किसी आवर्ती वेवफॉर्म को फुर्रे श्रेणी के रूप में बदलने पर उसमें निहित सबसे कम आवृत्ति को उस वेवफॉर्म की मूल आवृत्ति (fundamental frequency) कहते हैं। एक दूसरे सन्दर्भ में, किसी तनी हुई डोरी या ड्रम से जो सबसे कम आवृत्ति की ध्वनि निकल सकती है, उसे उसकी मूल आवृत्ति कहते हैं। मूल आवृत्ति के पूर्णांक गुणकों को सन्नादी (हार्मोनिक्स) कहा जाता है। उदाहरण के लिये, यदि मूल आवृत्ति ४०० हर्ट्ज हो तो, प्रथम सन्नादी ८०० हर्ट्ज का तथा पाँचवाँ सन्नादी २००० हर्ट्ज का होगा। +-3

तनी हुई डोरी का कम्पन : मूल आवृत्ति (सबसे ऊपर) तथा ६ ओवर-टोन्स

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