लोहार

पारमपारिक रूप से लोहे के औजार बनाने वाला ब्यक्ति

उस व्यक्ति को लोहार कहते हैं जो लोहा या इस्पात का उपयोग करके विभिन्न वस्तुएँ बनाता है। हथौड़ा, छेनी, भाथी (धौंकनी) आदि औजारों का पयोग करके लोहार फाटक, ग्रिल, रेलिंग, खेती के औजार, कुछ बर्तन एवं हथियार आदि बनाता है।[1] लोहार एक मुख्य जाती है, जो विश्वकर्मा जी के पुत्र प्रथम पुत्र मनु के वंशज है, विश्वकर्मा जी के पांच जटाधारी पुत्र हुए, मनु , मय, त्वष्ठा, शिल्पी ,देवज्ञ। यह पाँच भाई हुए, इसमे से मनु लोहे के ज्ञाता थे, जिनसे लोहार वंश की उत्पत्ति हुई, लोहार एक जाति ना होकर एक कार्य है, जिसे हर समाज के लोग करते है, मुख्य रूप से लोहार विश्वकर्मा जाती से सम्बंध रखते है,।

लोहार
Kovář při práci (Velikonoční trhy na Václavském náměstí) 055.jpg
लोहार का काम
व्यवसाय
व्यवसाय प्रकार
व्यवसाय
गतिविधि क्षेत्र
पेशा
विवरण
दक्षता(एं)शारीरिक शक्ति, अवधारणा
रोज़गार
का क्षेत्र
कलाकार, शिल्पकार
संबंधित काम
नालबन्द
लोहार क मॉडल
प्राचीन समय मे लोहार , विश्वकर्मा ,रथकार, रथपति , एतब कह कर सम्बोधित करते थे,।

प्राचीन समय मे शिल्प कर्म बहुत ऊंचा था, जिसे हर वर्ण के लोग करते थे, ओर आज के समय मे भी हर वर्ण के लोग शिल्प कर्म करके ,अपना पालन पोषण कर रहे है।

कश्मीर में लोहार वंश का शाशन था, जिसका राजा संग्रामराज था।

( लोहार एक कर्म है, ऐसे करने वाले विश्वकर्मा है)

यह सभी वेदों ,ओर पुराणों से खोज कर लिखा गया है,

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लेखक धीरज विश्वकर्मा

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "blacksmith | Origin and meaning of blacksmith by Online Etymology Dictionary". www.etymonline.com (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2020-09-08.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें