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प्रभाकर (७वीं शताब्दी) भारत के दार्शनिक एवं वैयाकरण थे। वे मीमांसा से सम्बन्धित हैं। कुमारिल भट्ट से उनका शास्त्रार्थ हुआ था।

शालिकनाथ ने ८वीं शताब्दी में प्रभाकर के ग्रन्थों का भाष्य लिखा।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें