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पुणे को महाराष्ट्र की सांस्‍कृतिक राजधानी कहा जाता है। इसे क्‍वीन ऑफ द दक्कन के नाम से भी जाना जाता है। पुणे में बहुत सारे उच्‍च कोटि के शिक्षण संस्‍थान, शोध केन्‍द्र के साथ-साथ खेल, योगा, आयुर्वेद और समाज सेवा आदि से जुड़े अनेक संस्थान है। इसके अतिरिक्त वर्तमान समय में पुणे सूचना तकनीकी के क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से विकसित हो रहा है। ऐतिहासिक तौर पर सत्रहवीं शताब्दी में इस शहर के प्रमुख केंद्र बिंदु मराठा शासक छत्रपति शिवाजी थे। शिवाजी का जन्‍म पुणे के शिवनेरी किला में हुआ था। उन्‍होंने अपना बचपन भी यही बिताया था। इस महल का निर्माण शिवाजी के पिता शाहजी ने करवाया था। शाहजी के मित्र कोंडदेव ने पुणे में गणेश मंदिर का निर्माण करवाया था जिसे कसबा गणपति के नाम से जाना जाता है। यहां गणपति ग्राम देवता के रूप में जाने जाते हैं, जिन्हें धार्मिक त्योहारों, उपनयन समारोह या किसी अन्य समारोह में सबसे पहला आमंत्रण दिया जाता है। सन् 1818 में हुए कोरेगांव युद्ध के बाद पुणे ईस्ट इंडिया कम्‍पनी के हाथों में चला गया। ब्रिटिश इसे ग्रीष्‍मकालीन राजधानी बनाना चाहते थे लेकिन इसे उन्नीसवीं शताब्दी का आर्मी टाउन बनाया गया और यह पुना कहलाने लगा। स्‍वतंत्रता संग्राम के समय सबसे पहले पुना से ही लोकमान्‍य तिलक ने देशवासियों से विदेशी समानों का बहिष्‍कार तथा स्‍वदेशी समानों को अपनाने का आग्रह किया था।

यहां कई आकर्षण हैं:-

पुणे का पातालेश्वर मंदिर, जो कि राष्ट्रकूट वंश काल में गुफाएं काट कर बनाया गया था।

पुणे से 11km दुरीपर छत्रपती शिवाजी महाराज के पायदल प्रमुख सरनौबत नरवीर पिलाजी गोळे इनक समाधीस्थळ हैं, पिरंगुट गाव मे, ओर वहा पें श्री जगदीश्वर का मंदिर भी देखणे जैसा हैं

शनिवार वाड़ासंपादित करें

 
शनिवार वाड़ा का दिल्ली दरवाज़ा
 
चतुर्शृंगी मंदिर
 
दगड़ूशेठ मंदिर

वैभवयुक्त शनिवारवाड़ा महल पेशवा का निवास स्थान था। इस महल की नींव बाजीराव1 ने 1730 ई. में रखी थी। इस महल का निर्माण कार्य 1732 ई. में पूरा हुआ। इस महल की दीवारों पर रामायण और महाभारत के दृश्य चित्रित है। कमल के सोलह फूलों की आकार में बना फव्‍वारा उस समय के बेहतरीन तकनीकी कौशल का नमूना है। वर्तमान समय में इस महल की देखभाल पुणे की नगरपालिका कर रही है। इस महल में प्रत्‍येक दिन लाइट एंड साउन्‍ड शो का आयोजन किया जाता है। शो का समय (प्रत्येक दिन)- 7.15 से 8.10 शाम में (म

व से इन्हें एकत्रित किया था। केलकर ने अपने पुत्र की याद में इस संग्रहालय की स्‍थापना की थी। जिसकी मृत्यु सात वर्ष की आयु में ही हो गई थी। इसके अतिरिक्त इस इमारत की पहली मंजिल पर घरेलू बरतन (18वीं और 19वीं शताब्दी) का अनोखा संग्रह है। अन्य मंजिल पर श्री गणेश, शिव और पार्वती की मूर्तियां रखी हुई हैं।

समय- 9 बजे प्रात: से 6 बजे शाम तक (प्रत्येक दिन खुला) प्रवेश शुल्क- 15 रू. टेलीफोन- 24474466 लोकेशन- बाजीराव रोड़, प्रसिद्ध अभिनव कला मंदिर के समीप। दक्कन से इस जगह की दूरी दो से तीन किलोमीटर है।

आगाखान महलसंपादित करें

 
पुणे मुले एवं मुथा नदियों के संगम पर स्थित है
 
प्रसिद्ध आगा खां महल

इस महल का निर्माण 1892 में इमाम सुल्तान मोहम्मद शाह आगाखान 111 ने किया था। 1969 में आगाखान 1 ने यह महल भारत सरकार को सौंप दिया। राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में भी पुणे ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई है। 1942 में हुए भारत छोड़ो आंदोलन के समय में गांधीजी, उनकी पत्नी कस्तूरबा और गांधीजी के सचिव महादेवभाई देसाई इस महल में ही रहे थे। मौला नदी के समीप स्थित, इस महल में गांधीजी और उनके जीवन पर आधारित यादों का स्मारक भी है। समय- 9 बजे सुबह से 6 शाम तक (लंच ब्रेक- 12.30 दोपहर से 1.30 तक)। प्रवेश शुल्क- व्‍यस्‍कों के लिए पांच रू. और बच्चों के लिए दो रू .।

पार्वती हिल मंदिरसंपादित करें

 
पुणे बाईपास सड़क से काफी भारी ट्रैफिक से शहर बच जाता है

पार्वती हिल पुणे में स्थित प्रमुख मंदिरों में से एक है। समुद्र तल से इस मंदिर की ऊंचाई 2100 फीट है। इस मंदिर में रोजाना भक्तों की भीड़ लगी रहती है। यह मंदिर सुबह पांच बजे खुलता है और रात आठ बजे बंद होता है। इस जगह के बारे में ऐसा कहा जाता है कि इस जगह पर पेशवा शासक बालाजी बाजीराव ने ब्रिटिश को किकरी युद्ध में हराया था। इसके अलावा यहां एक देवदेवेश्वर मंदिर और कई अन्य मंदिर लार्ड कार्तिकालय, विष्णु और विठ्ठल भी है। प्रत्येक मंदिर का मराठा साम्राज्य में एक प्रमुख स्थान है। पार्वती हिल मंदिर शहर के मध्य स्थित है। दक्कन से इस स्थान की दूरी चार कि॰मी॰ और स्वारगेट से एक कि॰मी॰ है।

कात्रज सर्प उद्यानसंपादित करें

 
पुणे में प्रथम बी.आर.टी.एस प्रणाली आरंभ हुई थी।

यह उद्यान कात्रज मार्ग पर स्थित है। इस सर्प उद्यान में अनेक संख्या में सांप और अन्य रेंगनेवाले जंतु जैसे मगरमच्छ आदि देखने को मिल जाएगें। इस पार्क में पुस्तकालय भी है, जहां सापों की जानकारी चित्रों के साथ प्रदर्शित की गई है। लोकेशन- कात्रज सर्प उद्यान, पुणे सतारा हाईवे के समीप स्थित भारतीय विद्यापीठ विश्वविद्यालय के नजदीक है। समय- सुबह 10.30 से शाम 6 बजे तक (बुधवार बंद)। प्रवेश शुल्क- TEN रू. (एक व्यक्ति)।

कोणार्कसंपादित करें

चित्र:Airport outside.jpg
पुणे अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र

पुणे के समीप स्थित, अम्बोरसिया से आगे और पशान से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर यह खूबसूरत पक्षी अभयारण्य है। यहां स्थित पक्षियों को निजी रूप से डॉ॰ सुहास जोग ने इक्टठ्ठा किया है। यहां स्थित पक्षियों को डॉ॰ जोग ने विश्व के विभिन्न हिस्सों से एकत्रित किया है। यहां फोटो खींचने की अनुमति नहीं हैं। आपको यहां आस्टेलिया का बेअर-आइड कोकेटू (एक प्रकार का तोता), चाइना का पीला सुनहरा तीतर और कीनिया का रिंग ओइट तीतर आदि देखने को मिल जाएंगें।

खानासंपादित करें

 
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक

पुणे में बहुत से अच्छे रेस्तरां है। यहां आपको हर तरह के व्यंजन खाने को मिल जाएंगें। सबसे अधिक रेस्तरां सैनिक छावनी के पास बोट कल्ब रोड़, कोरगांव पार्क और मुख्य सड़क पर स्थित है।

खरीददारीसंपादित करें

 
सायबर सिटी पार्क

पुणे में खरीददारी के लिए जाते समय इस बात का ध्यान रखें कि यहां दुकानें दिन में एक बजे से लेकर शाम चार बजे तक बंद रहती है। लक्ष्मी रोड़ से महाराष्ट्रन नौवारी सूती साड़ी के साथ-साथ परम्परागत भारतीय साड़ी और आभूषण खरीदे जा सकते हैं। एम.जी.रोड से किताबें, बहुमूल्य कपड़े, डिजाइनर घड़िया, प्राचीन सामान, क्रिस्टल और चाइना, जूते और बैग खरीद सकते हैं। वहीं ढोले पाटील मार्ग, कोरीगन पार्क और फरगियूशन कॉलेज मार्ग में बेहतरीन मॉल और बूटिक है यहां से भी खरीददारी की जा सकती है।

आवागमनसंपादित करें

हवाई मार्ग-

पुणे के विमानक्षेत्र का नाम लोहेगांव एयरपोर्ट है जहाँ से इंडियन एयरलाइंस और जेट एयरवेज की विमान पुणे-दिल्ली, पुणे-चेन्नई, पुणे-बैंगलोर के बीच उड़ान भरती है। एयरपोर्ट से पुणे शहर की दूरी 12 किलोमीटर है।

रेल मार्ग-

पुणे की ओर जाने के लिए सबसे बेहतर विकल्प इंद्रायानी एक्सप्रेस है। इसके अतिरिक्त दक्कन क्वीन, दक्कन एक्सप्रेस और शताब्दी रोजाना पुणे और मुम्बई के बीच चलती है।

बस मार्ग-

यहां मुम्‍बई से बस द्वारा भी जाया जा सकता है। दादर से हर पद्रंह मिनट पर पुणे के लिए सामान्‍य तथा वातानूकुलित बसें खुलती है।