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सृष्टि के मुख्यतः दो अर्थ होते हैं (1) संसार और (2) निर्माण।


सृष्टि की रचना ==

 कई ब्राम्ह्मण है इस सृष्टि में हर एक ब्राम्ह्मण में कई आकाशगंगाएँ है उन आकांशगंगाओ में  कई तारे है कई तारों में सौर मण्डल है उन सौर मण्डलों में कई ग्रह है उन ग्रहों के कई उपग्रह है और ब्राम्ह्मण में ब्लैक होल उल्का पिण्ड गैस के बादले आदि है ।

ये धारा विज्ञान और हिन्दू धर्म की है। जबकी इस्लाम इसाई यहूदी शिन्तो ताओ कन्यफूजियस बौध्द जैन पारसी सिख धर्मो में विश्व मात्र स्वर्ग नरक धरती पर ही सीमित है । हिन्दू जैन में चौदह लोकों कि अवधारणा भी है ।

खगोलीय और ज्योतिष सिध्दान्त अलग अलग है=== ::खगोलीय सिध्दान्त के अनुसार पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घुम रही है सूर्य आकाशगंगा का चक्कर लगा रहा है और आकाशगंगा ब्राम्ह्मण में गति कर रहा है और अनुमानित है की जीवन इस ब्राम्ह्मण में कही और भी हो सकता है।

ज्योतिष सिध्दान्त सभी प्रचीन धर्मो के अनुसार है जिसमें हिन्दू मुस्लिम इसाई जैन बौद्ध ताओ कन्यफूजियस झेन शिंतो आदि प्रचीन धर्मो के अनुसार धरती के चारो ओर सूर्य चन्द्र ग्रह नक्षत्र तारे धरती के चक्कर लगा रहे है और धरती स्थिर है ।

इस धरती को विश्व माना जा सकता है क्योंकि इसके बाहर जीवन नहीं मिला है इसलिए । यहाँ धरती की भौगोलिक संरचना में कही पहाड़ नदी समुद झील महाद्वीप द्वीप बर्फ रेगिस्तान है । फिर धरती की वातावरण कही दिन रात शाम है ऋतुऐ मौसम है । इस धरती मे जीवन वनस्पति प्राणी सूक्ष्म जीव है जिनकी कई प्रजातियां। धरती रसायनिक और भौतिक के मापदंड से रचित है जिसमें ठोस द्रव गैस है ।

पृथ्वी पर मानव समाज है जिसमें कई धर्म संस्कृति है । मनुष्य में विश्व उत्पत्ति के अपने धर्म संस्कृति की अवधारणा है जबकी कुछ विज्ञान के सिध्दान्त को मानते है । विश्व की उत्पत्ति प्रचीन धर्मो के कोई परम् शक्ति है जिसे लोग परमात्मा कहते है सभी प्रचीन धर्मो में परमात्मा के स्वरूप की अलग ही परिकल्पना है । विश्व के चारो दिशाओं में मानव उत्पत्ति की कथा भिन्न है । पश्चिमी धर्मो की विश्व का निर्माण सात दिन में किया है परमात्मा उस परमात्मा को यहूदी यहूवा मुस्लिम आल्लाहा इसाई गाॅड फादर कहते है और सभी पश्चिमी मनुष्य इब्राहीम की संतान है ऐसा मिथ्क परन्तु पारसी धर्म में भी विश्व की रचना की कथा है । जबकी पूर्वी धर्म हिन्दू जैन सिख शिन्तो ताओ कन्यफूजियस में विश्व की रचना के अलग ही कथाऐ है पर सभी किसी दिव्य शक्ति से विश्व व मानव की रचना के कथा है । बौध्द जैन झेन में विश्व की रचना कभी नहीं हुई है ये सदैव था । जैन धर्म की दो अवधारणा है । जबकी वैज्ञानिक विचारधारा शून्य से महाविस्फोट से विश्व की रचना कि है ।

फिर इस मानव समाज में धर्मो संस्कृति के कारण मान्यताएं जिसमें पाप पुन्य के अलग अलग विचारधारा है फिर रहन सहन खानपान पहनावा पूजा विधि विवाह विधि आदि संस्कार भिन्न है ।
यहां मानव समाज चार प्रतिफल में विचरता है ___

धर्म ==== विश्व में कई धर्म है उनमें कई संस्कृति है उनमें शाखा इकाई है जिसके कारण लोगों के मान्याताऐ रहन सहन खानपान पहनावा पूजा विधि विवाह विधि आदि संस्कार भिन्न है। अर्थ ==== समाज में लोगों में अमीरी गरीबी उच्च नीच समाजिक असमाजिक नैतिकता अनैतिकता जैसे भवानाओ में रहते है । काम === स्त्री पुरूष नपुसंक बच्चे जवान बुजुर्ग में है फिर जन्म मृत्यु है फिर दोस्त रिश्तेदार माता पिता पति पत्नी भाई बहन पुत्र पुत्री जैसे सम्बन्ध है । मोक्ष === जीवन में लोगों के सुख दुख भावनाएं है इच्छाऐ है सोच विचार है लक्ष्य उद्देश्य है ।

इस विश्व का इतिहास भविष्य की अलग अलग विचारधारा है कुछ धर्मो से कुछ संस्कृति से कुछ पुरातात्विक विभाग से कुछ वैज्ञानिक शोध से । प्रचीन धर्मो से इतिहास और भविष्य ___ हिन्दू और जैन ____ सबसे पहले मनु और शतरूपा ने भारत के उत्तराखण्ड राज्य में मानवो को जन्म दिया फिर सतयुग त्रेता युग व द्वारापाक युग चला और अभी कालयुग चल रहा है । ::: हिन्दू व जैन के अनुसार पचास साठ लाख वर्ष बीत चुके है मनुष्य के अस्तित्व को यहूदी मुस्लिम पारसी और इसाई ___ एडम ईव या हवा आदिम ने मनुष्यों को पश्चिमी देश में जन्म दिया फिर उनसे कई सभ्यता बनी जैसे यूनानी रोमन मिस्र सभ्यता आदि जबकी पश्चिमी धर्मो के अनुसार दस हजार वर्ष ही हुऐ है इस विश्व की रचना को । शिन्तो ताओ कन्यफूजियस ___ की कथा भिन्न है । शिन्तो में मानव उत्पत्ति जापान से जबकी कन्यफूजियस और ताओ चीन से मानव उत्पत्ति हुई है । बौध्द ___ के अनुसार मनुष्य सदैव ही सम्पूर्ण विश्व में था । विज्ञान सिध्दान्त के अनुसार अफ्रीका के जंगलों में मानव की उत्पत्ति लाखो वर्षो पहले हुई और सभ्य सभ्यताएं पांच हजार पहले हुई है । पुरातात्विक विभाग के अनुसार मनुष्यों की सभ्य सभ्यताएं आज से पांच छैः हजार वर्ष पहले सुमेरू मिस्र सिंधुघाटी से शुरू होते हुई यूनानी रोमन इंका माया पीलीघाटी सभ्यता थी फिर साम्राज्य थे विक्रमादित्य आशोका चोल चंगेज खान सिकंदर स्पार्टन आदि । सभी धर्मों में कोई ना कोई मसीहा बुध्द तीर्थंकर पैगम्बर अवतार के आने का उल्लेख है पाप या समय आने पर भविष्य में तथा विश्व के अंत की भी कथाऐ है ।

वर्तमान में राजनीति व्यापारी मनोरंजन खगोलीय भौगोलिक ज्योतिषी टेक्नालॉजी चिकित्सा मनोविज्ञान में कई क्षेत्रों के कारण विश्व के मनुष्यों के जीवन में परिवर्तन होते रहते है ।

अनुक्रम

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सत्य यही है की सभी धर्मों और विज्ञान के सिध्दान्त एक परिकल्पना है मनुष्यों के मन की जिसके इमारत अवशेष कथाऐ सदैव रहते है विश्व में सभी प्रचीन सभ्यताएं साम्राज्य भी परिकल्पना है । मनुष्य मारता है तुरंत जन्म लेता है कही स्वर्ग नरक नही जाता है इस विश्व की रचना कभी नहीं हुई है ना कभी खत्म होगा यहां विश्व सभी धर्म सभ्यता व साम्राज्य के कथाऐ मिथ्क है । विश्व का वास्तविक इतिहास स्पेनिश ब्रिटिश साम्राज्य से आज तक की है बाकी सब कथाऐ कहनी मात्र है । विश्व में सभी मनुष्यों के दिनचार्य जीवनशैली और जीवनी सोच विचार इच्छाओं व्यवहार स्वभाव प्रवृत्ति में कुछ समानता है कुछ विभिन्नता है जो दुष्ट सज्जन व सामान्य मनोस्थित है लोगों की । सभी धर्मों संस्कृति के प्रर्थना विधि परमात्मा मसीहा देवी देवता पैगम्बर बुध्द तीर्थंकर मनुष्यों की आत्मा मन मस्तिष्क को शांत कर सुख सुविधा सम्पन्नता जीवन जीने के लिए सकारात्मक ऊर्जा देते है इनके भक्ति करने पर जैसे सूर्य रोशनी ताप देता है वैसा ही ये धर्मो संस्कृति की शक्तियां भी वैसी ही ऊर्जा भक्ति करने पर देती है । सभी धर्मों की कथाए स्वयं की आत्मा निर्माण की कथा है मात्र।

उदाहरणसंपादित करें

मूलसंपादित करें

  • सृष्टि मूलतः संस्कृत का शब्द है।

अन्य अर्थसंपादित करें

  • संसार
  • विश्व
  • जगत

संबंधित शब्दसंपादित करें

  • सृष्टा
  • सृष्टि काल
  • सृष्टि चक्र

हिंदी मेंसंपादित करें

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अन्य भारतीय भाषाओं में निकटतम शब्दसंपादित करें