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वीर अझगू मुतू कोणे

वीरन अझगू मुत्तू कोणे (1681-1739 A.D.), (जिन्हें अझगू मुत्तू कोणार व सर्वइकरार के नाम से भी जाना गया है)[1] एक यादव सेनापति थे व तमिलनाडू के मदुरै क्षेत्र के प्रथम स्वतन्त्रता सेनानी थे जिनहोने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ बगावत की थी।

अनुक्रम

प्रारम्भिक जीवनसंपादित करें

अझगू मुत्तू कोणे दक्षिण भारत में तिरुनेल्वेल्ली क्षेत्र के इट्टयप्पा के पोलीगर राजा इट्टयप्पा नाइकर के सेनापति थे। पहले वह मदुरै नायक के कुशल सेनापति थे परंतु कुछ मतभेद के कारण उन्होने वह पद त्याग दिया था। उसके बाद पोलीगर राजा ने उन्हे सहर्ष अपना सेनापति नियुक्त कर दिया।[2]

स्वाधीनता संग्रामसंपादित करें

अझगू मुतू कोणे (1728–1757) एक भारतीय क्रांतिकारी व स्वतन्त्रता सेनानी थे जिन्होने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह किया था।[3]


उन्हे भारत का प्रथम स्वतन्त्रता सेनानी माना जाता है जिन्होने 1857 के सैनिक विद्रोह से लगभग 100 वर्ष पहले ही 1750-1756 में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह खड़ा किया था।[4] 1756 में इस विद्रोह के दमन हेतु ब्रिटिश हुकूमत ने उनके राज्य पर कब्जा कर लिया था। राजा व सेनापति कोणे ने जंगलों में शरण ली थी। बाद में पठनयकनूर के लोगों के विश्वासघात के फलस्वरूप कोणे व उनके 7 साथी बीरांगिमेडु नामक स्थान पर अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष मे शहीद हो गए।[4] एट्टायपुरम के असफल युद्ध के बाद कोणे, राज- परिवार के साथ बच निकले थे। अंग्रेजों ने कोणे व उनके 258 साथियों को बाद मे बंदी बना लिया था। इतिहासकारों के अनुसार, सैनिकों के दाहिने हाथ को अंग्रेजों ने कटवा दिया था व कोणे को तोप से बांध कर उड़ा दिया गया था।[2][5]

अझगुमूत्तु कोणे पर बना वृत्तचित्रसंपादित करें

भारत के प्रथम स्वतन्त्रता सेनानी अझगू मुत्तू कोणे के जीवन जीवन चित्रण हेतु 2012 में निर्मित वृत्तचित्र के अनावरण समारोह के अवसर पर तत्कालीन वित्त मंत्री पी॰ चिदम्बरम ने कहा-

अझगू मुत्तू कोणे ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ने वाले अनेकों सेनानियों मे से एक थे जिन्होने विदेशी शासन के खिलाफ आम जनता की चेतना को जागृत किया था।[2]

उन्होने इस अवसर पर कोणे के सम्बद्ध यादव समुदाय पर आधारित एक शोध पत्र का विमोचन भी किया व कहा-

"स्वाधीनता हेतु कोणे के प्रयासो से कालांतर मे भारत के स्वतंत्रा संग्राम की एक संघर्ष शृंखला निर्मित हुयी व भारत की स्वाधीनता मे उनका योगदान अतुलनीय है।[2]" समारोह में कोणे के उत्तराधिकारी सेवतसामी यादव का उक्त मंत्री ने सम्मान भी किया [6]

अझगुमूत्तु कोणे डाक टिकटसंपादित करें

डाक टिकट पर मुद्रित अझगुमूत्तु कोणे की छवि

अझगुमूत्तु कोणे डाक टिकट[7] का विमोचन केन्द्रीय मंत्री श्री रवि शंकर प्रसाद ने किया।[8]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

संदर्भ सूत्रसंपादित करें

  1. "Azhagu Muthu Kone". People Azhagu Muthu Kone. Whoislog.info. अभिगमन तिथि 14 April 2015.
  2. "P Chidambaram releases documentary film on Alagumuthu Kone". The Times of India.
  3. National Council of Applied Economic Research 11, I. P. Estate, नई दिल्ली, 110002 (2014). Regional Tourism Satellite Account Tamil Nadu, 2009-10 (PDF). National Council of Applied Economic Research 11, I. P. Estate, नई दिल्ली, 110002: National Council of Applied Economic Research (NCAER) Parisila Bhawan, 11, Indraprastha Estate, नई दिल्ली–110 002. पृ॰ 15.
  4. Staff Reporter. "'Leaders who led freedom struggle were united'". द हिन्दू.
  5. प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया (December 23, 2012). "Role of South Indians in freedom struggle not highlighted:PC". Business Standard, प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया. Madurai. प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया. अभिगमन तिथि 14 April 2015.
  6. Staff Reporter. "'Leaders who led freedom struggle were united'". द हिन्दू.
  7. डाक टिकट
  8. "Union Minister releases stamp to commemorate freedom fighter Veeran Alagumuthu Kone".