सोलंकी वंश

यह एक जाट और राजपूत गोत्र है।

सोलंकी वंश भारत मे पाया जाने वाला गोत्र है ! वैसे जातियों मे पाया जाता है जैसे: जाट[1], कोली[2], भील[3], गुर्जर[4] और राजपूत[5] सोलंकी का अधिकार पाटन और काठियावाड़ राज्यों तक था। ये ९वीं शताब्दी से १३वीं शताब्दी तक शासन करते रहे।इन्हे गुजरात का चालुक्य भी कहा जाता था। यह लोग मूलत: अग्निवंश व्रात्य क्षत्रिय हैं और दक्षिणापथ के हैं परन्तु जैन मुनियों के प्रभाव से यह लोग जैन संप्रदाय में जुड़ गए। उसके पश्चात भारत सम्राट अशोकवर्धन मौर्य के समय में कान्य कुब्ज के ब्राह्मणो ने ईन्हे पून: वैदिकों में सम्मिलित किया(अर्बुद प्रादुर्भूत)।। [6]

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Vīrasiṃha (2006-01-01). The Jats: Their Role & Contribution to the Socio-economic Life and Polity of North & North-west India (अंग्रेज़ी में). Originals. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-88629-52-7.
  2. Lobo, Lancy (1995). The Thakors of North Gujarat: A Caste in the Village and the Region (अंग्रेज़ी में). Hindustan Publishing Corporation. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-7075-035-2.
  3. Majhi, Anita Srivastava (2010). Tribal Culture, Continuity, and Change: A Study of Bhils in Rajasthan (अंग्रेज़ी में). Mittal Publications. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-8324-298-1.
  4. Malik, Aditya (2005-02-24). Nectar Gaze and Poison Breath: An Analysis and Translation of the Rajasthani Oral Narrative of Devn-ar-aya.n (अंग्रेज़ी में). Oxford University Press. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-19-803420-9.
  5. D. P. Dikshit (1980). Political History of the Chalukyas of Badami. Abhinav Publications. मूल से 27 मई 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 13 अप्रैल 2016.
  6. N. Jayapalan (2001). History of India. Atlantic Publishers & Distri. पृ॰ 146. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-7156-928-1. मूल से 2 मई 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 13 अप्रैल 2016. V. A. Smith and A. M. T. Jackson also endorsed the view that Chalukyas were a branch of famous Gurjar