वेण्वारोह (= वेणु + आरोह ; शाब्दिक अर्थ : 'बाँस पर चढ़ना') संगमग्राम के माधव (१३५०-१४२५) द्वारा संस्कृत में रचित एक खगोलीय गन्थ है। इस गन्थ में ७४ श्लोक हैं। इस ग्रन्थ में लगभग प्रत्येक आधे घण्टे बाद चन्द्रमा की सही स्थिति की गनना करने की विधि बतायी गयी है। इस विधि का नाम 'वेण्वारोह' या 'बाँस पर चढ़ना' इसलिये सार्थक है क्योंकि यह विधि बाँस पर चढ़ने के समान ही एक-एक चरण में समान दूरी तय करते हुए ऊपर ही ऊपर ले जाती है।

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