भारत में, अवैध तरीकों से अर्जित किया गया धन काला धन (ब्लैक मनी) कहलाता है। काला धन वह भी है जिस पर कर नहीं दिया गया हो। भारतीयों द्वारा विदेशी बैंको में चोरी से जमा किया गया धन का निश्चित ज्ञान तो नहीं है किन्तु श्री आर वैद्यनाथन ने अनुमान लगाया है कि इसकी मात्रा लगभग 7,280,000 करोड रूपये हैं।

काले धन के विविध रूपसंपादित करें

  • आतंरिक काला भारत में काले धन की मात्रा का कोई निश्चित अनुमान आज तक कोई नहीं लगा पाया नहीं लगा सकता है लेकिन हमारे देश में जो भी काला धन है वह 19 सौ 70 के बाद तेजी से बढ़ा है क्योंकि 1947 से लेकर 70 तक 23 वर्ष देश गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा था और देश के विकास करने में सभी नेता और ब्यूरोक्रेट तथा आम जनता उत्साह पूर्वक सहयोग कर रही थी 1970 के बाद देश में घोटालों खनिज संपदा की लूट जमीनों के बढ़ते दामों ने नेताओं और वीरू कृषि को काला धन इकट्ठा करने का रास्ता खोला और इसमें धीरे-धीरे माफियाओं का प्रवेश हो गया जो सरकारी बजट के धन को योजनाओं को एनजीओ के रूप में हड़पने में आ गए आ गए तथा कई कोऑपरेटिव फर्जी बैंक के तथा बैंकों के धन की मनमानी तरीके से लूट हुई ब्यूरोक्रेसी में रिश्वत का बोलबाला रहा और उससे निचले स्तर तक भ्रष्टाचार पनपता चला गया टैक्स देने वालों की संख्या में कोई ऐसी वृद्ध नहीं हुई जो सरकार को उत्साहित करती और ना ही टैक्स लेने वाले आयकर विभाग व बिक्री कर व अन्य करके उगाही करने वाले संस्थान इसमें सक्रिय दिखाई दिए बल्कि में उल्टी कर देने वालों को करना देने के लिए प्रोत्साहित कर अपनी जेब भरते रहें यही देश का सबसे दुखद पहलू है कि हमारा देश भ्रष्टाचार की आड़ में काले धन का बहुत बड़ा भंडारण करने वाला देश विश्व के पटल पर आ गया है हम इस पर एक किताब लिखने की योजना बना रहे हैं जो हमारे 40 साल के लिखे हुए लिखो वाहनों पर आधारित है हमने 1978 में प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के द्वारा लिखित पुस्तक भारत की अर्थनीति गांधीवादी रूपरेखा को भी बहुत गंभीरता से पढ़ा है और उसमें देश के ग्रामीण अर्थव्यवस्था के द्वारा देश को मजबूती की ओर ले जाने का बहुत ही सरल व राष्ट्रीय हितों को साधने वाला गांधीवादी रूपरेखा करो कि ओपावा उपायों का वर्णन किया गया है मेरे ख्याल से यह पुस्तक सभी राष्ट्र भक्तों को जो देश के प्रति चिंतित हैं वह देश के भविष्य को संवारने के लिए कुछ करना चाहते हैं उनको आगे आकर देश की अर्थव्यवस्था में योगदान करने के लिए अपने सुझाव एवं शोध के द्वारा वैश्विक संकट से जूझ रही अर्थव्यवस्था के बीच फंसा हुआ भारत अर्थव्यवस्था भी टूटने के भारत जा चुकी है ऐसा लगता है अपनी कमजोरियां है जो वो छुपाने की कोशिश करती हैं ताजा घोटाले बैंक की दुर्दशा को दर्शाते हैं तथा सरकार की ओर से कोई डैमेज कंट्रोल करने जैसी नियत या व्यवस्था अभी तक नहीं दिखी है यह दुखद है दुनिया का कोई भी देश बिना अर्थव्यवस्था को संभाले विनाश खुशाल नहीं रह सकता है यह मेरा अपना विचार है !
  • बाह्य काला

आतंरिक काला धनसंपादित करें

  1. करेंसी का संग्रह करके
  2. सोना ,चाँदी आदि बहुमूल्य धातुओं का संग्रह करके
  3. अचल संपत्ति के रूप में

काला धन रोकने के उपायसंपादित करें

  1. करेंसी का विमुद्रीकरण करके
  2. सोने, चाँदी आदि के आभूषणों में हॉलमार्क चिन्ह की अनिवार्यता कर
  3. बेनामी या अवैध ढंग से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त करके
  4. किसी भी सामान की खरीदी पर बिल बनवाकर।
  5. 2000 के नोट पे 100 नोट के एक गड्डी पे 8 पे जीपीएस को लगा दीजिए

बाह्य काला धनसंपादित करें

  • विदेश के बैंकों में जमा धन
  • विदेश में अचल सम्पति या उद्योग में निवेश करके या शेयर का रूप में
  • टैक्स हेवन देशों में जमा धन

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें