वित्त और अर्थशास्त्र में मौद्रिक प्राधिकरण (monetary authority) किसी देश, राज्य या अन्य क्षेत्र में वह संस्था होती है जो वहाँ की मुद्रा (करंसी) और मुद्रा आपूर्ति (करंसी सपलाई) का संचालन करती है। साधारण भाषा में इस संस्था के पास देश की मुद्रा के नोट छापनी के शक्ति होती है। आमतौर पर किसी देश में एक ही मौद्रिक प्राधिकरण स्थापित किया जाता है और उसकी ज़िम्मेदारी होती है कि मुद्रा और उसकी आपूर्ति का प्रबंधन कर मुद्रास्फीति (महंगाई), ब्याज दरों, वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और बेरोज़गारी दर पर नियंत्रण रखे। भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक मौद्रिक प्राधिकरण है और देश में रुपये यही जारी करता है।[1][2]

बैंक ऑफ कनाडा का कार्यालय, जो कनाडा का मौद्रिक प्राधिकरण है

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Jahan, Sarwat. "Inflation Targeting: Holding the Line". International Monetary Funds, Finance & Development. अभिगमन तिथि 28 December 2014.
  2. Mishkin, Frederic S. (2007). The Economics of Money, Banking, and Financial Markets (Alternate संस्करण). Boston: Addison Wesley. पृ॰ 8. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-321-42177-7.