तर्कशास्त्र में निष्कर्ष (conclusion) या परिणाम consequence) कथनों के किसी समूह में ऐसा आपसी सम्बन्ध होता है जिसमें यदि एक छोड़कर अन्य कथन सत्य हों तो बचा हुआ एक कथन स्वयं ही निष्कर्ष बनकर सत्य ठहरता है। किसी तर्क में निष्कर्ष को सही साबित करने वाले अन्य कथन आधार (premise) कहलाते हैं।[1][2]

उदाहरणसंपादित करें

आधार एक - विश्व के हर सागर में मछ्लियाँ रहती हैं।
आधार दो - हर मछली की रीढ़ की हड्डी होती है।
आधार तीन - अण्डमान सागर भारत का एक सागर है।
निष्कर्ष - अण्डमान सागर में रीढ़ की हड्डी वाले प्राणी रहते हैं।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Room, Adrian, ed. (2000). Dictionary of Confusable Words. New York, NY: Routledge. p. 177. ISBN 1-57958-271-0. Retrieved 22 May 2014.
  2. Peirce Edition Project, ed. (1998). The Essential Peirce: Selected Philosophical Writings. 2. Bloomington, IN: Indiana University Press. p. 294. ISBN 0-253-21190-5. Retrieved 22 May 2013.