मत्स्य अवतार

भगवान विष्णुजी का अवतार

मत्स्यावतार Matsyavatar भगवान विष्णु का अवतार है जो उनके दस अवतारों में से एक वह प्रथम है। इस अवतार में भगवान विष्णु ने इस संसार को भयानक जल प्रलय से बचाया था। साथ ही उन्होंने हयग्रीव नामक दैत्य का वध भी किया था।

मत्स्य अवतार
वेदज्ञान और सुरक्षा के देवता
Member of दसावतार
Matsya Raja Ravi Varma Press.jpg
भगवान मत्स्य नारायण की गोद में चार वेद
संबंध दशावतार, विष्णु, पर ब्रह्म, परमात्मा, परमेश्वर, विष्णु के प्रथमावतार
निवासस्थान वैकुंठ, समुद्र
मंत्र ॐ मतस्याय मनुकल्पाय नम:
अस्त्र सुदर्शन चक्र , पाञ्चजन्य शंख , कमल पुष्प और कौमोदकी गदा ,
जीवनसाथी महालक्ष्मी
शास्त्र भागवत पुराण, विष्णु पुराण, मत्स्य पुराण
त्यौहार मत्स्य जयंती

कथासंपादित करें

एक बार इस पृथ्वी पर मनु नामक पुरुष हुए। वे भगवान विष्णु के परम भक्त थे। एक बार वे सुबह के समयसूर्यनारायण को अर्घ्य दे रहे थे तभी एक मछली नें उनसे कहा कि आप मुझे अपने कमंडल में रख लो। दया और धर्म के अनुसार इस राजा ने मछली को अपने कमंडल में ले लिया और घर की ओर निकले, घर पहुँचते तक वह मत्स्य उस कमंडल के आकार का हो गया, राजा नें इसे एक पात्र पर रखा परंतु कुछ समय बाद वह मत्स्य उस पात्र के आकार की हो गई। अंत में राजा नें उसे समुद्र में डाला तो उसने पूरे समुद्र को ढँक लिया। उस सुनहरी-रंग मछली ने अपने दिव्य पहचान उजागर की और अपने भक्त को यह सूचित किया कि उस दिवस के ठीक सातवें दिन प्रलय आएगा तत्पश्चात् विश्व का नया श्रृजन होगा वे सत्यव्रत को सभी जड़ी-भूति, बीज और पशुओं, सप्त ऋषि आदि को इकट्ठा करके प्रभु द्वारा भेजे गए नाव में संचित करने को कहा। प्रलय आए ही मत्स्य रूपी भगवान विष्णु ने नाव को स्वयं खींचकर इस संसार को प्रलय से बचाया था। [1]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

चित्र मालिकासंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "मत्स्यावतार की कथा". मूल से 31 मई 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 30 मई 2014.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें

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