वनमानुष प्राइमेट् गण (Order primate) का प्रसिद्ध स्तनपोषी जीव है, जो अफ्रीका के घने जंगलों में, गिनी से लेकर कांगो तथा पश्चिमी यूगैंडा तक के जंगलों में पाया जाता है। अफ्रीका का यह प्रसिद्ध (ape) कद में गोरिल्ला से कुछ छोटा होता है, किंतु बुद्धिमानी में सब वानरों से आगे है।

Hominoids या वनमानुष
सामयिक शृंखला: Miocene–Holocene
Bornean orangutan (Pongo pygmaeus)
वैज्ञानिक वर्गीकरण
प्रकार जाति
होमो सेपियन्स
Linnaeus, 1758
परिवार

Equatorius
Proconsulidae
Afropithecidae
Pliobatidae
Dendropithecidae
Ekembo
Hylobatidae
Hominidae

बहन: Cercopithecoidea

दो तरुण वनमानुष

अन्य सब वानरों की अपेक्षा एप की आकृति मनुष्यों से अधिक मिलती है, किंतु वाक्शक्ति का अभाव होने के कारण ये मनुष्यों जैसे समाजनिर्माण तथा संस्कृति के विकास से वंचित हैं। फिर भी सिखाए जाने पर ये मनुष्यों की भाँति मेज, कुरसी पर बैठकर कांटे छुरी से भोजन कर लेते हैं और आदमियों की तरह और भी बहुत से काम करना सीख लेते हैं। वैसे तो वे वानरों की तरह चारों टाँगों के बल ही चलते हैं, किंतु सिखाए जाने पर ये अपनी पिछली टाँगों के सहारे खड़े होकर भी चल फिर लेते हैं। खड़े होने पर इनकी ऊँचाई चार साढ़े चार फुट तक की हो जाती है।

चिंपैंज़ी की एक बौनी जाति पैनपैनिस्कस (Pan paniscus) अफ्रीक में काँर्गो नदी के दक्षिणी भागों में पाई जाती हैं, किंतु इस जाति के चिंपैंज़ी बहुत कम मिलते हैं।

चिंपैंज़ी घने जंगलों में छोटे-छोटे गरोह बनाकर रहते हैं। गरोह में एक नर, कई मादाएँ तथा कई बच्चे और युवक रहते हैं। इनके बच्चों को प्रौढ़ होने से 9 से लेकर 12 वर्ष तक लग जाते हैं और एक गरोह जंगल में रहने के लिये लगभग 10 वर्ग मील का क्षेत्रफल अपने कब्जे में कर लेता है।

चिंपैंज़ी का मुख गोरिल्ला की तरह भयानक न होकर हँसोड़ जैसा लगता है और उसमें खूँखारी की जगह सभ्यता तथा बुद्धिमानी टपकती है। यह गोरिल्ला से अधिक समय पेड़ों पर बिताता है तथा किसी बड़े और ऊँचे पेड़ पर अपना भद्दा सा मचानुमा घर बनाता है। गोरिल्ला से यह कम बलवान होता है।

चिंपैंज़ी के नर मादा से कुछ बड़े होते हैं और उनका वजन करीब डेढ़ मन के होता हैं। इनके कान लंबे, रंग कलछौंह, पेट के बाल काले और चेहरे के चारों ओर का हिस्सा सफेदी लिए रहता है। अन्य वानरों की तरह ये भी फलाहारी जीव हैं। इनका मुख्य भोजन गन्ना, अनन्नास, कोको, केला तथा अन्य फल हैं, लेकिन उसी के साथ ये कीड़े, मकोड़े और अंडे भी मजे में खाते हैं। बचपन से पालतू किए जाने पर ये मांस मछली से भी परहेज नहीं करते।

इन्हें भी देखें

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बाहरी कड़ियाँ

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