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अलबर्ट एक्का के बारे में जानकारी अपडेट
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==सैन्य जीवन==
उन्होंने सेना में बिहार रेजिमेंट से अपना कार्य शुरू किया। बाद में जब 14 गार्ड्स का गठन हुआ, तब एल्बर्ट अपने कुछ साथियों के साथ वहाँ स्थानांतरित कर किए गए। एल्बर्ट एक अच्छे योद्धा तो थे ही, यह हॉकी के भी अच्छे खिलाड़ी थे। [[१९७१ का भारत-पाक युद्ध|भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971]] में अलबर्ट एक्का वीरता, शौर्य और सैनिक हुनर का प्रदर्शन करते हुए अपने इकाई के सैनिकों की रक्षा की थी। इस अभियान के समय वे काफी घायल हो गये और ३ दिसम्बर १९७१ में इस दुनिया से विदा हो गए। [[भारत सरकार]] ने इनके बलिदान को देखते हुए मरणोपरांत सैनिकों को दिये जाने वाले उच्चतम सम्मान [[परमवीर चक्र]] से सम्मानित किया था।
 
[[झारखण्ड]] के [[गुमला जिला]] के जनजातीय बहुल जारी गांव में जन्मे [[अलबर्ट एक्का]] ने पाकिस्तान में घुसकर बंकर नष्ट किये थे और दुश्मनों को मार गिराया था।<ref>{{Cite news|url=https://www.prabhatkhabar.com/state/jharkhand/gumla/albert-ekka-entered-pakistan-and-destroyed-bunkers-killed-enemies-the-country-is-paying-tribute-smj|title=अलबर्ट एक्का ने पाकिस्तान में घुसकर बंकर किये थे नष्ट, दुश्मनों को मार गिराया था|date=3 दिसंबर 2022|work=प्रभात खबर|access-date=20 दिसंबर 2023}}</ref> अलबर्ट एक्का के आदम्य साहस के कारण ही 1971 के युद्ध में [[भारत]] ने [[पाकिस्तान]] को शिकस्त दी थी. इस युद्ध में तीन दिसंबर, 1971 को अलबर्ट एक्का शहीद हुए थे. मरणोपरांत उन्हें देश की सर्वश्रेष्ठ सम्मान [[परमवीर चक्र]] से सम्मानित किया गया था. 1971 के युद्ध में 15 [[भारतीय]] सैनिकों को मरता देख [[अलबर्ट एक्का]] दौड़ते हुए टॉप टावर के उपर चढ़ गये थे. उसके बाद टॉप टावर के मशीनगन को अपने कब्जे में लेकर दुश्मनों को तहस नहस कर दिये. इस दौरान उसे 20 से 25 गोलियां लगी. पूरा शरीर गोलियों से छलनी था. वे टॉप टावर से नीचे गिर गये. जहां उन्होंने अंतिम सांस ली थी।
 
==सन्दर्भ==