वैश्विक स्वास्थ्य वैश्विक संदर्भ में लोगों का स्वास्थ्य से संबंधित मामला है और यह किसी व्यक्ति के राष्ट्र की चिंताओं और दृष्टिकोण से परे मामला है।[1] स्वास्थ्य समस्याएं, जो राष्ट्रीय सीमाओं को पार कर जाती हैं या जिनका वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव पड़ता है, पर हमेशा जोर दिया जाता है।[2] इसे कुछ इस तरह से परिभाषित किया गया है, 'यह अध्ययन, शोध और अभ्यास का वह क्षेत्र है जिसमें दुनिया के लोगों के स्वास्थ्य सुधार और स्वास्थ्य में समानता प्राप्त करने को प्राथमिकता दी जाती है'.[3] इस प्रकार, विश्व स्तर पर स्वास्थ्य का संबंध दुनिया भर में स्वास्थ्य सुधार, असमानता में कमी और ऐसे वैश्विक खतरों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करना है जो राष्ट्रीय सीमाओं को नहीं मानता है।[4] इन मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित सिद्धांतों को लागू किया जाना वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य कहलाता है।[5]

स्वास्थ्य के लिए प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी वैश्विक स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ (WHO)) है। वैश्विक स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों पर प्रभाव डालनेवाली अन्य महत्वपूर्ण एजेंसियों में यूनिसेफ (UNICEF), विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्लूएफपी (WHP)) और विश्व बैंक भी शामिल हैं। वैश्विक स्वास्थ्य में सुधार के लिए एक बड़ी पहल संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दि घोषणा है, जो विश्व स्तर पर सहस्राब्दि विकास लक्ष्य का समर्थन करता है।[6]

इतिहास‍संपादित करें

वैश्विक स्वास्थ्य संगठन का गठन करने के लिए 1948 में विभिन्न राष्ट्रों के सदस्य नव गठित संयुक्त राष्ट्र की बैठक में इकट्ठा हुए. 1947 में मिस्र में एक हैजा महामारी ने 20,000 लोगों की जान ले ली और जिसने 1948 में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को मदद के लिए प्रोत्साहित किया।[7]

अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य समुदाय की तब से लेकर अब तक की एक सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसने चेचक का उन्मूलन कर दिया. संक्रमण का स्वाभाविक रूप से सामने आनेवाला अंतिम मामला 1977 में दर्ज किया गया। लेकिन एक अजीब तरीके से, चेचक की अति आत्मविश्वासी सफलता और प्रभावशीलता के बाद भी मलेरिया और अन्य बीमारियों के उन्मूलन के लिए प्रभावी प्रयास नहीं किया गया है। वास्तव में, अब वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय के भीतर इस बात को लेकर बहस होने लगी है कि अपेक्षाकृत कम खर्चीले और शायद कहीं अधिक प्रभावी प्राथमिक स्वास्थ्य और नियंत्रण प्रोग्राम के बदले अधिक महंगे उन्मूलन अभियान को छोड़ दिया जाना चाहिए.

अनुशासनात्मक दृष्टिकोणसंपादित करें

जनसांख्यिकी, अर्थशास्त्र, महामारी विज्ञान, राजनीतिक अर्थव्यवस्था और समाजशास्त्र समेत समाज विज्ञान के विषयों और चिकित्सा के साथ वैश्विक स्वास्थ्य एक अनुसंधान का क्षेत्र है। विभिन्न अनुशासनात्मक दृष्टिकोणों से, अंतर्राष्ट्रीय संदर्भों में यह स्वास्थ्य के वितरण और निर्धारकों पर केंद्रित है।

एक महामारी विज्ञान के दृष्टिकोण से यह एक प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य समस्याओं को दर्शाता है। चिकित्सा के परिप्रेक्ष्य में यह प्रमुख रोगों की पैथोलॉजी का वर्णन करता है और इन रोगों के रोकथाम, निदान और उपचार को बढ़ावा देता है।

आर्थिक परिप्रेक्ष्य में, व्यक्तिगत और जनता दोनों के स्वास्थ्य के लिए लागत-प्रभावशीलता और लागत-लाभ आवंटन दृष्टिकोण पर यह जोर देता है। सरकारों और गैर सरकारी संगठनों जैसे समग्र विश्लेषण के परिप्रेक्ष्य में स्वास्थ्य क्षेत्र में यह विश्लेषण पर केंद्रित रहता है। लागत-प्रभावशीलता विश्लेषण इस बात की तुलना करता है कि आर्थिक दृष्टिकोण से लागत और स्वास्थ्य प्रभाव के उपाय को प्राप्त करने के लिए, स्वास्थ्य निवेश सार्थक है या नहीं. स्वतंत्र उपायों और परस्पर अनन्य उपायों के बीच भेद करना जरूरी है। स्वतंत्र उपायों के लिए, औसत लागत-प्रभावशीलता अनुपात पर्याप्त होता है। हालांकि, जब परस्पर अनन्य उपायों की तुलना की जाती हैं, तब वृद्धिशील लागत-प्रभावशीलता अनुपात का उपयोग आवश्यक हो जाता है। बादवाली तुलना यह सुझाव देती है कि उपलब्ध संसाधनों से अधिक से अधिक स्वास्थ्य देखभाल प्रभाव को कैसे प्राप्त किया जाता है।

इस दृष्टिकोण से व्यक्तिगत स्वास्थ्य विश्लेषण की स्वास्थ्य की मांग और आपूर्ति पर केंद्रित होता है। स्वास्थ्य देखभाल की चाह सामान्य स्वास्थ्य की चाह से निकल कर आती है। उपभोक्ताओं के लिए स्वास्थ्य देखभाल की मांग "स्वास्थ्य पूंजी" के एक बड़े भंडार को हासिल करने के साधन के रूप में की जाती है। स्वास्थ्य के मामले में इष्टतम स्तर का निवेश वहीं होता है, जहां स्वास्थ्य पूंजी की सीमांत लागत से निकल कर आए इसके नतीजे सीमांत लाभ के बराबर होता है (एमसी=एमबी). समय के गुजरने के साथ, कुछ हद तक स्वास्थ्य की अवमूल्यन दर δ हो जाती है। अर्थव्यवस्था में सामान्य ब्याज दर आर से चिह्नित की जाती है। स्वास्थ्य की आपूर्ति प्रदाता प्रोत्साहन, बाज़ार निर्माण, बाज़ार संगठन और इन मुद्दों से संबंधित असंतुलित सूचना, स्वास्थ्य प्रावधान के मामले में गैर सरकारी और सरकारी संगठनों की भूमिका पर केंद्रित होती है।

इसके अलावा, नैतिक दृष्टिकोण वितरणात्मक विचारों पर जोर देता है। बचाव का नियम, जो ए.आर. जोसेन (1986) द्वारा आविष्कृत है, विस्तार संबंधी मुद्दों पर विचार करने का तरीका है। यह नियम स्पष्ट रूप से निर्देश देता है कि 'जहां कहीं भी संभव हो जीवन को बचाना अपना कर्तव्य महसूस करना है'.[8] निष्पक्ष न्याय पर जॉन रॉवेल्स के विचारों का वितरण एक संविदात्मक दृष्टिकोण है। स्वास्थ्य निष्पक्षता के मुख्य पहलुओं पर चर्चा करते हुए अमर्त्य सेन[9] ने इस दृष्टिकोण को लागू किया था। जैव-नैतिक अनुसंधान[10] भी न्याय के अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों की जांच मोटे तौर पर तीन समूह क्षेत्रों में करता है: (1) स्वास्थ्य के मामले में अन्यायपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय असमानताओं कहां बरती जा रही है?; (2) अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य असमानताएं से कहां से आती हैं?; (3) अगर हम उन सबसे नहीं मिल पाते हैं तो हम कैसे स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को कैसे पूरा कर सकेंगे?

वैश्विक स्वास्थ्य के लिए एक राजनीतिक दृष्टिकोण राजनीतिक अर्थव्यवस्था लागू करने पर जोर देता है। राजनीतिक अर्थव्यवस्था शब्द की उत्पत्ति उत्पादन के अध्ययन, खरीद और बिक्री से हुई है और इसका संबंध कानून, चुंगी और सरकार से है। नैतिक दर्शन की व्यु‍त्पत्ति (उदा. के लिए ग्लासगो विश्वविद्यालय में नैतिक दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर एडम स्मिथ थे), स्वास्थ्य की राजनीतिक अर्थव्यवस्था का अध्ययन है, जिसमें यह देखा जाता है कि राज्यों की अर्थव्यवस्था पर - राजनीति, इसलिए राजनीतिक अर्थव्यवस्था - का कुल जनसंख्या के स्वास्थ्य परिणामों पर कैसा प्रभाव पड़ता है।

पैमानासंपादित करें

वैश्विक स्वास्थ्य का विश्लेषण इस बात पर निर्भर करता है कि स्वास्थ्य की जिम्मेवारी को कैसे मापा जाए. डेली (DALY), क्वैली (QALY) और मृत्यु दर जैसे कई उपाय मौजूद हैं। पैमाने का चयन विवादास्पद हो सकता है, जिसमें व्यावहारिक और नैतिक विचार भी शामिल हैं।[11]

जीवन प्रत्याशासंपादित करें

एक निर्दिष्ट आबादी की औसत जीवन प्रत्याशा (जीवित रहने की औसत अवधि) का एक सांख्यिकीय माप है। ज्यादातर समय इसका उल्लेख एक दी गई मानव आबादी के लिए (राष्ट्र के द्वारा, वर्तमान उम्र के द्वारा, या अन्य जनसांख्यिकी के द्वारा) मृत्यु से पहले संभावित उम्र के लिए किया जाता है। जीवन के संभावित शेष समय को भी जीवन प्रत्याशा कहा जा सकता है और इसकी गणना किसी भी समूह के लिये किसी भी उम्र से की जा सकती है।

विकलांगता द्वारा समायोजित जीवन वर्ष (डेली)संपादित करें

विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष (डेली [DALY]) स्वास्थ्य का एक सारांश है, जो आबादी की सेहत में बीमारी के प्रभाव, अपंगता और मृत्यु दर को भी जोड़ता है। डेली विकलांगता के साथ जीने और समय से पहले मृत्यु दर के कारण दोनों को जोड़ कर मापा जाता है। 'स्वस्थ जीवन' बीत जाने को एक डेली के रूप में माना जा सकता है और बीमारी के बोझ को स्वास्थ्य की वर्तमान स्थिति और एक आदर्श स्थिति के बीच के अंतर से मापा जाता है, जिसमें हर कोई बढ़ती उम्र में भी बीमारी और अपंगता से आजाद जीवन जीता है। उदाहरण के लिए, लोगों में किसी बीमारी के कारण समय से पहले मृत्यु (वाईएलएल (YLL)) से होनेवाली जीवन हानि और किसी घटना विशेष के कारण विकलांगता से जीवन हानि (वाईएलडी (YLD)) के लिए सेहत की स्थिति डेली है। एक डेली परिपूर्ण स्वास्थ्य के एक साथ के नुकसान का प्रतिनिधित्व करता है।

गुणवत्ता समायोजित जीवन वर्ष (क्वाली)संपादित करें

गुणवत्ता समायोजित जीवन वर्ष या संक्षेप में क्वाली बीमारी बोझ को मापने का एक जरिया है, जिसमें जीवन जीने की गुणवत्ता और मात्रा दोनों शामिल हैं, जो कि चिकित्सा सलाह के लाभ की मात्रा को निर्धारित करने जैसा है। क्वाली मॉडल में उपयोगिता स्वतंत्र, जोखिम तटस्थता और निरंतर आनुपातिक दुविधात्मक व्यवहार की आवश्यकता है।[12] संभावित गुणवत्ता के साथ जीवन को जीने की उम्मीद क्वाली के लिए एक संख्या में जीवन की गुणवत्ता के साथ उम्मीद की उम्मीद अस्तित्व गठबंधन करने का प्रयास: अगर स्वस्थ जीवन प्रत्याशा के एक अतिरिक्त वर्ष एक (वर्ष) के एक मूल्य के लायक है, तो कम स्वस्थ जीवन प्रत्याशा एक साल (एक वर्ष) से भी कम की होती है। क्वाली गणना मूल्य के माप पर आधारित हैं जिसमें किसी व्यक्ति के जीवित रहने के संभावित वर्षों का अनुमान लगाया जाता है। कई तरीकों से इसे मापा जा सकता है: तकनीकी द्वारा सर्वेक्षण या विश्लेषण के साथ जिसमें स्वास्थ्य की वैकल्पिक स्थिति की प्राथमिकता के बारे में अनुकरण का दांव लगाया जाता है, जो कि वै‍कल्पिक स्वास्थ्य की स्थिति की सम्मति का अनुमान लगाता है; या किसी उपकरण के जरिए जो कि किसी लेन-देन पर आधारित होता है या संभावित जीवन काल जो कि उच्च गुणवत्ता वाले जीवन जीने के कम समय के लिए चिकित्सा सुझाव हो सकता है। उपयोगितावादी विश्लेषण के लिए क्वालीज उपयोगी होते हैं, लेकिन निष्पक्षता के दृष्टिकोण को इसमें शामिल नहीं किया जाता है।[11]

शिशु और बाल मृत्युसंपादित करें

जीवन प्रत्याशा और डेली/क्वाली औसत रोग बोझ का अच्छी तरह से प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि, जनसंख्या के सबसे गरीब वर्गों में शिशु मृत्यु दर और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर अधिक महत्वपूर्ण ढंग से स्वास्थ्य मामलों का प्रतिनिधित्व करता हैं। इसलिए, सेहत से संबंधित निष्पक्षता पर जब ध्यान दिया जाता है तो शास्त्रीय उपायों में बदलाव विशेष रूप से उपयोगी होते हैं।[13] ये उपाय बच्चों के अधिकार के मामलों में भी बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। 2001 में लगभग 56 लाख लोगों की मृत्यु हुई. इनमें से 10.6 मिलियन पांच साल के कम उम्र के बच्चे थे और इनमें से 99% बच्चे कम आय या मध्य स्तरीय आय वाले देशों में रहते थे।[14] इसका अर्थ यह हुआ कि हर दिन मोटे तौर पर 30,000 बच्चे मर रहे है।[15]

रुग्णतासंपादित करें

रुग्णता उपाय में विस्तार दर, व्यापकता और संचयी घटना शामिल हैं। विस्तार दर एक निर्दिष्ट समयावधि के भीतर किसी नई स्थिति के विकसित होने का खतरा है। हालांकि किसी अवधि के दौरान कभी-कभी नए मामलों की संख्या शिथिल के रूप में इसे ढीले-ढाले ढंग से व्यक्त किया गया है, इसे एक अनुपात या विभाजक के साथ एक दर के रूप में करने कहीं बेहतर होगा.

स्वास्थ्य स्थितियांसंपादित करें

शल्य रोग का कष्टसंपादित करें

जब कम आय वाले देशों में एचआईवी (HIV) से बहुत लोगों की जान चली जाती है, शल्य स्थिति जिसमें सड़क दुर्घटना से होनेवाला मानसिक आघात या अन्य जख्म, असाध्यता, कोमल ऊतक संक्रमण, जन्मजात विसंगतियां और बच्चे के जन्म की जटिलताएं शामिल हैं, जो बीमारी के बोझ में विश्ष्टि रूप से अपना योगदान करती हैं।[16] [3]. अनुमान है कि वैश्विक बीमारी के बोझ में शल्य रोग की हिस्सेदारी 11% है और इसमें 38% चोट लगने, 19% असाध्यता, 9% जन्मजात विसंगतियां, 6% गर्भधारण संबंधी जटिलताएं, 5% मोतियाबिंद और 4% प्रसवकालीन स्थितियां निहित हैं।[17] अनुमान है कि बहुसंख्यक शल्य डेली दक्षिण-पूर्व एशिया (48 मिलियन), जबकि अफ्रीका में दुनिया की सर्वोच्च प्रति व्यक्ति शल्य डेली दर है।[18] जैसा कि ऊपर चर्चा की गयी है, दुनिया भर में शल्य बीमारी के मामले में चोट का सबसे बड़ा योगदान है, सड़क यातायात दुर्घटनाओं (आरटीए (RTAs)) से घायल होना शल्य बीमारी में सबसे बड़ा योगदान करता है। डब्ल्यूएचओ (WHO) के अनुसार, हर रोज 3500 से अधिक मौत आरटीए के कारण होती है और इसमें लाखों जीवन भर के लिए अपंग हो जाते हैं। 2004 में विश्व स्तर पर डेली नुकसान में सड़क यातायात दुर्घटनाओं को नौवें प्रमुख कारण के रूप में दिखाया गया है और 2030 में इसके शीर्ष पांच पहुंच जाने की उम्मीद हैं। 2030 तक ऑल (एएलएल (ALL)) संक्रामक बीमारियों से चोट आगे निकल जाएगी.[19] [4]

सांस की बीमारियां और खसरासंपादित करें

श्वसन तंत्र और मध्य कान में संक्रमण शिशु और बच्चे की मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक हैं।[14] वयस्कों में, तपेदिक अत्यधिक प्रचलित है और यह रुग्णता तथा मृत्यु का महत्वपूर्ण कारण बनता है। एचआईवी के प्रसार से तपेदिक से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ गई है। भीड़भाड़ के कारण श्वसन संक्रमण के प्रसार की स्थिति बढ़ गयी है। मौजूदा टीकाकरण कार्यक्रम से काली खांसी के कारण हर साल 600 000 मौतों को रोका गया है। मोरबिलियस वायरस खसरा का कारण है और यह हवा के माध्यम से फैलता है। यह बेहद संक्रामक होता है और फ्लू के जैसे लक्षण जिसमें बुखार, खांसी और नासिका झिल्‍ली शोथ दिखाई देते हैं और कुछ ही दिनों के बाद दाने निकल आते हैं। टीकाकरण से इसे प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है। इसके बावजूद, 2007 में लगभग 200,000 लगभग लोगों की इससे मौत हुई, जिनमें ज्यादातर 5 साल से कम उम्र के बच्चे थे।[5] न्यूमोकोसी और हीमोफिलस इंफ्लूएंजा के कारण लगभग 50% बच्चों की मौत निमोनिया से हो जाती है और यह बैक्टीरियल मेनिंजाइटिस और सेप्सिस का कारण भी होता है। कम आय वाले देशों में न्यूमोकोसी और हीमोफिलस इंफ्यूएंजा के लिए नया टीका स्पष्ट रूप से लागत-प्रभावी है। विश्व स्तर पर इन दोनों टीकों के उपयोग करने से प्रति वर्ष कम से कम 1000000 बच्चे की मौत को रोके जाने का अनुमान है। अत्यधिक दीर्घकालिक प्रभाव के लिए, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के उपाय के रूप में बच्चों के टीकाकरण को एकीकृत किया जाना चाहिए.[20]

अतिसारीय रोगसंपादित करें

दुनिया भर में पांच साल से कम उम्रवाले बच्चों में अतिसारीय संक्रमण से होनेवाली मौत की दर 17 फीसदी है, बच्चों की मौत के मामले में यह दुनिया भर में दूसरा सब्से बड़ा आम कारण है।[21] खराब सफ़ाई व्यवस्था के कारण पानी, भोजन, बर्तन, हाथों और मक्खियों के माध्यम से संक्रमण में वृद्धि हो सकती है। रोटावायरस बेहद संक्रामक होता है और बच्चों में गंभीर दस्त तथा मृत्यु (सीए 20%) का एक प्रमुख कारण है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दस्त के रोटावायरस की रोकथाम के लिए केवल स्वच्छता के उपाय अपर्याप्त हैं।[22] रोटावायरस टीके अत्यधिक रक्षात्मक, सुरक्षित और संभावित रूप से लागत-प्रभावी हैं।[23] दस्त के कारण निर्जलीकरण का प्रभावी ढंग से मौखिक पुनर्जलीकरण उपचार (ओआरटी (ORT)) के माध्यम से इलाज होने पर मृत्यु दर में नाटकीय कमी आ सकती है।[24][25] पानी, चीनी और नमक या बेकिंग सोडा[26] को मिला कर और इसे दस्त से प्रभावित बच्चे को पिला कर निर्जलीकरण का इलाज कारगर ढंग से किया जा सकता है। स्तनपान को प्रोत्साहित किया जाना और जस्ता अनुपूरण महत्वपूर्ण पोषक उपायों में शामिल हैं।

एचआईवी/एड्स (HIV/AIDS)संपादित करें

ह्यूमन इम्यूनो वायरस (एचआईवी (HIV)) एक रेट्रोवायरस है, जो पहली बार 1980 के दशक में मानव में पाया गया। एचआईवी एक ऐसे बिन्दु पर पहुंच जाता है जहां संक्रमित व्यक्ति को एड्स या एक्वायर्ड इम्यूनो सिंड्रोम हो जाता है। एचआईवी से एड्स हो जाता है क्योंकि यह वायरस सीडी4+टी कोशिकाओं समाप्त कर देता है जो कि एक स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए आवश्यक हैं। एंटीरेट्रोवाइरल दवाएं जीवन को बढ़ाती हैं और शरीर में एचआईवी (HIV) की मात्रा को कम करके एड्स की शुरुआत होने में देरी करती है।

शारीरिक तरल पदार्थों के माध्यम से एचआईवी (HIV) का संक्रमण होता है। असुरक्षित यौन संबंध, नसों में नशीली दवाओं के प्रयोग, रक्ताधान और अशुद्ध सुईयां रक्त और अन्य तरल पदार्थ के माध्यम से एचआईवी (HIV) फैलता है। पहले समझा जाता था कि यह बीमारी नशीले पदार्थों का सेवन करनेवालों और समलैंगिकों को प्रभावित करती है, लेकिन यह किसीको भी प्रभावित कर सकती है। विश्व स्तर पर, एचआईवी (HIV) के विस्तार का प्राथमिक तरीका विषमलैंगिक संभोग के माध्यम से है। गर्भावस्था के दौरान एक गर्भवती महिला से उसके पेट में पल रहे बच्चे में या गर्भावस्था के बाद मां के दूध के माध्यम से भी यह संक्रमण पहुंच सकता है। चूंकि यह एक वैश्विक रोग है इसलिए यह किसी को भी प्रभावित कर सकता है, दुनिया की कुछ जगहों पर अनुपातहीन तरीके से इसका संक्रमण दर बहुत ही उच्च है।

मलेरियासंपादित करें

मलेरिया प्लाज्मोडियम नामक एक प्रोटोजोआ परजीवी द्वारा होनेवाला संक्रामक रोग है। यह संक्रमण मच्छर के काटने के माध्यम से फैलता है। इसके प्रारंभिक लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना और जी मिचलाना शामिल हो सकते हैं। प्रत्येक वर्ष मलेरिया के लगभग 500 मिलियन मामले दुनिया में देखने में आते हैं, सामान्य तौर पर अपेक्षाकृत कम विकसित देशों में बच्चों और गर्भवती महिलाओं में देखने में आता है।[27] मलेरिया किसी देश के आर्थिक विकास में बाधा पैदा कर सकता हैं। मलेरिया के आर्थिक प्रभाव में काम की उत्पादकता में कमी, इलाज का खर्च और उपचार में लगने वाला समय शामिल है।[28] कीटनाशक-उपचार वाली मच्छरदानी के उपयोग तथा शीघ्र आर्टीमिसिन आधारित संयोजन उपचार और गर्भावस्था में आंतरायिक निवारक समर्थित उपचार के द्वारा मलेरिया से होनेवाली मृत्यु को बड़ी तेजी और लागत-प्रभावी ढंग कम किए जा सकते हैं। हालांकि, अनुमान है कि अफ्रीका में केवल 23% बच्चे और 27% गर्भवती महिलाएं कीटनाशक-उपचार वाली मच्छरदानी में सोती हैं।[6]

पोषण और सूक्ष्म पोषक की कमीसंपादित करें

दुनिया में दो अरब से अधिक दो लोग सूक्ष्म पोषक तत्वों (विटामिन ए, आयरन, आयोडीन और जस्ता सहित) की कमी के खतरे के साथ जी रहे हैं। विकासशील देशों में पांच वर्ष के कम आयुवाले 53% बच्चों की मौत का कारण कुपोषण जनित संक्रामक बीमारी है।[29] आवृत्ति में वृद्धि, तीव्रता और बचपन में लंबे समय तक बीमार रहने (जिसमें खसरा निमोनिया और दस्त शामिल हैं) से कुपोषण प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचाता है। सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी बौद्धिक क्षमता, वृद्धि, विकास और वयस्क उत्पादकता को बाधित करती है।

हालांकि, संक्रमण भी एक महत्वपूर्ण कारण है और कुपोषण में उसका योगदान होता है। उदाहरण के लिए, गैस्ट्रो-इंटेस्टिनल संक्रमण का कारण दस्त होता है और एचआईवी, तपेदिक, आंत्र परजीवी तथा दीर्घकालिक संक्रमण और रक्ताल्पता में वृद्धि क्षय कर देता है।[30]

पांच वर्ष से कम उम्र के पचास लाख बच्चे विटामिन ए की कमी से प्रभावित हैं। ऐसी कमी रतौंधी का कारण होती है। गंभीर कमी ज़ेरोफ्थेल्मिया और कॉर्निया में घाव से संबंध रखती है, यह एक ऐसी स्थिति है, जिससे पूरी तरह अंधत्व हो सकता है। विटामिन ए प्रतिरक्षा प्रणाली और उपकला सतहों को बनाए रखने के काम से भी यह जुड़ा हुआ है। इस कारण से, विटामिन ए की कमी संक्रमण और बीमारी की अतिसंवेदनशीलता में इजाफा करती है। दरअसल, उन क्षेत्रों में जहां विटामिन ए की कमी उल्लेखनीय है वहां विटामिन ए का अनुपूरण बच्चों की मृत्यु दर को 23% कम करती है।[31]

दुनिया की लगभग एक-तिहाई महिलाएं और बच्चे लौह तत्व की कमी से प्रभावित हैं। लौह तत्व की कमी से रक्ताल्पता के साथ अन्य पोषक तत्वों की कमी और संक्रमण होता है और यह दुनिया भर में प्रसव मृत्यु, जन्म के पूर्व मृत्यु और मानसिक मंदता का भी कारण होता है। रक्ताल्पता वाले बच्चों को लौह तत्व अनुपूरक के साथ सूक्ष्म पोषक दिए जाने पर स्वास्थ्य और हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार होता है।[32] बच्चों में, लौह तत्व की कमी से सीखने की क्षमता तथा भावनात्मक और संज्ञानात्मक विकास प्रभावित होता है।[33]

आयोडीन की कमी प्रतिकार योग्य मानसिक मंदता का प्रमुख कारण है। प्रति वर्ष पांच करोड़ से भी ज्यादा शिशुओं का जन्म आयोडीन की कमी के खतरे के साथ होता है। इस विशेष उपाय के तहत गर्भवती महिलाएं, जिनमें आयोडीन की कमी है, को भी आबादी लक्ष्य में शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि आयोडीन कमीवाली गर्भवती महिलाओं में गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है और उनमें शिशु के विकास की क्षमता में भी कम हो जाती है।[33] व्यापक स्तर पर नमक के आयोडनीकरण का वैश्विक प्रयास इस समस्या को खत्म करने में मदद कर रहा हैं।

लेजरीनी और फिशर व अन्य के अनुसार, जस्ते की कमी दस्त, न्यूमोनिया और मलेरिया में मृत्यु के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।[34][35] माना जाता है कि दुनिया के लगभग 30% बच्चों की मृत्यु जस्ते की कमी से होती है। अनुपूरक दस्त की बारंबारता की अवधि को कम करता है।[36]

सूक्ष्म पोषक अनुपूरण कुपोषण को रोकने के उपाय में शामिल हैं, साथ में बुनियादी खाद्य पदार्थों के दृढ़ीकरण, आहार विविधीकरण, स्वच्छता आदि जैसे उपाय संक्रमण के विस्तार को कम करते हैं और स्तनपान को बढ़ावा देते हैं। आहार विविधीकरण का लक्ष्य नियमित भोजन में महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक में वृद्धि करना है। यह काम शिक्षा और एक विविध आहार के संवर्धन तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर और स्थानीय रूप से निर्मित खाद्य के उपयोग में सुधार के द्वारा के द्वारा किया जाता है।

पुरानी बीमारीसंपादित करें

पुरानी गैर-संक्रामक बीमारी का सापेक्ष महत्व बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए, टाइप 2 मधुमेह की दर, जो मोटापे से जुड़ा हुआ है, परंपरागत रूप से भूख स्तर के लिए जाने जाने वाले देशों में यह बढ़ रहा है। कम आय वाले देशों में, मधुमेह वाले व्यक्तियों की संख्या 84 मिलियन से बढ़ कर 2030 तक 228 मिलियन हो जाने की संभावना है।[37] मोटापा निवारणीय है, लेकिन यह बहुत सारी दीर्घकालिक बीमारियों, जैसे हृदय की बीमारी, मधुमेह, स्ट्रोक, कैंसर और सांस की बीमारियों के साथ जुड़ा हुआ है। डेली के मापक से पता चला है कि विश्व की लगभग 16 फीसदी बीमारियों के लिए मोटापा जिम्मेवार है।[37]

स्वास्थ्य उपायसंपादित करें

स्तनपान के लिए प्रोत्साहित किया जाना, जस्ता अनुपूरण, विटामिन ए का संवर्धन और अनुपूरण, नमक का आयोडनीकरण, हाथ धोने और स्वच्छता के अन्य उपाय, टीकाकरण, गंभीर तीव्र कुपोषण का इलाज आदि बच्चों के स्वास्थ्य और उनके जीवित रहने के लिए उपायों में शामिल हैं। मलेरिया महामारी वाले क्षेत्रों में कीटनाशक वाले मच्छरदानी और कुछ-कुछ अंतराल के बाद औषधीय उपचार मृत्यु दर को कम करता है।[38][39] .[40] अध्ययन के आधार पर विश्व स्वास्थ्य परिषद ने 32 उपचार और बचाव के उपायों की एक सूची दी है, जिससे संभवत: प्रति वर्ष एक मिलियन लोगों के जीवन को बचाया जा सकता है।[7]

इसे ज्यादा कारगर बनाने के लिए स्थानीय संदर्भों के उपायों को उपयुक्त, समयोचित और न्यायसंगत बनाने और नियत आबादी को शामिल कर अधिक से अधिक उपलब्धि को प्राप्त करने की जरूरत है। केवल आंशिक विस्तार क्षेत्र वाले उपाय लागत-प्रभावी नहीं हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, आंशिक विस्तार क्षेत्र वाले प्रतिरक्षण कार्यक्रम अक्सर ऐसे लोगों तक पहुंच पाने में विफल रहते हैं, जिनमें बीमारी होने का खतरा सबसे ज्यादा हो. इसके अलावा, अगर वितरण पर ध्यान नहीं दिया गया तो विस्तार क्षेत्र का अनुमान भ्रामक हो सकता है। इसीलिए, इसका अर्थ यह हुआ कि देखने में राष्ट्रीय कवरेज काफी पर्याप्त हो सकता है, लेकिन जब विस्तार से विश्लेषण किया जाएगा तो वह अपर्याप्त हो सकता है। इसे 'कवरेज का भ्रम' कहा गया है।[41]

स्वास्थ्य संबंधी उपायों के विस्तार क्षेत्र में प्रगति के मामले में, विशेष रूप से बच्चों और मातृ स्वास्थ्य (विकास सहस्राब्दी लक्ष्य 4 और 5) संबंधी मामलों में, यूनिसेफ द्वारा नेतृत्व के सहयोग से 68 कम आय वाले देशों का पता लगाया गया है, जो काउंटडाउन 2015 कहलाता है। इन देशों में 97% मां और बच्चे की मौत का अनुमान लगाया गया है।[8]

सन्दर्भसंपादित करें

  1. द वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन एंड द ट्रांसिशन फ्रॉम "इंटरनैशनल" टू "ग्लोबल" पब्लिक हेल्थ. ब्राउन एट अल, एजेपीएच (AJPH): जनवरी 2006, खंड 96 संख्या 1. http://www.ajph.org/cgi/reprint/96/1/62 Archived 1 अगस्त 2009 at the वेबैक मशीन.
  2. Global Health Initiative (2008). Why Global Health Matters. Washington, DC: FamiliesUSA. मूल से 8 मार्च 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 मार्च 2011.
  3. कोप्लन जेपी, बॉण्ड टीसी, मार्सन एमएच, एट अल; ग्लोबल हेल्थ एक्ज़ीक्यूटिव बोर्ड के लिए कंसोर्टियम विश्वविद्यालय. वैश्विक स्वास्थ्य के एक सामान्य परिभाषा के प्रति. लैंसेट. 2009;373:1993-1995.
  4. मैकफ़र्लेन एसबी, जेकब्स एम, काया ईई. वैश्विक स्वास्थ्य के नाम पर: शैक्षणिक संस्थानों में रुझान. जे सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति. 29(4):383-401. 2008
  5. पटेल वी, प्रिंस एम. ग्लोबल मानसिक स्वास्थ्य - ए न्यू ग्लोबल हेल्थ फिल्ड कम्स ऑफ़ एज. जामा. 2010;303:1976-1977.
  6. www.un.org/millenniumgoals/
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आगे पढ़ेंसंपादित करें

  • जेकबसेन केएच (2008) वैश्विक स्वास्थ्य का परिचय. जोन्स और बार्टलेट
  • स्कोलनिक आर (2008) आवश्यक जन स्वास्थ्य: ग्लोबल स्वास्थ्य के अनिवार्य. जोन्स और बार्टलेट.
  • लेविन आर (एड) (2007) आवश्यक लोक स्वास्थ्य: वैश्विक स्वास्थ्य में प्रकरण अध्ययन. जोन्स और बार्टलेट.
  • हल विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य व सामाजिक देखभाल संकाय द्वारा इन पुस्तकों को अपनाया गया है। बीएससी वैश्विक स्वास्थ्य और रोग (अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विकास और मानवीय राहत) के लिए और वैश्विक स्वास्थ्य प्रथम मॉड्यूल और वैश्विक स्वास्थ्य द्वितीय मॉड्यूल के नवीनतम अंकों को पढ़ना आवश्यक है।
  • लौन्चिंग ग्लिबल हेल्थ स्टीवन पामर. एन आर्बर, मिशिगन विश्वविद्यालय प्रेस, 2010.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें