गया में घूमने की जगह
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{{Infobox settlement
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|image_caption = गया का विष्णुपाद मंदिर, जिसमें [[विष्णु]] के चरण-चिन्ह होने की मान्यता है
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[[चित्र:Mahabodhitemple.jpg|right|thumb|280px|बोधगया का महाबोधि मन्दिर]]
'''गया''' (Gaya) [[भारत]] के [[बिहार]] राज्य के [[गया ज़िले]] में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय और बिहार राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। इस क्षेत्र के लोग मगही भाषा बोलते हैं और गया भारत के अतंरराष्ट्रीय पर्यटक स्थलों मे से एक हैं यहाँ पर विदेशी पर्यटकों लाखों की संख्या मे आते हैंइस नगर का [[हिन्दू धर्म|हिन्दू]], [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] और [[जैन धर्म|जैन]] धर्मों में गहरा ऐतिहासिक महत्व है। शहर का उल्लेख [[रामायण]] और [[महाभारत]] में मिलता है। गया तीन ओर से छोटी व पथरीली पहाड़ियों से घिरा है, जिनके नाम मंगला-गौरी, श्रृंग स्थान, रामशिला और ब्रह्मयोनि हैं। नगर के पूर्व में [[फल्गू नदी]] बहती है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=dSZ987-0Fb8C Bihar Tourism: Retrospect and Prospect]," Udai Prakash Sinha and Swargesh Kumar, Concept Publishing Company, 2012, ISBN 9788180697999</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=MMmNVZ4mP98C Revenue Administration in India: A Case Study of Bihar]," G. P. Singh, Mittal Publications, 1993, ISBN 9788170993810</ref>
 
[[गया]] [[बिहार]] का एक प्रमुख शहर है जो अपने धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। यह हिंदू धर्म के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है और माना जाता है कि यहां '''पितरों''' का श्राद्ध करने से उन्हें मोक्ष मिलता है। गया को विष्णुपद मंदिर के लिए भी जाना जाता है, जो भगवान विष्णु के पैरों के निशान को समर्पित है।
 
[[गया]] का इतिहास काफी पुराना है और इसका उल्लेख [[रामायण]] और [[महाभारत]] जैसे महाकाव्यों में भी मिलता है। शहर का नामकरण राक्षस राजा गयासुर के नाम पर हुआ है, जिसे भगवान विष्णु ने मारा था।
 
[[गया]] में कई अन्य मंदिर और दर्शनीय स्थल भी हैं, जिनमें [[बोधगया]], [[राजगीर]] और [[नालंदा]] शामिल हैं। [[बोधगया]] वह स्थान है जहां गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था और यह [[बौद्ध धर्म]] के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। [[राजगीर]] मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी और यहां कई ऐतिहासिक स्मारक देखे जा सकते हैं। [[नालंदा विश्वविद्यालय]] प्राचीन भारत के सबसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में से एक था और यहां से कई प्रसिद्ध विद्वान और दार्शनिक निकले हैं।<ref>{{Cite news|url=https://www.prabhatkhabar.com/state/bihar/gaya/wish-for-world-peace-under-the-shade-of-bodhi-tree-monks-from-different-countries-participated-asj|title=बोधिवृक्ष की छांव तले हुई विश्व शांति की कामना, भिन्न -भिन्न देशों के ढाई हजार से ज्यादा भिक्षु हुए शामिल|date=13 नवंबर 2023|work=प्रभात खबर}}</ref>
 
== विवरण ==
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===माँ तारा मंदिर, केसपा===
प्राचीन इतिहास मे मगध मे प्रमुख रूप से चैत्य वन तथा सिद्ध वन दो प्रमुख क्षेत्र थे। चैत्य वन मे मोरहर तथा पुनपुन का क्षेत्र केसपा कहा जाता था । पूर्व में माँ तारा के मंदिर के समीप से पुनपुन का प्रवाह था , तथा मंझार के पूर्व से मोरहर का । अर्थात मंझार से लेकर केसपा तक का संपूर्ण क्षेत्र केसपा के नाम से जाना जाता था। इस चैत्य वन के काश्यलपा क्षेत्र में मेन मंझार का क्षेत्र मंदार वन के नाम से जाना जाता था जहाँ कुचियानाथ का मठ था। कुचिया नाथ से भी बहुत पहले गया कश्यप नाम के बौद्ध संत का मठ था माँ तारा पीठ। बुचनन ने इसे बौद्ध - हिन्दु दोनो संप्रदायों का प्रमुख स्थान माना है।[[https://www.google.com/search?ei=VCJlXaTsLYeb9QO8n5wY&q=maa+tara+kespa&oq=maa+tara+kespa&gs_l=mobile-gws-wiz-serp.3..0i22i30l2j0i22i10i30j0i22i30j33i160.4161.12863..13676...5.0..3.346.6593.0j8j19j1......0....1.......8..35i39i19j35i39j46i39i19j46j0j0i131j0i67j46i67j46i2i203i275j0i2i203j0i10i2i203j0i13j0i13i30.cyGkRrUHx1k#trex=m_t:lcl_akp,rc_f:nav,rc_ludocids:17683707207999465324,rc_q:Maa%2520Tara%2520Temple,ru_q:Maa%2520Tara%2520Temple]]
 
'''दुन्गेश्वरी गुफा मंदिर'''
 
गया शहर से 11 km दुर दुन्गेश्वरी के शान पहाडियों के ऊपर बना हुआ है दुन्गेश्वरी का गुफ़ा मंदिर कहते हैं बद्ध जी ने गया में ज्ञान प्राप्ति से पूर्ण यहाँ कई साल बिताये थे. इस जगह को महाकाल की गुफाए भी कहा जाता है.
 
'''मुचालिंदा सरोवर'''
 
बोध गया के मोचारिम इलाके में बना हुआ है मुचालिंदा सरोवर, जिसका काफी पौराणिक महत्ब है. यहाँ पर सर्वर के बीचो बीच एक बद्ध जी की मूर्ति है. जिसको नाग के प्रतिमा ने ढका हुआ है. कहते है बद्ध जी को तूफ़ान से नाग देवता मुचालिंदा ने बचाया था जिसको ये प्रतिमा रुपान्द्रित करती है.
 
'''शाही भूटान मठ'''
 
शाही भूटान मठ गया में बना एक बौद्ध मठ है. इस मठ का नाम भूटान मठ इसीलिए पड़ा क्युकि इसे भूटान के राजा ने बनवाया था. इस बौद्ध मठ के अन्दर दीवारों पर की गयी कलाकृतिया देखने लायक है. जिसके द्वारा बौद्ध धर्म के बारे में दर्शाया गया है.<ref>{{Cite news|url=https://www.prabhatkhabar.com/life-and-style/travel/gaya-tourist-places-if-you-come-to-gaya-for-pind-daan-then-definitely-visit-these-places-pitru-paksha-2023-wat-thai-mahabodhi-temple-great-buddha-statue-sry|title=अगर पिंडदान के लिए गया आएं तो जरूर जाएं इन जगहों पर|date=20 सितम्बर 2023|work=प्रभात खबर|access-date=13 दिसंबर 2023}}</ref>
 
===दुर्लभ पीपल वृक्ष ( मेन-मंझार)===
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===कोचेश्वरनाथ===
कोच स्थित कोचेश्वरनाथ मठ अति प्राचीन शैव आस्था का केंद्र है।[[https://web.archive.org/web/20141224180957/http://www.bl.uk/onlinegallery/onlineex/apac/photocoll/t/019pho000001003u00079000.html]]
 
===खेतेश्वर महादेव(मेन)===
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=== रेल मार्ग ===
[[गया जन्कशन]] [[बिहार]] का दूसरा बड़ा [[रेलस्टेशन]] है। यह एक विशाल परिसर में स्थित है। इसमे ९ प्लेटफार्म है।
गया से [[पटना]], रांची,[[कोलकाता|धनबाद,कोलकाता]], [[पुरी]], [[बनारस]], [[चेन्नई]], [[मुम्बई]], [[नई दिल्ली]], [[नागपुर]], [[गुवाहाटी]], जयपुर, अजमेरशरीफ, हरिद्वार, ऋषिकेश, जम्मू-तवी आदि के लिए सीधी ट्रेनें है।
 
=== सड़क मार्ग ===
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==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20160418152222/http://www.pinddaangaya.bihar.gov.in/hindi%20version%20website/index.php?pg=home पितृपक्ष] (गया एवं अन्य धार्मिक स्थलों के बारे में)
*[https://web.archive.org/web/20160420054224/http://bharatparytan.blogspot.in/2013/12/blog-post_19.html सोन भण्डार गुफा, राजगीर]
 
== सन्दर्भ ==
"https://hi.wikipedia.org/wiki/गया" से प्राप्त