शीतजैविकी

जीव विज्ञान की शाखा जो कम तापमान पर जीवों और ऊतकों से संबंधित है

शीतजैविकी (Cryobiology) जीव विज्ञान की वह शाखा है जिसमें पृथ्वी के हिममण्डल (क्रायोस्फ़ीयर) और अन्य ठंडें स्थानों पर उपस्थित कम तापमान के जीवों पर होने वाले प्रभाव का अध्ययन करा जाता है। इसमें प्रोटीन, कोशिकाओं, ऊतकों, अंगों और पूरे जीव शरीरों पर (हाईपोथर्मिया से लेकर निम्नतापिकी तक) साधारण से कम तापमान के असर को परखा-समझा जाता है।[1]

फ़ंगस कुटकी (फ़ंगस नैट) -५०° सेंटीग्रेड तापमान में जमकर फिर धीरे-धीरे गरम होने पर जीवित पाई जाती है

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Zachariassen KE, Kristiansen E (2000). "Ice nucleation and antinucleation in nature". Cryobiology. 41 (4): 257–279. doi:10.1006/cryo.2000.2289. PMID 11222024.