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सकल मूल्य वर्धित या ग्राॅस वैल्यू ऐडेड(GVA), अर्थशास्त्र में, किसी भी क्षेत्र, उद्योग, अर्थव्यवस्था या व्यावसायिक क्षेत्र में उत्पादित मालसेवाओं के मूल्य की माप है। राष्ट्रीय खातों में, जीवीए उत्पादन शून्य मध्यवर्ती खपत होता है;[1] यह राष्ट्रीय खातों के उत्पादन खाते का एक संतुलन मद है।[2]

सकल धरेलू उत्पाद से संबंधसंपादित करें

सकल मूल्य वर्धित, बतौर माप, सकल घरेलू उत्पाद(GDP) से संबंधित है, क्योंकि दोनों उत्पाद के ही मापदंड हैं। यह संबंध इस प्रकार परिभाषित है:

सकल मूल्य वर्धित + उत्पादों पर कर - उत्पादों पर अनुवृत्ती(सब्सिडी) = सकल घरेलू उत्पाद

क्योंकि, उत्पादों पर करों और उत्पादों पर सब्सिडी का कुल समुच्चय, संपूर्ण अर्थव्यवस्था के स्तर पर ही उपलब्ध हैं,[3] इसीलिए सकल मूल्य वर्धित के आँकड़े को सकल क्षेत्रीय घरेलू उत्पाद एवं अन्य इकाईयों(संपूर्ण देश से छोटी इकाइयों) के उत्पातन को मापने के लिए उपयोगित किया जाता है। इस संदर्भ में इसे इस प्रकार मापा जाता है:

जीवीए = जीडीपी + अनुवृत्ती - (प्रत्यक्ष, बिक्री) करें

अतिसरल रूप में, जीवीए, अंतिम बिक्री और (शुद्ध) सब्सिडीयों से कारोबार में आयी सभी राजस्वों का महायोग है। इन आयों को, तब: व्यय(मजदूरी, वेतन और लाभांश), बचत(मुनाफा, मूल्यह्रास) और (अप्रत्यक्ष) करों को ढकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "Statistics Explained".
  2. "Statistics Explained".
  3. "Guide to Gross Value Added (GVA)". Office for National Statistics. 2002-11-15. अभिगमन तिथि 2012-07-08.