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* '''गण''' - मात्राओं और वर्णों की संख्या और क्रम की सुविधा के लिये तीन वर्णों के समूह को एक [[गण]] मान लिया जाता है। गणों की संख्या ८ है - [[यगण]] (।ऽऽ), [[मगण]] (ऽऽऽ), [[तगण]] (ऽऽ।), [[रगण]] (ऽ।ऽ), [[जगण]] (।ऽ।), [[भगण]] (ऽ।।), [[नगण]] (।।।) और [[सगण]] (।।ऽ)।
 
गणों को आसानी से याद करने के लिए एक सूत्र बना लिया गया है- '''यमाताराजभानसलगा''' । सूत्र के पहले आठ वर्णों में आठ गणों के नाम हैं। अन्तिम दो वर्ण ‘ल’ और ‘ग’ छन्दशास्त्र के [[दग्धाक्षर]] हैं। जिस गण की मात्राओं का स्वरूप जानना हो उसके आगे के दो अक्षरों को इस सूत्र से ले लें जैसे ‘मगण’ का स्वरूप जानने के लिए ‘मा’ तथा उसके आगे के दो अक्षर- ‘ता रा’ = मातारा (ऽऽऽ) ।
 
‘गण’ का विचार केवल वर्ण वृत्त में होता है मात्रिक छन्द इस बंधन से मुक्त होते हैं।