अवतार

देवता का आवर्तित स्वरूप

अवतार संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ प्रायः उतरना होता है।[1] हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु के विभिन्न स्वरूप जब पृथ्वी पर दुष्टो का नाश करने विभिन्न युगों में आते हैं, तब उन्हें भगवान विष्णु का अवतार कहा जाता है, भगवान राम एवं कृष्ण, विष्णु के दशावतार में से एक हैं।

भगवान विष्णु के अवतारसंपादित करें

दशावतारसंपादित करें

भागवत पुराण के अनुसार विष्णु के असंख्य अवतार हुए हैं किन्तु उनके दस अवतारों (दशावतार = दश + अवतार) को प्रमुख अवतार माना जाता है। विष्णु के ये दस अवतार अग्निपुराण, गरुणपुराण और भागवत पुराण में उल्लिखित हैं।

भगवान विष्णु के दस अवतार हैं :

  1. मत्स्य
  2. कूर्म/कच्छप अवतार
  3. वराह
  4. नरसिंह
  5. वामन
  6. परशुराम
  7. राम
  8. कृष्ण
  9. बुद्ध
  10. कल्कि

पहले तीन अवतार, अर्थात् मत्स्य, कूर्म और वराह प्रथम महायुग में अवतीर्ण हुए। पहला महायुग सत्य युग या कृत युग है। नरसिंह, वामन, परशुराम और राम दूसरे अर्थात् त्रेतायुग में अवतरित हुए। कृष्ण और बलराम द्वापर युग में अवतरित हुए। इस समय चल रहा युग कलियुग है और भागवत पुराण की भविष्यवाणी के आधार पर इस युग के अंत में कल्कि अवतार होगा। इससे अन्याय और अनाचार का अंत होगा तथा न्याय का शासन होगा जिससे सत्य युग की फिर से स्थापना होगी।

सुखसागर के अनुसार भगवान विष्णु के चौबीस अवतारसंपादित करें

  1. सनकादि ऋषि
  2. वराहावतार
  3. नारद मुनि
  4. हंसावतार
  5. नर-नारायण
  6. कपिल
  7. दत्तात्रेय
  8. यज्ञ
  9. ऋषभदेव
  10. पृथु
  11. मत्स्यावतार
  12. कूर्म अवतार
  13. धन्वन्तरि
  14. मोहिनी
  15. हयग्रीव
  16. नृसिंह
  17. वामन
  18. श्रीहरि गजेंद्रमोक्ष दाता
  19. परशुराम
  20. वेदव्यास
  21. राम
  22. कृष्ण
  23. बुद्ध
  24. कल्कि


  1. भगवान ने कौमारसर्ग में सनक, सनन्दन, सनातन तथा सनत्कुमार नामक ब्रह्मऋषियों के रूप में अवतार लिया। यह उनका पहला अवतार था।
  2. पृथ्वी को रसातल से लाने के लिये भगवान ने वराह के रूप में अवतार लिया तथा हिरण्याक्ष का वध किया।
  3. ऋषियों को सात्वततंत्र, जिसे कि नारद पंचरात्र भी कहते हैं और जिसमें कर्म बन्धनों से मुक्त होने का निरूपण है, का उपदेश देने के लिये नारद जी के रूप में अवतार लिया।
  4. हंस के रूप में अवतार लेकर भगवान् ने नारद जी को उपदेश दिया।
  5. धर्म की पत्नी मूर्ति देवी के गर्भ से नर-नारायण, जिन्होंने बदरीवन में जाकर घोर तपस्या की, का अवतरण हुआ।
  6. माता देवहूति के गर्भ से कपिल मुनि के रूप में भगवान् का अवतार हुआ जिन्होंने अपनी माता को सांख्य शास्त्र का उपदेश दिया।
  7. अनसूया के गर्भ से दत्तात्रेय प्रकट हुए जिन्होंने प्रह्लाद, अलर्क आदि को ब्रह्मज्ञान दिया।
  8. आकूति के गर्भ से यज्ञ नाम से अवतार धारण किया।
  9. नाभिराजा की पत्नी मेरु देवी के गर्भ से ऋषभदेव के नाम से भगवान का अवतार हुआ। उन्होंने परमहंस के उत्तम मार्ग का निरूपण किया।
  10. राजा पृथु के रूप में भगवान ने अवतार लिया और गौ-रूपिणी पृथ्वी से अनेक औषधियों, रत्नों तथा अन्नों का दोहन किया।
  11. चाक्षुषमन्वन्तर में सम्पूर्ण पृथ्वी के जलमग्न हो जाने पर पृथ्वी को नौका बना कर भावी वैवश्वत मनु की रक्षा करने हेतु भगवान ने मत्स्यावतार लिया।
  12. समुद्र मंथन के समय देवता तथा असुरों की सहायता करने के लिये भगवान ने कच्छप के रूप में अवतार लिया।
  13. भगवान ने धन्वन्तरि के नाम से लिया जिन्होंने समुद्र से अमृत का घट निकाल कर देवताओं को दिया।
  14. मोहिनी का रूप धारण कर देवताओं को अमृत पिलाने के लिये भगवान ने अवतार लिया।
  15. ग्राह से गज को बचाने के लिए भगवान् आये। यद्यपि यह अवतार नहीं था क्योंकि अवतार में नया जन्म लिया जाता है या कम से कम अन्य रूप धारण किया जाता है; फिर भी कई जगह इसे भी अवतार मान लिया गया है।
  16. भगवान का नृसिंह के रूप में अवतार हुआ जिन्होंने हिरण्यकशिपु दैत्य को मार कर प्रह्लाद की रक्षा की।
  17. दैत्य बलि को पाताल भेज कर देवराज इन्द्र को स्वर्ग का राज्य प्रदान करने हेतु भगवान ने वामन के रूप में अवतार लिया।
  18. अभिमानी क्षत्रिय राजाओं का इक्कीस बार विनाश करने के लिये परशुराम के रूप में अवतार लिया।
  19. पराशर जी के द्वारा सत्यवती के गर्भ से भगवान ने वेदव्यास के रूप में अवतार धारण किया जिन्होंने वेदों का विभाजन कर के अनेक उत्तम ग्रन्थों का निर्माण किया।
  20. प्रत्येक कल्प में भगवान् व्यास के रूप में अवतार लेकर वेदों का विभाजन कर मानव-कल्याण का पथ प्रशस्त करते हैं।
  21. राम के रूप में भगवान ने अवतार ले कर रावण के अत्याचार से विप्रों, धेनुओं, देवताओं और संतों की रक्षा की।
  22. भगवान ने सम्पूर्ण कलाओं से युक्त कृष्ण के रूप में अवतार लिया।
  23. बुद्ध के रूप में भी भगवान का अवतार हुआ।
  24. कलियुग के अन्त में विष्णु यश नामक ब्राह्मण के घर भगवान् का कल्कि अवतार होगा।

सिख धर्म के अनुसार भगवान विष्णु के अवतारसंपादित करें

सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविन्द सिंह द्वारा रचित दशम ग्रन्थ में विष्णु के २४ अवतारों का वर्णन है जो निम्नलिखित है-

  1. मछ (मत्स्य)
  2. कच्छ (कच्छप या कूर्म)
  3. नारायण
  4. महा मोहिनी (मोहिनी)
  5. बैरह (वाराह)
  6. नर सिंह (नृसिंह)
  7. बावन (वामन)
  8. परशुराम
  9. ब्रह्म
  10. जलन्धर
  11. बिशन (विष्णु)
  12. शेशायी (शेष)
  13. अरिहन्त देव
  14. मनु राजा
  15. धन्वन्तरि
  16. सूरज
  17. चन्दर
  18. राम
  19. बलराम
  20. कृष्ण
  21. नर (अर्जुन)
  22. बुद्ध
  23. कल्कि

भगवान गणेश के अवतारसंपादित करें

मुद्गल पुराण में गणेश के ८ अवतारों का वर्नन है-

  1. वक्रतुण्ड
  2. एकदन्त
  3. महोदर
  4. गजवक्त्र या गजानन
  5. लम्बोदर
  6. विकट
  7. विघ्नराज
  8. धूम्रवर्ण

भगवान शिव के अवतारसंपादित करें

यद्यपि पुराणों में यत्र-तत्र शिव के अवतारों का वर्णन है किन्तु शैव सम्प्रदाय में न तो शिव के अवतारों को सभी लोग मानते हैं न ही उनकी संख्या के बारे में मतैत्य है। लिंगपुराण में शिव के २८ अवतारों का उल्लेख है।

भगवान ब्रह्मा के अवतारसंपादित करें

गुरु गोविन्द सिंह द्वारा रचित दशम ग्रन्थ में ब्रह्मा के ७ अवतारों का वर्णन है–

  1. वाल्मीकि अवतार
  2. कश्यप अवतार
  3. शुक्र अवतार
  4. बछेस अवतार
  5. व्यास अवतार
  6. खट ऋषि अवतार (षट् ऋषि अवतार)
  7. कालिदास अवतार

देवी के अवतारसंपादित करें

महालक्ष्मी के अवतारसंपादित करें

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Monier Monier-Williams (1923). [[https://web.archive.org/web/20161229010012/https://books.google.com/books?id=_3NWAAAAcAAJ Archived 2016-12-29 at the Wayback Machine A Sanskrit-English Dictionary]]. Oxford University Press. p. 90.