स्काटलैंड यूनाइटेड किंगडम का एक देश है। यह ग्रेट ब्रिटेन का उत्तरी भाग है। यह पहाड़ी देश है जिसका क्षेत्रफल ७८,८५० वर्ग किमी है। यह इंगलैंड के उत्तर में स्थित है। यहां की राजधानी एडिनबरा है। ग्लासगो यहाँ का सबसे बड़ा शहर है।

स्कॉटलैंड
ध्येय वाक्य: "इन माय डिफेन्स गोड मी डिफेंड" (language?)
"मेरी रक्षा में भगवान मुझे बचाये"
राष्ट्रगान: विभिन्न
मुख्यत: "फ्लॉवर ऑफ स्कॉटलैंड"
स्कॉटलैंड की अवस्थिति
Status
राजधानीएडिनबर्ग
सबसे बड़ा शहरग्लासगो
55°51′N 4°16′W / 55.850°N 4.267°W / 55.850; -4.267
भाषाएँअंग्रेजी भाषा
क्षेत्रीय
भाषाएँ
नृजातीय समूह
(2011)
  • 96.0% श्वेत
  • 2.7% एशियाई
  • 0.7% काले
  • 0.4% मिश्रित
  • 0.2% अरब
  • 0.1% अन्य[1]
निवासीनाम
सरकारहस्तांतरित संसदीय प्रणाली संवैधानिक
राजशाही
e
विधानमंडलस्कॉटलैंड की संसद
स्थापना
9वीं शताब्दी (राष्ट्रीय मान्यता 843ई.)
1 मई 1707
19 नवम्बर 1998
क्षेत्रफल
• भूमि
77,933 कि॰मी2 (30,090 वर्ग मील)[2]
जनसंख्या
• 2013 आकलन
5,327,700[3]
• 2011 जनगणना
5,313,600[4]
• जनघनत्व
67.5/किमी2 (174.8/मील2)
जीडीपी (सांकेतिक)2013 प्राक्कलन
• कुल
$245.267 अरब[5]
(सम्मिलित आय,
उत्तरी समुद्री तेल से)
• प्रति व्यक्ति
$45,904
इंटरनेट टीएलडी.scotf
वेबसाइट
www.scotland.org
  1. अक्सर कम अक्षरों में "In Defens" दिखाया जाता है।
  2. फ्लॉवर ऑफ स्कॉटलैंड, स्कॉटलैंड द ब्रेव और स्कॉट्स व्हा हे आधिकारिक गान के तौर पर इस्तेमाल होते हैं (देखें स्कॉटलैंड का राष्ट्रगान)।
  3. क्षेत्रीय व अल्पसंख्यक भाषाओं के यूरोपीय चार्टर में स्कॉट्स और स्कॉटिश गाइलिक दोनों ही क्षेत्रीय भाषाओं के रूप में मान्यता प्राप्त हैं।[6]२००५ के गाइलिक भाषा कानून के तहत गैलिक के संवर्धन के उपाय किए गये हैं व स्कॉटिश सरकारी संस्थाओं में उसे अंग्रेजी के बराबर सम्मान व दर्ज़ा दिया गया है।[7]
  4. यूनाईटेड किंगडम के राष्ट्राध्यक्ष स्कॉटलैंड के शासक होते हैं (वर्तमान में महारानी एलिज़ाबेथ II, 1952 से)। स्कॉटलैंड की अपनी सरकार व यूके की संसद में प्रतिनिधित्व है। यह यूके के अंतर्गत आने वाली एक यूरोपीय संसद का निर्वाचन क्षेत्र भी है। कुछ विधायी अधिकार स्कॉटलैंड की सरकार को यूके की संसद की तरफ से हस्तांतरित किये गये हैं।
  5. .scot ccTLD नहीं बल्कि gTLD है जिसका इस्तेमाल स्कॉटिश लोग व स्कॉटलैंड से जुडी संस्थाएँ कर सकती हैं। .uk और .eu भी उपयोग किए जाते हैं।

स्कॉटलैण्ड की सीमा दक्षिण में इंग्लैंड से सटी है। इसके पूरब में उत्तरी सागर तथा दक्षिण-पश्चिम में नॉर्थ चैनेल और आयरिश सागर हैं। मुख्य भूमि के अलावा स्कॉटलैण्ड के अन्तर्गत ७९० से भी अधिक द्वीप हैं।

यूँ तो स्कॉटलैंड यूनाइटेड किंगडम के अधीन एक राज्य है लेकिन यहाँ का अपना मंत्रिमंडल है। यहाँ की मुद्रा का रंग और उस पर बने चित्र भी लंदन के पौंड से कुछ अलग है। लेकिन उनकी मान्यता और मूल्य दोनों ही पौंड के समान है। यहाँ घूमने और लोगों से बात करने पर पता चलता है कि यहाँ के लोग इंग्लैंड सरकार से थोड़े से खफा रहते हैं।[उद्धरण चाहिए]

भौगोलिक दृष्टि से स्कॉटलैंड को तीन प्राकृतिक भागों में विभाजित कर सकते हैं -

  • उत्तरी पहाड़ी भाग।
  • दक्षिणी पठारी भाग।
  • मध्य की घाटी।
 
स्कॉटलैंड

उत्तरी पहाड़ी भाग

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क्रिस्टली चट्टानों से निर्मित यह पहाड़ी भाग दो बड़े निचले भागों द्वारा, ग्लीनमोर तथा मिंच की घाटियों द्वारा तीन भागों में विभाजित हो जाता है। ग्लीनमोर का पतला निचला भाग प्राचीन चट्टानी भागों के विभंजन (Fracture) से निर्मित हुआ है, इसमें अब भी भूचाल आते हैं। यह उत्तरी पश्चिमी पहाड़ी भाग को मध्य के पहाड़ी भागों से अलग करता है। मिंच धसान घाटी है जो २४ किमी की लंबाई तथा ४८ किमी की चौड़ाई में, पतले चैनेल' के रूप में, स्कॉटलैंड के स्थलखंड को ह्व्रेााइड द्वीपसमूह से अलग करती है। पहाड़ी भाग की औसत ऊँचाई करीब ९१५ मी है यद्यपि कुछ चोटियाँ १२२० मी से ऊपर उठती हैं।

पहाड़ी भाग के पश्चिमी किनारे पर द्वीपों तथा प्रायद्वीपों की एक पतली कतार मिलती है। दक्षिण की ओर बूटे, अरान, मुल ऑव केटियर, जुरा और इसले; फिर द्वीपों की एक पंक्ति, स्लीट, इग, कोल, टिरि और स्केरी वोर राक, मिलती है। समुद्रतट के निकट इनर ह्व्रेााइड्स तथा मिंच के उस पार आउटर ह्व्रेााइड्स के द्वीप मिलते हैं। अंत में पेंटलैंड की खाड़ी के उस पार आर्केनी तथा शेटलैंड के द्वीप मिलते हैं। उत्तरी ह्व्रेााइड द्वीपसमूह आपस में इतने अधिक संबद्ध हैं कि उसे 'लाग आइलैंड' की संज्ञा दी जाती है।

इस क्षेत्र में स्थल तथा समुद्र एक दूसरे से इतने संलग्न तथा मिश्रित दीख पड़ते हैं कि 'ग्रीकी' के शब्दों में इस स्थल पर चट्टान, पानी तथा 'पीट' ही देखने को मिलते हैं। आर्केनी द्वीपसमूह में २८ बसे हुए तथा २९ 'बेचिरागी' द्वीप सम्मिलित हैं।

परंतु पूर्वी भाग में न तो इतनी झीलें मिलती हैं और न ऐसी चट्टानीश् भूमि, बल्कि समुद्रतट पर कुछ चौड़े मैदान भी मिलते हैं। द्वीप भी नहीं मिलते। नदियाँ ज्वारमुहानें बनाती हैं।

आर्थिक रूपरेखा

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इस पर्वतीय भाग में, ऊबड़ खाबड़ धरातल, मिट्टी के छिछले जमाव तथा समुद्र के धरातल से अधिक ऊँचाई के कारण खेती की सुविधा नहीं है। कृषि योग्य भूमि केवल नदियों की घाटी तथा समुद्रतट तक ही सीमित है। २७५ मीटर की ऊँचाई कृषिक्षेत्रों की ऊपरी सीमा निर्धारित करती है। अधिकतर भाग की भूमि बेकार है। मिट्टी अधिकतर रेतीली, कंकरीली, पथरीली तथा छिद्रयुक्त होने के कारण कम उपजाऊ होती है। परंतु पूर्वी भाग में गर्मी की ऋतु में ताप पश्चिम की अपेक्षा अधिक होता है और उत्तर में रास तथा पश्चिम में क्लाइड की खाड़ी तक गेहूँ की खेती होती है। एबर्डीनशायर में ४८८ मी की ऊँचाई तक जई की खेती होती है।

जई स्कॉटलैंड का मुख्य खाद्यान्न है। कृषिक्षेत्र के २० प्रतिशत भाग में जई, ४-५ प्रतिशत भाग में आलू की तथा ४ प्रतिशत में जौ की खेती होती है।

यहाँ का मुख्य व्यवसाय पशुपालन है। पहाड़ी भाग में भेड़ पालने का व्यवसाय बहुत पुराना है। कुछ भागों में अधिक भेड़ें पाली जाती हैं और कुछ भाग में अधिक गाएँ पाली जाती हैं। घासवाले क्षेत्रों में शिकार करने की भी प्रथा प्रचलित है। क्षेत्र का सबसे बड़ा नगर एबर्डीन है।

स्कॉटलैंड का यह भाग सदैव अन्य भागों से पृथक् रहा है। १८वीं शताब्दी तक 'हाईलैंडर' लोगों ने अपनी पोशाक, रीति रिवाज और लड़ाई झगड़े की प्रवृत्ति कायम रखी थी। वे लोग गैलिक भाषा बोलते थे। भेड़ पालने के तौर-तरीकों में पीछे सुधार हुआ और रेलों तथा सड़कों के बनने से उनमें नया जीवन आया।

मोरे की खाड़ी के निकट वाले पूर्वी समुद्रतटीय मैदान में और ही दृश्य देखने को मिलता है। कृषि तथा मछली पकड़ना यहाँ का मुख्य उद्यम है। इस उपजाऊ भाग में इस विभाग के लोग निवास करते हैं। वलाटर, गैनटाउन, डारनोच और इवरनेस मुख्य व्यापारी नगर हैं। मत्स्य व्यवसाय के कारण समुद्रतट पर छोटे-छोटे मत्स्यनगर (fishing towns) बस गए हैं।

मध्य की घाटी

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उत्तर के प्राचीन पहाड़ी भाग तथा दक्षिण के पठारी भाग के बीच दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व की दिशा में फैला हुआ एक ऊँचा नीचा मैदान है। बीच बीच में नदियों के बड़े-बड़े ज्वारमुहानों के घुस जाने के फलस्वरूप मैदान सँकरा हो गया है और उसका क्षेत्रफल पूरे स्कॉटलैंड के क्षेत्रफल का केवल एक चौथाई है। यह भूमिखंड, जो मध्य की घाटी के नाम से प्रसिद्ध है, यहाँ की अधिक उपजाऊ भूमि समुद्र से संबद्ध होने, आवागमन के साधनों की सुगमता तथा खनिज पदार्थों की उपलब्धि के कारण शताब्दियों से स्कॉटलैंड के आर्थिक एवं सांस्कृतिक जीवन का मुख्य केंद्र रहा है। यहाँ पर स्कॉटलैंड के दो तिहाई लोग निवास करते हैं। ग्रेट ब्रिटेन का दूसरा बड़ा नगर ग्लासगो, इसी भाग में स्थित है।

मध्य की घाटी धँसान की घाटी है जिसके उत्तर तथा दक्षिण की ओर भ्रंष (jault) की पक्तियाँ मिलती हैं। निचले भाग में डिवोनी तथा कार्बोनीफेरस युग की चट्टानें लाल पत्थर, शेल, कोयला, मृत्तिका, और चूनापत्थर आदि मिलते हैं। घाटी का पूर्वी भाग अपनी उपजाऊ भूमि के लिए प्रसिद्ध है, यहाँ गेहूँ, जई, जौ, आल, क्लवर, लूसर्न, और सलगम की अच्छी उपज होती है। भेड़ तथा गोपालन आर्थिक दृष्टि से अच्छा उद्यम माना जाता है। बगीचों में फल उगाए जाते हैं।

कुछ नगर उपजाऊ मैदान में स्थित हैं और वहाँ कृषि मंडियाँ (Agricultural towns) हैं। कुछ नगर, जैसे स्टिरलिंग और पर्थ, अपनी भौगोलिक स्थितियों के कारण बड़े नगर हो गए हैं। फोर्थ नदी के ज्वारमुहाने पर खदानें मिलती हैं। इसके दक्षिणी तट पर लोथियन की कोयले की खदानें विस्तृत हैं जिसकी ४६ तहों की कुल मोटाई ४० मी है। फिफीशिर तथा क्लाकयन कोयले की अन्य खदानें हैं। इसके फलस्वरूप यहाँ लोहे के कई कारखानें हैं। यहाँ लिनलिथगो तथा मिडलोथियन में खनिज तेल की प्रमुख खानें हैं।

टे के ज्वार मुहाने पर जूट, मोटे कपड़े तथा लिनेन (Linen) तैयार करने के उद्योग बहुत पहले से केंद्रित हैं। इन उद्योगों से संबंधित नगर समुद्रतट पर डंडी से फोर्थ तक बिखरे हुए हैं। कपड़े की सफाई तथा रंगाई पर्थ में होेती है परंतु जूट तथा लिनेन का मुख्य केंद्र डंडी है। प्रारंभ में यह मत्स्यकेंद्र था जहाँ ह्वेल पकड़ने का विशेष कार्य होता था। जहाजनिर्माण का भी कार्य यहाँ होता था, परंतु अब यह मुख्यतया लिनेन, सन (हेंप) तथा जूट का ही काम करता है। यहाँ के कारखाने बोरे, टाट तथा जूट के कपड़े तथा चद्दरें (sheets) तैयार करते हैं। सन् १८८० तक डंडी के मुकाबिले में जूट के कारखाने स्थापित हो जाने से इसका एकाधिकार समाप्त हो गया। आसपास में फल उत्पन्न होने के कारण यहाँ जैम उद्योग स्थापित हो गया है। अत: बाहर से आयात होनेवाली वस्तुओं में चीनी की मात्रा अधिक रहती है। उद्योग धंधों के विकास के साथ जनसंख्या का विकास भी हुआ है।

स्कॉटलैंड की राजधानी एडिनबर्ग फोर्थ की खाड़ी पर उस ऐतिहासिक मार्ग पर स्थित है जो फर्थ, इस्टलिंग, डनफर्मलिन को संबद्ध करता है। नगर ज्वालामुखी पहाड़ियों पर स्थित है। प्रारंभ में नगर कैसिल राक तथा काल्टन हिल पर बसा था, धीरे-धीरे पूर्व में आर्थर्स सीट, पश्चिम में कास्टरफिन हिल और दक्षिण में ब्लैकफोर्ड हिल तक नगर का विकास हो गया। 'राक' के पश्चिमी मार्ग में प्राचीन दुर्ग तथा पूर्वी भाग में होली रुड अबे तथा राजमहल स्थित हैं। अबे तथा दुर्ग को हाईस्ट्रीट तथा कैनन गेट मार्गों द्वारा संबद्ध किया गया है। नगर के इस भाग में मकान बहुत करीब करीब हैं तथा इमारतें कई तल्ले ऊँची उठती हैं। १८वीं शताब्दी में ग्रेट ब्रिटेन की आर्थिक उन्नति के साथ नगर के उत्तर की ओर एक नए नगर की स्थापना हुई जो प्राचीन भाग से एक लंबे खंड द्वारा अलग होता है। इस नए नगर में सड़कें चौड़ी, सीधी तथा इमारतें खुली हुई हैं। प्रिंसेज स्ट्रीट यहाँ का मुख्य जनपथ है जो खड्ड के समांतर जाती है। खड्ड में उसकी तलहटी तक सुंदर फूलों के बाग लगे हुए हैं। लीथ इस नगर का मुख्य बंदरगाह है।

मध्य की घाटी में पश्चिमी तट पर संसार का एक प्रसिद्ध औद्योगिक केंद्र ग्लास्गो स्थित है। यह अपेक्षाकृत नवविकसित नगर है।

जहाज-निर्माण-उद्योग, जो क्लाइड के तट पर स्थापित हैं, सस्ते कोयले तथा लोहे की उपलब्धि के कारण केंद्रित तथा विकसित हो गए हैं। ग्लासगो से ग्रीनाक तक जलयानप्रांगण की दो कतारें पैट्रिक, क्लाइड बैंक, किल पैट्रिक, वाउलिंग और डनवर्टन आदि स्थलों पर मिलती हैं। जलयानप्रांगणों ने पोतनिर्माण संबंधी विशेष प्रकार के कार्य में विशेषता भी प्राप्त कर ली है - कहीं माल ढोनेवाली नावें तैयार होती हैं, कहीं, लाइनर्स, कहीं युद्धक जहाज, कही बड़े बड़े जहाज, कहीं जहाज संबंधी मशीनें आदि तैयार होती हैं। संसार के दो प्रसिद्ध जहाजों 'क्वीन मैरी' तथा 'क्वीन एलिजाबेथ' का निर्माण यहीं हुआ। सन् १८७१ ई. तक ग्रेट ब्रिटेन के ५० प्रतिशत जहाज (भार के रूप में) यहीं निर्मित होते थे। उसके पश्चात् इसमें ह्रास हुआ और १९२३ ई. में यह संख्या २८ प्रतिशत तक पहुँच गई।

कपड़े बुनने का काम लनार्कशिर, आयरशिर और रेनफ्रीशिर में अधिक विकसित हुआ है। वेसले कपड़ा की सिलाई के लिए संसार का सबसे बड़ा केंद्र है। किलमरनाक में पर्दे तथा फीते बनाने का कार्य होता है। डनवर्टन में रँगाई का काम होता है। लवार्कशिर में रेशमी कपड़े तैयार होते हैं।

इन सब उद्योगों के विकास के फलस्वरूप नगर का विस्तार नदी के दोनों किनारों पर बड़ी दूर तक चला गया है जिससे इसकी जनसंख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि होती गई।

इस विशाल नगर का प्रभाव आसपास के क्षेत्रों पर भी अधिक पड़ा है। इसके फलस्वरूप इसपर आश्रित अनेक औद्योगिक नगर स्थापित हो गए हैं। ग्लास्गो का प्रभाव फोर्थ तक विस्तृत है जहाँ ग्रग माउथ एक नदी पर स्थिति एक बंदरगाह है। क्लाइड नदी के निचले भाग में स्थित नगरों में जहाज बनाने का काम बहुत पहले से होता आया है।

दक्षिणी पठारी भाग

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स्काटलैंड के तीसरे भाग के अंतर्गत एक पठारी भाग की पेटी पड़ती है जो मध्य की घाटी तथा साल्वे की खाड़ी के बीच विस्तृत है। यह भाग उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिम की दिशा में फैला हुआ है। ऐतिहासिक दृष्टि से इस भाग में इंग्लैंड तथा स्काटलैंड की राजनीतिक सीमा उत्तर से दक्षिण की ओर खिसकती रही है।

पठारी भाग की आधारशिला सिलूरियनयुग की शेल (Shale) हैं जिसमें अधिक मोड़ होने के फलस्वरूप एक चौड़े पठार का निर्माण हुआ है। इसका वर्तमान धरातल छोटे छोटे पेड़ों, झाड़ियों तथा घास के मैदानों से ढका हुआ है। पठारी भाग का कुछ स्थल ६०० मी से अधिक ऊँचा है। बीच बीच में चौड़ी घाटियाँ मिलती हैं। पश्चिम की ओर एत्रन, निथ, डी और क्री नदियाँ उत्तर पश्चिम से दक्षिण पूर्व को पठार के ढाल के अनुसार बहती हैं और साल्वे की खाड़ी में गिरती हैं। पूर्व की ओर ट्वीड की बड़ी घाटी द्वारा इस पठारी भाग के दो भाग हो जाते हैं - लमरप्यूर और चेवियट की पहाड़ियाँ। लमरम्यूर का धरातल अधिक समतल है जहाँ के घास के मैदानों में भेड़ पालने का कार्य होता है। ट्वीड के दक्षिण चेवियट की पहाड़ी दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व की दिशा में फैली हुई है। यह भाग प्राचीन शिस्ट (schist), लाल पत्थर, ग्रैनाइट और लावा आदि चट्टानों से निर्मित है। कुछ भाग घासों तथा झाड़ियों तथा पीट (Peat) से ढँका हुओ है परंतु पश्चिमी उत्तरी भाग में अधिक जंगल तथा हरियाली मिलती है। ट्वीड की घाटी की भूमि अधिक उपजाऊ है जहाँ पर इस भाग का अधिकांश जनसमूह निवास करता है।

दक्षिणी पठार का पश्चिमी भाग क्लाइड तथा सोलवे की खाड़ी के बीच प्रायद्वीप के रूप में है। यहाँ वर्षा की अधिकता और धूप की कमी के कारण खेती करने का कम अवसर है। अत: पशुपालन मुख्य धंधा है। मांस तथा दूध का उत्पादन अधिक होता है। १८० मी की ऊँचाई के ऊपर अधिकतर घास के मैदान ही मिलते हैं जहाँ भेड़ अधिक संख्या में चराई जाती हैं।

पठार का पूर्वी भाग जो उत्तरी सागर के तट पर पड़ता है, नीचा उपजाऊ भाग है। यहाँ धूप अपेक्षाकृत अधिक होती है। यहाँ कृषियोग्य भूमि तथा चरागाह मिलते हैं, जहाँ गेहूँ, जई, जौ, आलू इत्यादि फसलें उगाई जाती हैं। ऊँचे भागों में भेड़ पालना मुख्य पेशा है। चेवियट की भेड़ें अपने ऊन के लिए जगत्प्रसिद्ध हैं।

इस उन्नत तथा धनी प्रदेश के लिए इंग्लैंड तथा स्कॉटलैंड में अक्सर युद्ध होता रहा है। अत: सभी मुख्य नगर कभी न कभी युद्धस्थल रह चुके हैं जहाँ पुराने किले के भग्नावशेष अब भी मिलते हैं। इसी भाग से होकर इंग्लैंड तथा स्कॉटलैंड के बीच के प्रमुख स्थलमार्ग, रेल तथा सड़कें जाते हैं।

स्कॉटलैंड खूबसूरत कासल्स (किलो) का देश। ऐसा देश जिसे इतिहास बेहतरीन योद्धाओं, बैगपाइपर के अनोखे संगीत और स्कर्ट पहनने वाले पुरुषों के नाम से जानता है। लेकिन स्कॉटलैंड की पहचान सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है।

इस जगह की खास बात यह है कि यहाँ के सैंडी बीच अभी तक लोगों की नजरों से बचे हुए हैं। इसलिए यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता को आधुनिकता का ग्रहण नहीं लगा है। इस बात को लेकर स्काटिश सरकार खासी सचेत भी है। यहाँ की खूबसूरत वादियों के चप्पे-चप्पे पर नए पुराने किलों का अनूठा संगम दिखाई देता है। लेकिन प्रकृति भी इस जगह पर कम मेहरबान नहीं है। यदि आप भीड़-भाड़ से दूर एंकात में प्रकृति की अनुपम छटा को निहारना चाहते हैं तो स्कॉटलैंड के पास आपको देने के लिए काफी कुछ है।

ग्लासगो- विश्व प्रसिद्ध कवि राबर्ट बर्न की जन्मस्थली है। ग्लासगो स्कॉटलैंड की राजधानी भी है। खूबसूरत किलों के इस शहर में बेहद खूबसूरत घास के मैदान हैं। जिन्हें दुनिया के बेहतरीन गोल्फ मैदानों में बदल दिया गया है। गोल्फ प्रेमियों के लिए जन्नत कहलाने वाले ग्लासगो में दुनिया के बेहतरीन 40 गोल्फ कोर्ट हैं। यहाँ गोल्फ खिलाया ही नहीं जाता बल्कि सिखाया भी जाता है। यदि आप भी सफेद गेंद और स्टिक पर हाथ आजमाना चाहते हैं तो ग्लासगो का चक्कर जरूर लगाइएगा।

गोल्फ के अलावा साइकलिंग, पैदल चलने, घूमने-फिरने, मछली पकड़ने के लिए भी यह बेहतरीन जगह है। यदि आप स्कॉटलैंड के व्यापार-व्यवसाय को समझना-जानना चाहते हैं, यहाँ की संस्कृति, रहन-सहन को जानना चाहते हैं तो यहाँ के बाजारों में जरूर जाएँ। हो सकता है आपकी जेब कुछ हल्की हो जाए लेकिन स्कॉटलैंड को पास से जानने का सुनहरा मौका भी मिलेगा।
इनवरनेस- इनवरनेस खूबसूरत लैंडस्कैप के बीच समुद्र को अपनी बांहों में समेटे बेहद खूबसूरत जगह है। जहाँ के सैंडी बीचों पर आप घंटों चहलकदमी कर सकते हैं। स्कॉटलैंड के ग्रामीण क्षेत्रों में यह सबसे खूबसूरत है। यदि आप रोमांचक छुट्टी बिताने के मूड में हैं तो इनवरनेस आपको बुला रहा है। माउंटेनिंग, क्लाइबिंग और ऑफ रोड बाइक चलाने के शौकीन लोगों के लिए यहाँ खास सुविधाएँ हैं।

वैसे यहाँ का समुद्र भी कई रहस्यों को खुद में समेटे हुए है। कहा जाता है कि यहाँ के समुद्र में डायनासोर के कुछ वशंज आज भी रहते हैं। तीस-चालीस के दशक में कई लोगों ने विचित्र जलचर देखने का दावा किया था। जिस पर आधारित कई किस्से यहाँ प्रचलित हैं। इन किस्सों के आधार पर यहाँ एक पार्क बना है जिसमें किस्सों के नायक नन्हें डायनासौर को नैसी नाम दिया गया है। इनवरनेस से लौटते समय आप नैसी नामक इस प्यारे से डायनासौर के क्रिएचर याद के रूप में अपने साथ ले जा सकते हैं।
एडिनबर्ग- यदि आप स्कॉटलैंड के खूनी इतिहास से रूबरू होना चाहते हैं।....यहाँ के वीर योद्धाओं के बारे में जानना चाहते हैं।....महसूस करना चाहते हैं कि स्कॉटिश पुलिस दुनिया में सबसे बेहतरीन क्यों मानी जाती है तो आपको एडिनबर्ग आना होगा।

एडिनबर्ग ऐसा शहर हैं जहाँ स्कॉटलैंड की सीमा समाप्त होती है। सीमा पर होने के कारण यह शहर हमेशा दुश्मनों से लोहा लेता रहा हैं। यहाँ अतीत के भयावह मंजरों को अपने सीने में समाएं कई किले भग्नावशेष के रूप में आज भी खड़े हैं। कहते हैं यह शहर हमेशा से इंग्लैंड के ताज की रक्षा करता रहा है। यहाँ के संग्रहालयों में आप अतीत के कई रहस्यों से रूबरू हो सकते हैं।

लेकिन घूमने के लिए यहाँ केवल एतिहासिक चिन्ह ही नहीं बल्कि काफी कुछ और भी है। नदियों, पहाड़ियों, वादियों के इस शहर की नैसर्गिक खूबसूरती देखते ही बनती है।
स्टरलिंग- यदि आप स्कॉटलैंड से सही मायनो में रूबरू होना चाहते हैं तो आपको स्टरलिंग आना होगा। स्टरलिंग को स्कॉटलैंड की जन्मभूमी कहा जाता है। यहीं से ईसाई धर्म ने स्कॉटलैंड में प्रवेश किया था। यहाँ पर आप खूबसूरत आइसलैंड हैबरडैन का नजारा ले सकते हैं। जिसकी खूबसूरती विश्वविख्यात है। यहाँ ऊँचे पहाड़ों और नीचे मैदानों का अद्भुत संगम है। इस शहर में आप जहाँ भी नजरें दौड़ाएंगें आपको दूर-दूर तक फैली हरितिमा नजर आएगी।

खूबसूरती के साथ ही आप यहाँ स्कॉटलैंड़ के खूबसूरत वन्य जीवन से छोटी मुलाकात भी कर सकते हैं। यहाँ ईगल, जंगली बिल्लियों से लेकर डॉलफिन और वेल जैसी दुर्लभ मछलियाँ अच्छी तादात में पाई जाती हैं। यदि वक्त और जगह सही हो तो आप इन्हें आराम से अपने कैमरे में कैद कर सकते हैं।
एबरडीन- यदि आप खूबसूरत सीनरियों के शौकीन हैं तो यह शहर आपको बेहद पसंद आएगा। यहाँ की पहाड़ियों से उगते और ढ़लते सूरज को निहारना अलग ही अनुभव देता है। इस शहर को देख कर लगता है कि प्रकृति के कुशल चितेरे ने हर तरफ एक नया रंग भरा है। यह शहर प्राचीनता और नवीनता का अनूठा संगम है।

यदि आप खूबसूरत सीनरियों के शौकीन हैं तो यह शहर आपको बेहद पसंद आएगा। यहाँ की पहाड़ियों से उगते और ढ़लते सूरज को निहारना अलग ही अनुभव देता है। इस शहर को देख कर लगता है कि प्रकृति के कुशल चितेरे ने हर तरफ एक नया रंग भरा है। यदि आप ओल्ड टाऊन निकल जाए तो पुराने स्कॉटलैंड के नजारे नजर आएंगे। और यदि नए टाऊन में कदम रखें तो बेहतरीन रेस्त्रां, खूबसूरत नाइटक्लब आपकी बाट जोहते दिखाई देंगे। यहाँ आप स्क़ॉटलैंड के पारंपरिक भोजन का स्वाद ले सकते हैं। यदि आप मांसहारी है तो यह जगह आपके लिए जन्नत से कम नहीं।

गरमी और वसंत का मौसम इस बेहद खूबसूरत प्रांत को निहारने का सही वक्त है। यदि आप अक्टूबर-नवंबर में यहाँ आने की सोच रहे हैं तो भूल जाइए। यहाँ इतनी ज्यादा ठंड पड़ती है कि आप कमरे से बाहर कदम रखने से पहले दस बार सोचेंगे जरूर।

इसी के साथ यहाँ ठहरने के लिए होटल का कमरा बुक करने से अच्छा है बेड एंड ब्रेकफास्ट पेइंग गेस्ट हाऊस में ठहरा जाएं। य़ह होटल की तुलना में बेहद सस्ते और आरामदायक तो होते ही हैं, साथ ही नाश्ते में आप स्कॉटिश चीज, बटर के साथ ही पारंपरिक भोजन का लुफ्त उठा सकते हैं। कुल मिलाकर स्कॉटलैंड में आप एक ऐसी दुनियाँ से साक्षात्कार करेंगे जिसके बारे में आपने न पहले कभी सुना होगा न देखा होगा।

  1. "Ethnic groups, Scotland, 2001 and 2011" (PDF). स्कॉटिश सरकार. 2013. मूल से 12 दिसंबर 2013 को पुरालेखित (PDF). अभिगमन तिथि 9 दिसम्बर 2013.
  2. Region and Country Profiles, Key Statistics and Profiles, October 2013 Archived 2015-09-24 at the वेबैक मशीन, ONS. अभिगमन तिथि 9 अगस्त 2015.
  3. "Scotland's Population at its Highest Ever". स्कॉटलैंड का राष्ट्रीय अभिलेखागार. 30 अप्रैल 2014. अभिगमन तिथि 30 अप्रैल 2014.[मृत कड़ियाँ]
  4. "Population estimates by sex, age and administrative area, Scotland, 2011 and 2012". स्कॉटलैंड का राष्ट्रीय अभिलेखागार. 8 अगस्त 2013. अभिगमन तिथि 8 अगस्त 2013.
  5. स्कॉटिश सरकार. "Key Economy Statistics". मूल से 25 फ़रवरी 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 22 अगस्त 2014.
  6. "European Charter for Regional or Minority Languages". स्कॉटलैंड की सरकार. अभिगमन तिथि 23 अक्टूबर 2011.[मृत कड़ियाँ]
  7. मैक्लियॉड, ऐंगस (22 अप्रैल 2005). ""Gaelic given official status"". द टाइम्स. लंदन. मूल से 31 मई 2010 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2 अगस्त 2007. Italic or bold markup not allowed in: |work= (मदद)
  8. "St Andrew—Quick Facts". Scotland. org—The Official Online Gateway. मूल से 11 नवंबर 2007 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2 December 2007.
  9. "St Andrew". कैथोलिक ऑनलाइन. मूल से 30 नवंबर 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 नवम्बर 2011.
  10. "St Margaret of Scotland". कैथोलिक ऑनलाइन. मूल से 30 नवंबर 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 नवम्बर 2011.
    "Patron saints". कैथोलिक ऑनलाइन. मूल से 30 नवंबर 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 नवम्बर 2011.
  11. "St Columba". कैथोलिक ऑनलाइन. मूल से 5 सितंबर 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 नवंबर 2011.

बाहरी कडियाँ

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