शिव की आरती के बारे में जरुरी जानकारी
छो Reverted 1 edit by SamMahato (talk) to last revision by Parashar30 (TwinkleGlobal)
टैग: किए हुए कार्य को पूर्ववत करना मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन उन्नत मोबाइल संपादन
पंक्ति 3:
वास्तव में यह आरती त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, एवं शिव) की एकरूप स्तुति है। यहां यह बताया गया है कि ॐ में तीनों का रूप एक ही है।
 
== '''आरती''' ==
देवों के देव [[महादेव]] की आरती से आपके बिगड़े काम बन जाते हैं. सोमवार के दिन [[शिव]] आराधना करना फलदायी होता है. क्योकि [[सोमवार]] का दिन महादेव को समर्पित है. [[शिव]] जी की कृपा पाने के लिए भक्त सोमवार के दिन व्रत भी रखते हैं और शिव भक्ति में लीन रहते हैं. [[हिंदू धर्म]] में पूजा के बाद आरती करने का विधान है. भगवान शिव शंकर की आरती करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।<ref>{{Cite news|url=https://www.prabhatkhabar.com/religion/aarti-chalisa/shiv-ji-ki-aarti-in-hindi-know-important-things-before-puja-lord-shiva-then-read-jai-shiv-omkara-swami-rdy|title=भगवान शिव की आरती करने से पहले जानें जरूरी बातें|date=18 दिसंबर 2023|work=प्रभात खबर|access-date=19 दिसंबर 2023}}</ref>
 
== '''आरती''' ==
[[चित्र:शिव.png|अंगूठाकार|260x260पिक्सेल|शिव]]
ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु जय शिव ओंकारा।<br />
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
 
एकानन चतुरानन पंचानन राजे। शिव पंचानन राजे।<br />
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ हर हर हर महादेव.॥
 
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। प्रभु दस भुज अति सोहे।<br />
तीनों रूप निरखते। त्रिभुवन मन मोहे ॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
 
अक्षमाला बनमाला मुण्डमाला धारी। शिव मुण्डमाला धारी।<br />
चंदन मृगमद चंदा, सोहे त्रिपुरारी॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
 
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। शिव बाघम्बर अंगे।<br />
ब्रह्मादिक सनकादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
 
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता। शिव कर में त्रिशूल धर्ता।<br />
जगकर्ता जगहर्ता जगपालनकर्ता॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
 
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। स्वामी जानत अविवेका।<br />
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
 
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे। प्रभु प्रेम सहित गावे।<br />
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
 
== सन्दर्भ ==
'''<big>अर्थ:</big>'''
 
ओंकार (ॐ) रूप शिव की जय हो।
Line 33 ⟶ 40:
 
हंस पर आसीन (ब्रह्मा), गरुड़ पर आसीन (नारायण), व शिव अपने वाहन बैल के ऊपर सज्जित हैं।।
 
 
 
ब्रह्मा की दो भुजाएं हैं, विष्णु की चार भुजाएं हैं व शिव की दस भुजाएं बहत सुंदर लगती हैं।
Line 57 ⟶ 66:
 
वास्तव में प्रणव अक्षर (ॐ) में यह तीनों एक ही हैं।।
 
== सन्दर्भ ==
 
 
 
{{टिप्पणीसूची}}