सीता राम गोयल (१९२१ - २००३) भारत के बीसवीं शती के प्रमुख इतिहाकार, लेखक, उपन्यासकार और प्रकाशक थे। उन्होने हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं में पुस्तकों का प्रकाशन किया। विख्यात ऋषि और दार्शनिक राम स्वरूप उनके गुरु और सहयोगी थे। १९४० के दशक में उनका झुकाव मार्क्सवाद की तरफ था किन्तु बाद में वे घोर साम्यवाद-विरोधी हो गये। बाद में वे इसाईयत, इस्लाम एवं भारतीय इतिहास एवं राजनीति के प्रमुख व्याख्याता (कमेंटेटर) बनकर उभरे।[1]

सीता राम गोयल
चित्र:Sita Ram Goel.JPG
सीता राम गोयल
जन्म16 अक्टूबर 1921
पंजाब, ब्रितानी भारत
मृत्यु3 दिसम्बर 2003
व्यवसायइतिहासकार, प्रकाशक
उच्च शिक्षादिल्ली विश्वविद्यालय
अवधि/काल२०वीं शताब्दी
विधाइतिहास, राजनीति, तुलनात्मक धर्म
विषयहिन्दू धर्म, धार्मिक परम्पराएँ, ईसाई धर्म, इस्लाम, साम्यवाद, भारतीय राजनीति, ब्रितानी साम्राज्यवाद
उल्लेखनीय कार्यsHow I Became a Hindu (मैं किस प्रकार हिन्दू बना)
The Story of Islamic Imperialism in India
History of Hindu–Christian Encounters, AD 304 to 1996
कैथोलिक आश्रम
Hindu Temples: What Happened to Them

जीवन परिचयसंपादित करें

श्री सीता राम गोयल का जन्म हरियाणा के एक रुढ़िवादी हिन्दू परिवार में हुआ था। किन्तु उनका बचपन कोलकाता में बीता। वे पहले गाँधीजी से प्रभावित थे। विद्यार्थी जीवन में उन्होंने हरिजन आश्रम के लिए काम किया। छात्रों के बीच अध्ययन केंद्र भी चलाया। बीस वर्ष के होते-होते वे मार्क्सवाद के प्रभाव में आए। उन्होंने 1944 में दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. किया। मेधावी छात्र के रूप में उन्हें कई पुरस्कार भी मिले।

1957 में सीताराम जी दिल्ली आ गए। कुछ समय तक जयप्रकाश नारायण के सहयोगी का भी काम किया। मार्क्सवाद और कम्युनिज्म की आलोचना से बढ़ते-बढ़ते गोयल इतिहास की ओर प्रवृत्त हुए। यह स्वभाविक था। यहाँ बौद्धिक क्षेत्र में मार्क्सवादी प्रहार इतिहास की मार्क्सवादी कीमियागिरी के माध्यम से ही हो रहा था। भारतीय मार्क्सवाद में सोवियत संघ व चीन का गुण-गान, इस्लाम का महिमामंडन तथा हिंदुत्व के प्रति शत्रुता – यही तीन तत्त्व सदैव केंद्रीय रहे। अतएव मार्क्सवादियों से उलझने वाले के लिए भी इन विषयों में उतरना लाजिमी हो जाता है। उसे हिंदुत्व के पक्ष में खड़ा होना ही पड़ता है। सीताराम जी ने भी कम्युनिज्म की घातक भूमिका, भारतीय इतिहास के इस्लामी युग, हिंदुत्व पर हो रहे इस्लामी तथा ईसाई मिशनरी हमलों के बारे में अथक रूप से लिखा। इस के लिए ही उन्होंने ‘वॉयस ऑफ इंडिया’ (हिंदी में ‘भारत-भारती’) नामक प्रकाशन संस्था कायम की जो आज भी चल रही है। 1951 से 1998 तक गोयल ने स्वयं तीस से भी अधिक पुस्तकें तथा सैकड़ों लेख लिखे। बेल्जियन विद्वान कोएनराड एल्स्ट ने नोट किया है, गोयल की बातों का या उनकी पुस्तकों में दिए तथ्यों का आज तक कोई खंडन नहीं कर सका है। उसके प्रति एक सचेत मौन रखने की नीति रही। इसीलिए उनके लेखन से हमारे आम शिक्षित जन काफी-कुछ अनजान से ही हैं।

सामाजिक कार्यसंपादित करें

अपने विद्यार्थी जीवन में वे एक सामाजिक कार्यकर्ता थे और अपने गाँव के एक हरिजन आश्रम के लिये काम करते थे। आर्य समाज, हरिजन एवं भारत का स्वतंत्रता संग्राम के लिये उनके जुड़ाव के कारण तथा महात्मा गांधी का समर्थन करने के कारण गाँव के कई लोगों से उनका बिगाड़ हो गया था।

ग्रन्थसंपादित करें

हिन्दीसंपादित करें

मौलिक ग्रन्थ
  • पथभ्रष्ट, 1960
  • सेक्युलरिज्म : देशद्रोह का दूसरा नाम, 1983.Yashpal Sharma would translate it into English as India's secularism, new name for national subversion, New Delhi: Voice of India, 1999, 107 p.
  • उदीयमान राष्ट्र-दृष्टि, 1983
  • हिन्दू समाज : संकटों के घेरे में , 1988
  • सप्तशील (उपन्यास), 1999

अनूदित

अंग्रेजीसंपादित करें

मूल रचनाएँ

  • The China debate; whom shall we believe?, Calcutta: Society for Defence of Freedom in Asia, 1953, 50 p.
  • Mind Murder in Mao-land, Calcutta: Society for Defence of Freedom in Asia, 1953, 53 p.
  • Communist Party in China: a study in treason., Calcutta: Society for Defence of Freedom in Asia, 1953, 106 p.
  • China is red with peasants' blood, Calcutta: Society for Defence of Freedom in Asia, 1953, 92 p.
  • CPI conspires for civil-war: analysis of a secret document, Calcutta: Society for Defence of Freedom in Asia, 1953, 56 p.
  • Red brother or yellow slave ?, Calcutta: Society for Defence of Freedom in Asia, 1953, 82 p.
  • Nehru's fatal friendship, New Delhi: Society for Defence of Freedom in Asia, 1955, 29 p.
  • Netaji and the CPI, Calcutta: Society for Defence of Freedom in Asia, 1955, 72 p.
  • In defence of Comrade Krishna Menon : a political biography of Pandit Nehru, New Delhi: Bharati Sahitya Sadan, 1963, 272 p. A reprint with changes would appear in 1993 as the Volume I of Genesis and growth of Nehruism.
  • Hindu society under siege, New Delhi: Voice of India, 1981, 48 p. A revised edition released in 1994.
  • How I Became a Hindu, New Delhi: Voice of India, 1982, 67 p. A third enlarged edition would appear in 1993, 106 p.
  • The Story of Islamic Imperialism in India, New Delhi: Voice of India, 1982, 126 p. A second enlarged edition would appear in 1994, 138 p.
  • Defence of Hindu Society, New Delhi: Voice of India, 1983, 96 p. A second edition would appear in 1987 and a third enlarged one in 1994, 118 p.
  • Muslim separatism : causes and consequences, New Delhi: Voice of India, 1983, 123 p. A second revised edition will appear in 1995, 128 p.
  • Perversion of India's political parlance, New Delhi: Voice of India, 1984, 60 p.
  • History of heroic Hindu resistance to Muslim invaders, 636 AD to 1206 AD, New Delhi: Voice of India, 1984, 48 p. Another edition would be released in 1994, 58 p.
  • The emerging national vision, New Delhi: Voice of India, 1984, 15 p.
  • St. Francis Xavier : the man and his mission, New Delhi: Voice of India, 1985, 16 p.
  • Papacy, its doctrines and history, New Delhi: Voice of India, 1986, 118 p.
  • Catholic Ashrams : adopting and adapting Hindu dharma, New Delhi: Voice of India, 1988, 100 p.
  • History of Hindu–Christian Encounters, AD 304 to 1996, New Delhi: Voice of India, 1989, 405 p. A second revised and enlarged edition would appear in 1996, 530 p.
  • Hindus and Hinduism : Manipulation of meanings, New Delhi: Voice of India, 1993, 24 p.
  • Islam vis-a-vis Hindu temples, New Delhi: Voice of India, 1993, 66 p.
  • Genesis and growth of Nehruism. vol. 1, Commitment to Communism, New Delhi: Voice of India, 1993, 231 p. Reprint with changes of the 1963 book In defence of Comrade Krishna Menon.
  • Stalinist "historians" spread the big lie, New Delhi: Voice of India, 1993, 38 p.
  • Jesus Christ : an artifice for aggression, New Delhi: Voice of India, 1994, 114 p.

सम्पादन

  • Hindu temples, what happened to them : Vol. I, A preliminary survey, New Delhi: Voice of India, 1990, 191 p. With Arun Shourie et al. Volume II would be released in 1993, 440 p.
  • Freedom of expression : secular theocracy versus liberal democracy, New Delhi: Voice of India, 1998, 179 p. Mostly articles.
  • Time for stock taking, whither Sangh Parivar?, New Delhi: Voice of India, 1997, 468 p. Criticisms of the BJP and RSS, including their responses.
  • Vindicated by Time: the Niyogi Committee report on Christian missionary activities, New Delhi: Voice of India, 1998, 1006 p. A reprint, with an introduction by Goel, of the official report on the missionaries' methods of subversion and conversion, from 1956.

Prefaces, introductions or commentaries

  • Introduction to Joseph Stalin's World Conquest in Instalments, Calcutta: Society for Defence of Freedom in Asia, 1952, 56 p.
  • Commentary of Mao Zedong's The conquest of China, Calcutta: Society for Defence of Freedom in Asia, 1954, 276 p.
  • Preface to Chandmal Chopra's The Calcutta Quran Petition, New Delhi: Voice of India, 1986, 71 p. A third revised and enlarged edition would appear in 1999, with more writing by Goel, 325 p.
  • Preface to Tipu Sultan: Villain Or Hero? : an Anthology, New Delhi: Voice of India, 1993, 85 p.
  • Preface to the reprint of Mathilda Joslyn Gage's Woman, Church and State (1997, ca. 1880). A feminist critique of Christianity.

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Dr. Sebastian Kim. The debate on conversion initiated by the Sangh Parivar, 1998-1999. India's only communalist: In commemoration of Sita Ram Goel; Edited by Koenraad Elst; Voice of India, New Delhi. (2005) ISBN 81-85990-78-6 (With contributions by Subhash Kak, David Frawley, Lokesh Chandra, Shrikant Talageri, Vishal Agarwal, N.S. Rajaram and others.)

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें