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यह दीपावली के पर्व पर महिलाओं द्वारा गाया जाने वाला गीत है इसमे शिव पार्वती का विवाह मनाया जाता है मिट्टी के गौरा -गौरी बनाकर उसके चारो ओर घुमकर सुवा गीत गाकर सुवा नृत्य करते हैं। कुछ जगहो पर मिट्टी के सुवा (तोते ) बनाकर यह गीत गाया जाता है यह दिपाली के कुछ दिन पूर्व शुऱू होकर दिवाली के दिन शिव-पार्वती (गौरा-गौरी) के विवाह के साथ समाप्त होता है यह श्रंगार प्रधान गीत है।

   सुआ गीत मे महिलाएं बाँस की टोकनी मे भरे धान के ऊपर सुआ अर्थात तोते कि प़तिमा रख देती है और उनके चारो ओर वृत्ताकार स्थिति मे नाचती गाती हैं