एक बार राजा शान्तनु राजा शांतनु पत्नी रानी गंगा और पुत्र देवब्रत के वियोगन मै अपनी अपने सारथी साथ जंगल घूमने निकले जंगल में अचानक दो बच्चों के रोने की आवाज़ जाती है रा राजा शान्तनु शक होने लगता है और अपने हाथ धनुष बाण उठाते ही बोहोत तेज गर्जना हुई जब राजा शान्तनु जब अपना धनुष उठाते थे तो चारों तरफ़ तेज गर्जना होती थी सामने ही बरगद के पेड के नीचे दो बच्चे रोने की आवाज़ आती है तभी सारथी एक बच्चे को उठाकर शांतनु की गोदी में दे देता है राजा शान्तनु ख़ुश होकर उसे ही छाती से लगा लेते है और सार्थी से पूछते है ये क्या है तब सारथी बोलते है ईश्वर ने पर कृपा की है आपके सूनेपन को देखकर शांतनु पूछते हैं इनका नाम क्या रखे सा सारथी जवाब देता है जब ईश्वर आप पर कृपा की है तो इनका नाम कृपा ही रखते हैं राजा शांतनु हाथ से ऊपर उठाकर आप आकाश में ध्वनि करके बोलते हैं आज से इस बालक का नाम कृपा होगा और लड़की का और लड़की का नाम कृपी होगा लड़का बड़े होने के बाद कृपाचार्य की उपाधि मिली हस्तिनापुर में लडकी बडी होने पर शांतनु उनका विवाह है द्रोणाचार्य से कर देते है इस प्रकार इस प्रकार से द्रोणाचार्य शान्तनु के दामाद होते हैं और दौणाचार्य भीष्म पितामह के बहनोई होते है राजा शांतनु के आशीर्वाद से कृपाचार्य की मृत्यु नही होती शायद मेरी जानकारी मै

बरगद
Banyan tree Old Lee County Courthouse.jpg
बरगद का चित्र
वैज्ञानिक वर्गीकरण
जगत: पादप
विभाग: Magnoliophyta
वर्ग: Magnoliopsida
गण: Urticales
कुल: Moraceae
वंश: Ficus
उपवंश: (Urostigma)
बरगद के विशाल वृक्ष का नीचे वाला भाग (कली)
भारत भारत के राष्ट्रीय प्रतीक
ध्वज तिरंगा
राष्ट्रीय चिह्न अशोक की लाट
राष्ट्रभाषा कोई नहीं
राष्ट्र-गान जन गण मन
राष्ट्र-गीत वन्दे मातरम्
मुद्रा (भारतीय रुपया)
पशु बाघ
जलीय जीव गंगा डालफिन
पक्षी मोर
पुष्प कमल
वृक्ष बरगद
फल आम
खेल मैदानी हॉकी
पञ्चांग
शक संवत
संदर्भ "भारत के राष्ट्रीय प्रतीक"
भारतीय दूतावास, लन्दन
Retreived ०३-०९-२००७

ऐसी सैकड़ों पुरानी पौराणिक कथाऐ है हैं बरगद के पेड़ की Jaswant Nirala

बरगद बहुवर्षीय विशाल वृक्ष है। इसे 'वट' और 'बड़' भी कहते हैं। यह एक स्थलीय द्विबीजपत्री एंव सपुष्पक वृक्ष है। इसका तना सीधा एंव कठोर होता है। इसकी शाखाओं से जड़े निकलकर हवा में लटकती हैं तथा बढ़ते हुए धरती के भीतर घुस जाती हैं एंव स्तंभ बन जाती हैं। इन जड़ों को बरोह या प्राप जड़ कहते हैं। इसका फल छोटा गोलाकार एंव लाल रंग का होता है। इसके अन्दर बीज पाया जाता है। इसका बीज बहुत छोटा होता है किन्तु इसका पेड़ बहुत विशाल होता है। इसकी पत्ती चौड़ी, एंव लगभग अण्डाकार होती है। इसकी पत्ती, शाखाओं एंव कलिकाओं को तोड़ने से दूध जैसा रस निकलता है जिसे लेटेक्स अम्ल कहा जाता है।

धार्मिक महत्वसंपादित करें

हिंदू धर्म में वट वृक्ष की बहुत महत्ता है। ब्रह्मा, विष्णु, महेश की त्रिमूर्ति की तरह ही वट,पीपल व नीम को माना जाता है, अतएव बरगद को शिव समान माना जाता है। अनेक व्रत व त्यौहारों में वटवृक्ष की पूजा की जाती है। यह आस्था के ऊपर निर्भर करता है।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें