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प्राचीन भारतीय आर्य संस्कृति में ज्ञान और तप की उच्चतम सीमा पर पहुँच चुके व्यक्ति महर्षि कहलाते थे। इससे ऊपर ऋषियों की एकमात्र कोटि ब्रह्मर्षि की मानी जाती थी।