बसेरे से दूर, हरिवंश राय बच्चन की आत्मकथा,‘क्या भूलूँ क्या याद करूँ’ (1969), ‘नीड़ का निर्माण फिर’ (1970), ‘बसेरे से दूर’ (1978) और ‘दशद्वार से सोपान तक’ (1985) नामक चार खंडों में प्रकाशित उनकी आत्मकथा , का तीसरा खण्ड है।[1]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 15 अप्रैल 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 30 अप्रैल 2017.