राष्ट्रीय चिन्ह

प्रतीक या मुहर है जिसे किसी राष्ट्र या बहु-राष्ट्रीय राज्य द्वारा अपने प्रतीक के रूप में उपयोग के

राष्ट्रीय चिह्न एक प्रतीक या मुहर है जिसे किसी राष्ट्र या बहु-राष्ट्रीय राज्य द्वारा अपने प्रतीक के रूप में उपयोग के लिए आरक्षित किया जाता है। इस चिह्न का प्रयोग सरकारी कागजों- दस्तावेजों, अभिलेखों, प्रपत्रों, मुद्रा आदि पर किया जाता है। यह चिह्न संबंधित देश के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक इतिहास एवं वर्तमान मूल्यों औ्र आदर्शों से संबंधित होता है। राष्ट्रीय चिह्न राष्ट्र में मौजूद किसी प्रसिद्ध ऐतिहासिक निर्मिति से भी चुने जाते हैं और ये बिल्कुल नवीन निर्मिति भी हो सकते हैं। प्रारूप समिति के द्वारा डॉ भीमराव ने इसमें एहम भूमिका निभाई

भारत का राजचिह्न

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मुख्य लेख - भारत का राजकीय प्रतीक

 

भारत का राजचिह्न, भारतीय पहचान और विरासत का मूलभूत हिस्‍सा हैं। विश्‍व भर में बसे विविध पृष्‍ठभूमियों के भारतीय इन राष्‍ट्रीय प्रतीकों पर गर्व करते हैं क्‍योंकि वे प्रत्‍येक भारतीय के हृदय में गौरव और देश भक्ति की भावना का संचार करते हैं।

अशोक चिह्न भारत का राजकीय प्रतीक है। इसको सारनाथ में मिली अशोक लाट से लिया गया है। मूल रूप इसमें चार शेर हैं जो चारों दिशाओं की ओर मुंह किए खड़े हैं। इसके नीचे एक गोल आधार है जिस पर एक हाथी के एक दौड़ता घोड़ा, एक सांड़ और एक सिंह बने हैं। ये गोलाकार आधार खिले हुए उल्टे लटके कमल के रूप में है। हर पशु के बीच में एक धर्म चक्र बना हुआ है। राष्‍ट्र के प्रतीक में जिसे २६ जनवरी १९५० में भारत सरकार द्वारा अपनाया गया था केवल तीन सिंह दिखाई देते हैं और चौथा छिपा हुआ है, दिखाई नहीं देता है। चक्र केंद्र में दिखाई देता है, सांड दाहिनी ओर और घोड़ा बायीं ओर और अन्‍य चक्र की बाहरी रेखा बिल्‍कुल दाहिने और बाई छोर पर। घंटी के आकार का कमल छोड़ दिया जाता है। प्रतीक के नीचे सत्यमेव जयते देवनागरी लिपि में अंकित है। शब्‍द सत्‍यमेव जयते शब्द मुंडकोपनिषद से लिए गए हैं, जिसका अर्थ है केवल सच्‍चाई की विजय होती है।

वास्तविक सारनाथ राज चिह्न में चार एशियाई शेरों के पीछे पीछे खड़े हुए हैं,जो शक्ति, साहस, आत्मविश्वास और गौरव का प्रतीक है। नीचे एक घोड़ा और एक बैल है, और इसके केंद्र में एक सुंदर पहिया (धर्म चक्र) है। एक हाथी (पूरब के), एक बैल (पश्चिम), घोड़े (दक्षिण), और शेर (उत्तर की) है जो बीच में पहियों से अलग होते हैं। पूरे फूल में एक कमल पर, जीवन के स्फटिक और रचनात्मक प्रेरणा का उदाहरण देते हुए। बलुआ पत्थर के एक ही खंड से खुदी हुई, पॉलिश पूंजी को कानून के पहिये (धर्म चक्र) द्वारा ताज पहनाया गया है। 1 9 50 में माधव साहनी द्वारा अपनाया गया प्रतीक में, केवल तीन शेर दृश्यमान हैं, चौथा दृश्य से छिपा हुआ है। दायीं तरफ बैल और बाईं ओर घूमने वाला घोड़ा है, और चरम दाएं और बायीं ओर धर्म चक्र की रूपरेखा है। प्रतीक का एक अभिन्न अंग बनाने से देवनागरी लिपि में अभिलेख के नीचे लिखा गया आदर्श वाक्य है: सत्यमेव जयते यह मुंडका उपनिषद से एक उद्धरण है, पवित्र हिंदू वेदों का समापन भाग का श्लोक है।

दक्षिण सूडान गणराज्य का कुल चिह्न

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मुख्य लेख - दक्षिण सूडान गणराज्य का कुल चिह्न

 

दक्षिण सूडान गणराज्य का कुल चिह्न जुलाई २०११ में स्वतंत्रता के बाद अपनाया गया था। स्वतंत्रता से पूर्व के, दक्षिण सूडान सूडान का एक स्वायत्त क्षेत्र था।

कुल चिह्न के डिजाइन को अप्रैल २०११ में दक्षिणी सूडान के स्वायत्त सरकार की कैबिनेट ने मंजूरी दी थी। इसके पहले मई २०११ में दक्षिणी सूडान विधानसभा द्वारा इस चिह्न समर्थन किया गया था।

पाकिस्तान का राजप्रतीकचिह्न

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मुख्य लेख - पाकिस्तान का राजप्रतीकचिह्न

 

पाकिस्तान के राजप्रतीकचिह्न को सन् 1954 में पाकिस्तान सरकार द्वारा अपनाया गया था। इस चिह्न को मूल रूप से कुल चिह्न के रूप में वर्गित किया जा सकता है(उदाहरणस्वरूप: भारत का राष्ट्रप्रतीकचिह्न एक ऐतिहासिक स्तम्भमुकुट है)। यह पाकिस्तानी गणराज्य के आदर्शों को, उस्की वैचाराक नीव को, उस्की अर्थव्यवस्था के मूल्यों को एवं पाकिस्तान की सांस्कृतिक धरोहर और मार्गदर्शक सिद्धांतों को दर्शाता है। इसे पाकिस्तान सरकार के चिह्न के रूप में भी उपयोग किया जाता है। इस चिह्न के मुख्य रूप से चार घटक अंग हैं:

  • कलग़ी पर ढाल के शिखर पर हरे रंग में चांद व सितारा का चिह्न
  • केन्द्र में चतुरांशी ढाल
  • सहायक के रूप में पुष्पमाला एवं
  • ढाल के नीचे सूचिपत्र पर ध्ययवाक्य उर्दू में अंकित है

ढाल के चारों खंडों में नव-स्वतंत्र पाकिस्तान के मुख्य फ़सलों को दर्शित किया गया है। चक्र-क्रम में चारों चौथाइयों में कपास, चायपत्ती, गेहूं एवं पटसन को दर्षित किया गया है।  सहायक के रूप में दर्शाइ गइ पुष्पमाला चमेली/जैस्मिन के फूलों की है जिहे पारंपरिक मुग़ल चित्रकला के लैज़े में बनाया गया है।  अंततः सूचिपत्र पर अंकित ध्ययवाक्य क़ाएद-ए-आज़म मुहम्मद अली जिन्नाह द्वारा दिया गया नारा ईमान, इत्तेहाद, नज़म (ایمان، اتحاد، نظم‎)(आस्था, एकता, अनुशासन) अंकित है जो पाकिस्तान के मार्गदर्शक सिद्धान्त माना जाता है

यूनाइटेड किंगडम का शाही कुल-चिह्न

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मुख्य लेख - यूनाइटेड किंगडम का शाही कुल-चिह्न

 

यूनाइटेड किंगडम का शाही कुल-चिह्न (अंग्रेज़ी: Royal coat of arms of the United Kingdom) ब्रिटिश सम्राट, वर्तमान समय में एलिज़ाबेथ द्वितीय, का आधिकारिक कुल-चिह्न है। यह चिह्न महारानी द्वारा यूनाइटेड किंगडम सभी आधिकारिक प्रयोजनों में प्रयोग में लाया जाता है, तथा इसे आधिकारिक तौर पर आर्म्स ऑफ़ डोमिनियन (अंग्रेज़ी: Arms of Dominion) के नाम से जाना जाता है। इस चिह्न से प्रेरित कई प्रकार के चिह्न शाही परिवार के अन्य सदस्य और ब्रिटिश सरकार देश से सम्बन्धित अपने प्रशासनिक कार्यो में इस्तेमाल करती है। स्कॉटलैंड में इसका एक अलग संस्करण इस्तेमाल किया जाता है तथा उस से प्रेरित एक अन्य चिह्न को स्कॉटिश सरकार इस्तेमाल करती है।[1]

शाही चिह्न की ढाल चार भागों में बटी हुई है, जिस के पहले व चौथे भाग में इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करते हुए तीन अंग्रेज़ी शेर हैं, दूसरे भाग में फूलों की मेंड़ के साथ स्कॉटलैंड का प्रतिनिधित्व करता हुआ अनियंत्रित शेर है तथा तीसरे भाग में उत्तरी आयरलैंड का प्रतिनिधित्व करता हुआ क्लैरसच (हार्प) है। ढाल को शाही मुकुट पहने हुए अंग्रेज़ी शेर और जंजीर से बंधे स्कॉटिश यूनिकॉर्न ने संभाला हुआ है।[1]


  1. "Symbols of the Monarchy – Coats of arms". royal.gov.uk. ब्रिटिश साम्राज्य की आधिकारिक वेबसाइट. मूल से 8 मार्च 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 1 अक्टूबर 2012.