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पश्चिमीकरण का अर्थ पश्चिमी देशों अर्थात योरोप और अमरीका की संस्कृति को स्वीकार करना। इसमें उन देशों का खाना-पीना, पोशाक, रहन-सहन आदि आदि शामिल हैं।

यह भी उल्लेखनीय है कि पाश्चात्य संस्कृति के सभी तत्व पश्चिम में उत्पन्न नहीं हुए हैं । उदाहरण के लिए ईसाई धर्म की उत्पत्ति एशिया में हुई । दशमलव पद्धति भारतवर्ष में उत्पन्न हुई और अरब देशों से होते हुए यूरोप में पहुँची । बारूद, छापाखाना और कागज का आविष्कार चीन में हुआ[1]

सांस्कृतिक चुनौतीसंपादित करें

भारत तथा अन्य विकासशील देशों के लोग यह मानते हैं कि पश्चिमी संस्कृति के अनुकूल ढलने में कोई बुराई नहीं है लेकिन हमें अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलना चाहिए। हमें पश्चिमीकरण को सकारात्मक वृद्धि के लिए अपनाना चाहिए लेकिन अपने देश की नैतिकता और भारतीय संस्कृति को भी ताक पर नहीं रखना चाहिए[2]

सन्दर्भसंपादित करें

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