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आत्मकथा

किसी व्यक्ति द्वार अपने बारे में लिखी गयी पुस्तक
सन् 1793 में प्रकाशित बेंजामिन फ्रैंकलिन की आत्मकथा का प्रथम अंग्रेज़ी संस्करण

साहित्य में आत्मकथा (autobiography) किसी लेखक द्वारा अपने ही जीवन का वर्णन करने वाली कथा को कहते हैं। यह संस्मरण (memoir) से मिलती-जुलती लेकिन भिन्न है। जहाँ संस्मरण में लेखक अपने आसपास के समाज, परिस्थितियों व अन्य घटनाओं के बारे में लिखता हैं वहाँ आत्मकथा में केन्द्र लेखक स्वयं होता है।[1] आत्मकथा हमेशा व्यक्तिपरक (subjective) होती हैं, यानि वह लेखक के दृष्टिकोण से लिखी जाती हैं। इनमें लेखक अनजाने में या जानबूझ कर अपने जीवन के महत्वपूर्ण तथ्य छुपा सकता है या फिर कुछ मात्रा में असत्य वर्णन भी कर सकता है।[2] एक ओर आत्मकथा से व्यक्ति के जीवन और परिस्थितियों के बारे पढ़कर पाठकों को जानकारी व मनोरंजन मिलता है, तो दूसरी ओर इतिहासकार आत्मकथाओं की जानकारी को स्वयं में मान्य नहीं ठहराते और सदैव अन्य स्रोतों से उनमें कही गई बातों की पुष्टी करने का प्रयास करते हैं।[3]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Pascal, Roy (1960). Design and Truth in Autobiography. Cambridge: Harvard University Press.
  2. "The Phenomenology of Autobiography: Making it Real," Arnaud Schmitt, Taylor & Francis, 2017, ISBN 9781351701020
  3. "Encyclopaedia Metropolitana: History and biography," Edward Smedley, Hugh James Rose, Henry John Rose; B. Fellowes, 1845, ... it cannot be too often impressed on the Historical examiner, that correspondent testimonies are only valuable when derived from independent sources ...