रायचन्द बोराल बाङ्ला एवं हिन्दी सिनेमा के विख्यात संगीतकार थे। इनके पिता स्वयं एक शास्त्रीय संगीतकार थे। अतः संगीत विरासत में पाने के बावजूद इन्होंने संगीत के विख्यात उस्तादों से शिक्षा पायी थी। इन्होंने ही पार्श्वगायन तकनीक की खोज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी।[1] कुन्दनलाल सहगल जैसे सुप्रसिद्ध व्यक्तित्व को सिनेमा से जोड़ने का काम बोराल जी ने ही किया था। सिनेमा में इनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सन् 1978 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी सम्मान तथा उसी वर्ष के दादा साहब फाल्के सम्मान से सम्मानित किया गया।[2]

रायचन्द बोराल
Raichand Boral 2013 stamp of India.jpg
रायचन्द बोराल, भारतीय डाकटिकट (2013) में
जन्म रायचन्द बोराल
19 अक्टूबर 1903
भागलपुर, बंगाल, ब्रिटिश भारत
मृत्यु 25 नवम्बर 1981(1981-11-25) (उम्र 78)
कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत
राष्ट्रीयता भारतीय
व्यवसाय संगीतकार

आरम्भिक जीवनसंपादित करें

फ़िल्मी सफ़रसंपादित करें

सम्मानसंपादित करें

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. मृत्युंजय (संपादक) (2017). सिनेमा के सौ बरस (दशम संस्करण). शाहदरा, दिल्ली: शिल्पायन. पृ॰ 137. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 81-87302-28-3.
  2. डॉ॰, सी॰ भास्कर राव (2014). दादा साहब फाल्के पुरस्कार विजेता (भाग-1) (प्रथम संस्करण). दरियागंज, नयी दिल्ली: शारदा प्रकाशन. पपृ॰ 91, 93, 94. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-93-82196-00-6.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें