ता आबाद खालिक-ए-आलम तु रियासत रखे, तुझ को उस्मान बसद इजलाल सलामत रखे़़

जैसे तू फकर-ए-सलातीन है बफज़ल याज़्दान, यूँ ही मुमताज़ तेरा दौर-ए-हुकूमत रखे़

ाल ओ औलाद को अल्लाह दे उम्र-ए-खिज़री, उनसे आबाद तेरा खाना-ए-दौलत रखे़़

जोड़-ए-हातिम रहे शर्मिंदा-ए-अहसान तेरा, अद्ल-ए-खुसरो को खिजल तेरी अदालत रखे़़

ख़ानदाज़न सूरत-ए-गुल तेरे हवा खा रहें, आके क़दमों पे ादु फर्ख इतात रखे.

बन के साक़ी तेरे इकबाल निजाम-ए-साबै, तुझ को सदा काश खुंखाना इशरत रखे़़ [1][2]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

संदर्भसंपादित करें

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 14 दिसंबर 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 दिसंबर 2018.
  2. "Hyderabad anthem accoरdion music played by Jan Oravec *ریاست حیدرآباد*".