संसाधन क्षरण

प्राकृतिक जैविक और अकार्बनिक संसाधनों की कमी
(संसाधन न्यूनीकरण से अनुप्रेषित)

संसाधन क्षरण (अंग्रेजी: Resource deplation) का अर्थ है प्राकृतिक संसाधनों का मनुष्य द्वारा अपने आर्थिक लाभ हेतु इतनी तेजी से दोहन की उनका प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा पुनर्भरण (replenishment) न हो पाए। यह काफ़ी हद तक तेजी से बढ़ रही जनसंख्या का परिणाम भी माना जा रहा है[1][2]

संसाधनों को दो वर्गों में विभक्त किया जाता है - नवीकरणीय संसाधन और अनवीकरणीय संसाधन। इसके आलावा कुछ संसाधन इतनी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं कि उनका क्षय नहीं हो सकता उन्हें अक्षय संसाधन कहते हैं जैसे सौर ऊर्जा

अनवीकरणीय संसाधनों का तेजी से दोहन उनके भण्डार को समाप्त कर मानव जीवन के लिये कठिन परिस्थितियां पैदा कर सकता है। कोयला, पेट्रोलियम, या धत्वित्क खनिजों के भण्डारों का निर्माण एक दीर्घ अवधि की घटना है और जिस तेजी से मनुष्य इन का दोहन कर रहा है ये एक न एक दिन समाप्त हो जायेंगे। वहीं दूसरी ओर कुछ नवीकरणीय संसाधन भी मनुष्य द्वारा इतनी तेजी से प्रयोग में लाये जा रहे हैं कि उनका प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा पुनर्भरण उतनी तेजी से संभव नहीं और इस प्रकार वे भी अनवीकरणीय संसाधन की श्रेणी में आ जायेंगे। ऐसे ही नवीकरणीय संसाधनों का उदाहरण हैं वन संसाधन[3]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Richard Anderson, Resource depletion: Opportunity or looming catastrophe? Archived 2014-08-08 at the Wayback Machine, BBC News पर, (अभिगमन तिथि 05-08-2014)
  2. Fred Magdoff, Global Resource Depletion: Is Population the Problem? Archived 2014-09-16 at the Wayback Machine, Monthly Review, 2013, Volume 64, Issue 08 (January), (अभिगमन तिथि 05-08-2014)
  3. Jean-Paul Lanly, World forest resources: Situation and prospects Archived 2015-05-24 at the Wayback Machine