हयग्रीव विष्णु के अवतार थे। जैसा कि नाम से स्पष्ट है उनका सिर घोड़े का था और शरीर मनुष्य का। वे बुद्धि के देवता माने जाते हैं। इन्होनें दानव हयग्रीव का वध किया था। जिसे देवी पार्वती ने वरदान दिया था कि उसका वध हयग्रीव के हाथों ही होगा जब उसके अत्याचार बढ़ने और ब्रह्मा जी के पास से वेदों का हरण कर ले गया जब भगवान विष्णु ने पहले प्रयास में उसे मारने का प्रयत्न किया उस समय देवी पार्वती भगवान विष्णु के सामने प्रकट हुईं और उन्हें प्रणाम कर अपने वरदान के बारे में बताया '' कि दैत्य हयग्रीव का वध एक देव हयग्रीव ही कर सकता है | तब भगवान विष्णु ने ११वें अवतार के रूप में हयग्रीव अवतार लिया और उस दैत्यराज हयग्रीव का संहार किया ।

हयग्रीव ब्रह्मा को वेद प्रदान करते हुए