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शेखर एक जीवनी सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्सयायन अज्ञेय का मनोविश्लेषणात्मक उपन्यास है। इसके दो भाग हैं। प्रथम भाग का प्रकाशन 1941 में तथा दूसरे भाग का प्रकाशन 1944 में हुआ। इसमें अज्ञेय ने बालमन पर पड़ने वाले काम, अहम और भय के प्रभाव तथा उसकी प्रकृति पर मनोवैज्ञानिक ढंग से विचार किया है।