प्रतिशोध न्याय का एक प्रकार है जो औपचारिक कानून और न्यायशास्त्र के मानक की अनुपस्थिति या अवज्ञा में किया जाता है। प्रायः प्रतिशोध को किसी कष्ट, चाहे वह वास्तविक हो या बूझा गया हो के जवाब में किसी व्यक्ति या समूह के खिलाफ हानिकारक कार्रवाई के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसका उपयोग कानून के बाहर जाकर अनुचित को दंडित करने के लिए किया जाता है। बहुसंख्यक मानव समाजों में बदला लेने वाला व्यवहार पाया गया है। कुछ समाज प्रतिशोधपूर्ण व्यवहार को प्रोत्साहित करते हैं, जिससे पुश्तैनी दुश्मनी जन्म लेती है। ऐसे समाज आम तौर पर व्यक्तियों और समूहों के सम्मान को केंद्रीय महत्व के रूप में मानते हैं। इस प्रकार, अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा करते समय किसी बदला लेने वाले को लगता है जैसे वह गरिमा और न्याय की पिछली अवस्था को पुनर्स्थापित कर रहा है।

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