद की प्रमुख शाखा है। विष्णुपुराण के अनुसार इस शाखा के प्रवर्तक यक्ष के शिष्य तित्तिरि ऋषि थे। यह शाखा दक्षिण भारत में अधिक प्रचलित है। यह शाखा अपने में परिपूर्ण कही जा सकती है क्योंकि इस शाखा के संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद्, श्रौतसूत्र, तथा गृह्यसूत्र आदि सभी ग्रन्थ उपलब्ध हैं। महाराष्ट्र का कुछ भाग तथा दक्षिण भारत का बहुशः भाग इसका अनुयायी है।

इस शाखा के अन्तर्गत -

  1. तैत्तिरीय संहिता
  2. तैत्तिरीय ब्राह्मण
  3. तैत्तिरीय आरण्यक, और
  4. आपस्तम्ब श्रौतसूत्र/बौधायन श्रौतसूत्र/हिरण्यकेशी श्रौतसूत्र

आते हैं।

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