हँसी से मृत्यु एक दुर्लभ प्रकार की मौत है, जो सामन्यतः पूर्णहृदरोध या श्वासावरोध के कारण होती है, और इसके पीछे हँसी का बेरोक-टोक दौर होता है। इस प्रकार की मृत्यु की घटनाएँ प्राचीन यूनान के समय से लेकर आधुनिक काल में भी देखे गए हैं।

क्रिसिपस जिसकी कथित रूप से हँसी से मृत्यु हुई थी।
अन्सेल्म फ़र्बाख़ द्वारा रचित Der Tod des Dichters Pietro Aretino

हँसी से शरीर को होने वाले लाभसंपादित करें

  • इससे ऊर्जा मिलती है।
  • बढ़ती आयु पर रोक लगती है।
  • दिमाग़ ठीक चलता है।
  • यह अच्छी नींद के लिए फायदेमंद है।
  • हंसने से बढ़ती है प्रतिरोधी क्षमता।
  • दर्द से आराम मिलता है।
  • व्यक्तित्व में सकारात्मकता आती है।[1]

हँसी के जोखिमसंपादित करें

जहाँ हँसी के कई लाभ हैं, वहीं इसमें जोखिम भी है। इन जोखिमों के कारण जीवन भी समाप्त हो सकता है। कुछ प्रमुख जोखिम इस प्रकार से हैं:

  • अंडकोश बढ़ जाने के रोग की संभावना।
  • तेज़-तेज़ अंदाज़ में हँसने से दूषित वातावरण में से साँस बेरोक-टोक अन्दर जाती है, जो शरीर के लिए हानिकारक है।
  • दमे की बीमारी हो सकती है।
  • मनुष्य में असंयम उत्पन्न हो सकता है।
  • सरदर्द को न्योता मिल सकता है।[2]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 16 सितंबर 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 सितंबर 2018.
  2. "संग्रहीत प्रति". मूल से 26 जुलाई 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 सितंबर 2018.