"रामकुमार वर्मा" के अवतरणों में अंतर

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==समालोचना==
सन १९३० में रचित 'बादल की म्रत्यु'उनका पहला एकांकी है, जो फैंटेसी के रूप में अत्यन्त लोकप्रिय हुआ। भारतीय आत्मा और पाश्चात्य तकनीक के समन्वय से उन्होंने हिन्दी एकांकी कला को निखार दिया। उन्होने ऐतिहासिक और सामाजिक दो तरह के एकांकी नाटकों की सृष्टि की। ऐतिहासिक नाटकों में उन्होने भारतीय इतिहास के स्वर्णिम प्रष्ठों से नाटकों की विषय वस्तु को ग्रहण कर चित्रों की ऐसी सुदृढ़ रुप रेखा प्रस्तुत की जो पाठकों में उच्च चारित्रिक संस्कार भर सके और सामियक जीवन की समस्याओं को समाधान की दिशा दे सके। उनके नाटक भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय उद्बोधन के स्वर बखूबी समेटे हुए हैं। गर्व के साथ वे कहते हैं, 'ऐतिहासिक एकांकीयों में भारतीय संस्कृति का मेरुदंड- नैतिक मूल्यों मे आस्था और विश्वास का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है।' उनके सामाजिक एकांकी प्रेम और सेक्स की समस्याओं से संबंधित हैं। ये एकांकी मानसिक अंतर्द्वद्व की आधारभूमि पर यथार्थवादी कलेवर में समाज और जीवन की वस्तुस्थिति तक पहुँचते हैं पर इन एकांकियों में लेखक की आदर्शवादी सोच इतनी गहरी है कि वे आदर्शवादी झोंक में यथार्थ को मन माना नाटकीय मोड़ दे बैठते हैं। इसलिये उनके स्त्री पात्र शिक्षा और नए संस्कारों के बावजूद प्रेम और जीवन के संघर्ष में जीवन का मोह त्यागकर प्रेम के लिये उत्सर्ग कर बैठते हैं मानो उत्सर्ग या प्राणांत ही सच्चे प्रेम की कसौटी हो। आधुनिक पात्रों पर भी लेखक ने अपनी आदर्शवादी विचारों के अनुरूप गढ़ा है।
 
कविता के छेत्र में डॉ वर्मा ने एक आध्यातमिक साधक की भूमिका के रूप में प्रेम को अराधना साधना कामाध्यम बनाकर उसी के आधार पर रहस्यवादी शैली की प्रेमाभिव्यंजन की। रहस्यवाद कि चरम अभिव्यक्ति यर्थाथवादी जीवन में किस तरह सम्भव है, इसे भी खोजा। वैयक्तित्व अनुभूतियों को उदधाटित करनेवाली उनकी कविताएँ रागात्मिका-व्रति के साथ- साथ बौदिक और दार्शनिक गहराइयों में भी उतरने का उपक्रम करती हैं।
 
==प्रमुख कृतियाँ==
7,505

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