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नास्तिक दर्शन भारतीय दर्शन परम्परा में उन दर्शनों को कहा जाता है जो वेदों को नहीं मानते थे।

भारत में भी कुछ ऐसे व्यक्तियों ने जन्म लिया जो वैदिक परम्परा के बन्धन को नहीं मानते थे वे नास्तिक कहलाये तथा दूसरे जो वेद को प्रमाण मानकर उसी के आधार पर अपने विचार आगे बढ़ाते थे वे आस्तिक कहे गये।

भारत में नास्तिक कहे जाने वाले विचारकों की चार धारायें मानी गयी हैं - आजीविक, जैन दर्शन, चार्वाक, तथा बौद्ध दर्शन

आजिविक दर्शनसंपादित करें

चार्वाक दर्शनसंपादित करें

जैन दर्शनसंपादित करें

बौद्ध दर्शनसंपादित करें

इन्हें भी देखेंसंपादित करें