शिरस्थान नेपाल का एक हिन्दू धार्मिक स्थल है। यह स्थान पश्चिम नेपाल के दैलेख जिले में अवस्थि है । यह स्थान पंचकोशी के पांच स्थानों में से एक है । ज्वाला क्षेत्र में रहे यह शिरस्थान एक महत्वपूर्म धार्मिक क्षेत्र है । ईस स्थान को श्रीस्थान भी कहाजाता है। शिरस्थान मन्दिर के ज्वाला दर्शन के लिए दैलेख जिला का मुख्यालय दैलेख बजार से १ घंटे की पैदल यात्रा या आधे घंटे की सवारी साधन में पहुंचा जासकता है । नेपाल की भूमी में सब से महत्वपूर्ण मानागया शिरस्थान में जलज्वाला सदियों से निरंतर जलते हुए दिखा जा सकता है । नदी के किनारे किनारे पर भी कई सारे ज्वालायें जलते हुए यहां देखने को मिलता है। दैलेख जिला के मुख्यालय से ८ किलोमिटर पश्चिम गमौडी गाविस में रहे श्रीस्थान ज्वालायें अभी तक जलरहे हें । ईस जगह पर नदी के पानी तक में आग की ज्वालायें जलते हुए देखनेको मिलता है । वि.सं. १६२५ में दुल्लु राज्य के राजा प्रताप शाही व वेलासपुर राज्य के राजा संग्राम शाही ने संयुक्त रुप में शिरस्थान ज्वाला मन्दिर निर्माण किया हुआ यहां अवस्थित शिलालेख में उल्लेख है । दैलेख जिला वासीयों का कहना है, आदमी की मृत्यु संसार में कहिं भी हो परन्तु दाह संस्कार के लिए शिरस्थान व नाभिस्थान के ज्वाला की अग्नी से किया जाय तो मृत आत्मा का वास स्वर्ग में होता है और पूनर्जन्म से मुक्ति मिलजाती है । ईस ही कारण शिरस्थान व नाभीस्थान में दैलेख जिले के सब से बडे श्मसान घाट बने हें । जिले के कई जगह से दाह संस्कार हेतु यहां शव लाय जातें हें । [1]

शिरस्थान स्थित ज्वाला

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "पर्यटक गन्तव्य : पंञ्चकोशी क्षेत्र" (नेपाली में). कारोबार. मूल से 21 मार्च 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 27 मार्च 2019.

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