"अशोक के अभिलेख" के अवतरणों में अंतर

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(→‎बौद्ध धर्म को अपनाने का वर्णन: देवानम पियदस्सी असोक का अर्थ देवताओं के प्रिय राजा असोक नहीं बल्कि बुद्ध देव के प्रिय राजा असोक होता है। देवताओं के प्रिय असोक यह एक गलत व्याख्या है । सन्दर्भ : बौद्धदर्शन के महान जानकर डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद सिंह , सासाराम, बिहार)
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=== बौद्ध धर्म को अपनाने का वर्णन ===
सम्राट बताते हैं कि कलिंग को २६४ ईसापूर्व में पराजित करने के बाद उन्होंने पछतावे में बौद्ध धर्म अपनाया:
:''बुद्धदेवदेवों के प्रिय सम्राट प्रियदर्शी ने अपने राज्याभिषेक के आठ वर्ष बाद कलिंगों को पराजित किया। डेढ़ लाख लोगों को निर्वासित (बेघर) किया, एक लाख मारे गए और अन्य कारणों से और बहुत से मारे गए। कलिंगों को अधीन करके बुधदेव देवों-के -प्रिय को धर्म की ओर खिचाव हुआ, धर्म और धर्म-शिक्षा से प्रेम हुआ। अब बुद्धदेव देवों-के -प्रिय को कलिंगों को परास्त करने का गहरा पछतावा है। (शिलालेख संख्या १३)
 
बौद्ध बनाने के बाद अशोक ने [[भारत]]-भर में बौद्ध धार्मिक स्थलों पर यात्रा करी और उन स्थानों पर अक्सर शिलालेख वाले स्तम्भ लगवाए: