संवेदक प्रक्रमण (sensory processing) किसी जीव में अपने शरीर और आसपास के पर्यावरण से ज्ञानेन्द्रियों द्वारा बोध होने वाली जानकारी को संगठित करने की प्रक्रिया होती है। यह जीच को अपना शरीर प्रभावपूर्ण ढंग से प्रयोग करने की क्षमता देता है। इसमें मस्तिष्क द्वारा दृश्य बोध, श्रवण तंत्र (सुनने का तंत्र), छुने का बोध, गंधानुभूति, इत्यादि से प्राप्त सूचनाओं के प्रक्रमण का केन्द्रीय स्थान है।[1][2]

संवेदक प्रक्रमण (sensory processing) के मुख्य चरण

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Stein BE, Stanford TR, Rowland BA (December 2009). "The neural basis of multisensory integration in the midbrain: its organization and maturation". Hear. Res. 258 (1–2): 4–15. PMC 2787841. PMID 19345256. डीओआइ:10.1016/j.heares.2009.03.012.
  2. Stein BE, Rowland BA (2011). "Organization and plasticity in multisensory integration: early and late experience affects its governing principles". Prog. Brain Res. 191: 145–63. PMC 3245961. PMID 21741550. डीओआइ:10.1016/B978-0-444-53752-2.00007-2.