अरावली पर्वत शृंखलाओं से घिरा ऐतिहासिक शहर बूँदी राजस्थान के हाड़ौती अंचल में स्थित है।

बूँदी का सन १९०० का एक फोटो

बूँदी की स्थापना राव देवा हाड़ा ने की थी।बूंदा नाळ के नाम पर इसका नाम बून्दी रखा गया।

राजा देव सिंह जी के उपरान्त राजा बरसिंह ने पहाडी पर1354 में तारागढ़ नामक दुर्ग का निर्माण करवाया। साथ ही दुर्ग मे महल और कुण्ड-बावडियो को बनवाया। १४वी से १७वी शताब्दी के बीच तलहटी पर भव्य महल का निर्माण कराया गया। सन् १६२० को महल मे प्रवेश के लिए भव्य पोल(दरवाज़ा) का निर्माण कराया गया। पोल को दो हाथी कि प्रतिमुर्तियों से सजाया गया उसे "हाथीपोल" कहा जाता है। राजमहल मे अनेक महल साथ ही दिवान- ए - आम और दिवान- ए - खास बनवाये गये। बूँदी अपनी विशिष्ट चित्रकला शैली के लिए विख्यात है, इसे महाराव राजा "श्रीजी" उम्मेद सिंह ने बनवाया जो अपनी चित्रशैली के लिए विश्वविख्यात है। बूँदी के विषयों में शिकार, सवारी, रामलीला, स्नानरत नायिका, विचरण करते हाथी, शेर, हिरण, गगनचारी पक्षी, पेड़ों पर फुदकते शाखामृग आदि रहे हैं।

==[1][2] संदर्भ

  1. Annals and Antiquities of Rajasthan. Colonel James Tod.
  2. वंश भास्कर. सुर्यमल्ल मिश्रण.