गणित में फूर्ये श्रेणी (Fourier series) एक ऐसी अनन्त श्रेणी है जो f आवृत्ति वाले किसी आवर्ती फलन (periodic function) को f, 2f, 3f, आदि आवृत्तियों वाले ज्या और कोज्या फलनों के योग के रूप में प्रस्तुत करती है। इसका प्रयोगे सबसे पहले जोसेफ फ़ूर्ये (१७६८ - १८३०) ने धातु की प्लेटों में उष्मा प्रवाह एवं तापमान की गणना के लिये किया था। किन्तु बाद में इसका उपयोग अनेकानेक क्षेत्रों में हुआ और यह विश्लेषण का एक क्रान्तिकारी औजार साबित हुआ।

फूर्ये श्रेणी के आरम्भिक एक, दो, तीन या चार पदों द्वारा वर्ग तरंग फलन (square wave function) का सन्निकटीकरण (approximation)। अधिक पद जोड़ने पर प्राप्त ग्राफ, वर्ग-तरंग के ग्राफ के अधिकाधिक निकट दिखने लगता है।

इसकी सहायता से कठिन से कठिन फलन भी ज्या और कोज्या फलनों के योग के रूप में प्रकट किये जाते हैं जिससे इनसे सम्बन्धित गणितीय विश्लेषण अत्यन्त सरल हो जाते हैं।

फुरिअर श्रेणी के उपयोग

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  • कम्पन के विश्लेषण में (यांत्रिक, ध्वनि या विद्युतचुम्बकीय कम्पन)

2π आवर्तकाल वाले आवर्ती फलनों के लिये फुरिअर श्रेणी

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माना f(x), वास्तविक चर x का एक आवर्ती फलन है जिसका आवर्त काल 2π है अर्थात f(x+2π) = f(x) तो,

 

इस श्रेणी को फुरिअर श्रेणी कहते हैं।   और   को फुरिअर गुणांक कहा जाता है। ये गुणांक वास्तविक संख्या या समिश्र संख्या हो सकते हैं।

 
 
 

फुरिअर श्रेणी का एक सरल उदाहरण

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एक आरीदाँत फलन (sawtooth function) का आरेख
 
आरीदाँत फलन के लिये फुरिअर श्रेणी के प्रथम पाँच पदों के योग (एक पद, दो पदों का योग, तीन पदों का योग... आदि) का चलायमान (animated) प्रदर्शन

माना कि दिया हुआ फलन आरीदाँत फलन (sawtooth function) है जिसे निम्नवत गणितीय रूप से प्रकट कर सकते हैं:

 
 

इस फलन के लिये फुरिअर गुणांक इस प्रकार होंगे:

 

अत:

 
 
 
 

इन्हें भी देखें

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बाहरी कड़ियाँ

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