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संघर्षी व्यंजन (fricative consonant) ऐसा व्यंजन वर्ण होता है जिसमें मुँह के दो उच्चारण स्थानों को पास लाकर एक बहुत ही तंग खोल से हवा को बाहर धलेका जाए। मसलन निचले होंठ को ऊपर के दाँत से जोड़ने से "फ़" की ध्वनि या जिह्वा के पिछ्ले हिस्से को मुँह की छत के पिछले हिस्से से जोड़ने से "ख़" की ध्वनि (ध्यान दें कि बिना बिन्दु वाला एक संघर्षी व्यंजन नहीं है)। इसी तरह , , थ़ (बिन्दु वाला), झ़ (बिन्दु वाला) और ज़ भी संघर्षी व्यंजन हैं।[1][2] संघर्षी व्यंजनों कि विशेषता है कि उनकी ध्वनि को वायु-प्रवाह जारी रखकर लम्बे समय तक बिना रुके शुद्ध रूप से जारी रखा जा सकता है।[3]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. John Esling (2010) "Phonetic Notation", in Hardcastle, Laver & Gibbon (eds) The Handbook of Phonetic Sciences, 2nd ed., p 695.
  2. Ladefoged, Peter; Maddieson, Ian (1996). The Sounds of the World's Languages. Oxford: Blackwell. ISBN 0-631-19814-8.
  3. "The Morphology of Biblical Greek: A Companion to Basics of Biblical Greek and the Analytical Lexicon to the Greek New Testament," William D. Mounce, Harper Collins, 1994, ISBN 9780310226369, ... Whereas the time required to pronounce a stop is by definition very short, a fricative can be pronounced for a long time, until the speaker runs out of breath ...