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वेदपाठ का अर्थ वेद के मंत्रों को गाना या पढ़ना। वेदों के मौखिक पाठ की एक अत्यन्त प्राचीन परम्परा रही है। वेदपाठ की यह परम्परा सबसे प्राचीन बिना टूटे चली आ रही परम्परा मानी जाती है। यूनेस्को ने ७ नवम्बर २००३ को वेदपाठ को मानवता के मौखिक एवं अमूर्त विरासत की श्रेष्ठ कृति घोषित किया था।

सन्दर्भसंपादित करें

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

इन्हें भी देखेंसंपादित करें