सोना (स्वर्ण) चाँदी तथा अन्य बहुमूल्य धातुओं से आभूषण आदि बनाने का कार्य करने वाले और सोने-चाँदी, बहुमूल्य रत्नों के व्यापार करने वाले लोगों को सोनार कहते हैं। सोनार "वैश्य बनिया" पोद्दार की उपजातियों में से एक है। सोनार को ठाकुर स्वर्णकार या सर्राफ भी कहते हैं।

व्यवसायसंपादित करें

ये सोने-चाँदी के फैंसी आभूषण के निर्माता एवम् विक्रेता होते हैं। ज़ेवरों का निर्माण और बिक्री करना इनका पारम्परिक कार्य है।

उपस्थितीसंपादित करें

सोनार जातियाँ मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों में पायी जाती है। भारत के अन्य क्षेत्रों में भी सोनार की उपस्थिती देखी जा सकती है।भारत के मध्य भाग मे भी सुनार बहुतायात मे है