अमृतमपत्रिका, ग्वालियर से साभार... चाय, और शराब पीने से कोई काला हो सकता है क्या?

यह एक भ्रम है। चाय से ऊर्जा आती है। आलस्य मिट जाता है। सुबह उठते ही चाय की चाह सबको रहती है। चाय शरीर को चलाने वाला पेय पदार्थ है। चाय पीने से लड़कियां कभी काली नहीं होती।

कब्बाली गाने वाले ज्यादातर कब्बाल चाय के भारी शौकीन होते है। अतः चाय को गाली देना महापाप है। चाय पीने से सर्दी-जुकाम का काम तमाम हो जाता है। ठंड के मौसम में चाय से अखण्ड गर्मी का अहसास होता है। चाय व्यापारी और नारी के लिए सम्मान का प्रतीक है। चाय की वजह से सन्सार में चाह बनी हुई है।

वैसे देखा जाए तो लड़कियों में बहुत कुछ काला होता है। किसी का कालापन और कलाकार की कला का आंकलन कभी हो नहीं पाता। अगर चाय पीने से लड़कियां काली हो जाती, तो आज दुनिया के सभी चाय बागान उजड़ जाते। काली, तो कलकत्ते वाली भी है लेकिन वो सबकी आराध्य है। माँ काली की कृपा के लिए सब आतुर रहते हैं। चाय में ऐसा कुछ भी नहीं कि कोई काला हो जाये। चाय की खेती असम में होने के कारण चाय के बारे में सबकी बुद्धि में विषम विचार आते हैं। असम में कुछ भी सम नहीं है। भारी बरसात की वजह से यहां के चेरापूंजी का नाम विख्यात है। सन्सार की सबसे बड़ी तांत्रिक देवी माँ कामाख्या का मन्दिर भी असम के गोहाटी में ही है। गोहाटी का तंत्र कभी इतना प्रसिद्ध था कि यहां के तांत्रिक चाय पीकर तथा काली-कंकाली के नाम से…बिना लाठी के ही किसी को मार देते थे। आपने कभी मूठ तांत्रिक क्रिया सुनी होगी। यह झूठ नहीं है कि असम का जादू आज तक अनेक लोगों की जान ले चुका है। अब बात करेंगे-चाय के नुकसान फायदे की… आप कुछ भी कर लो…. बुढ़ापे में औरत का फिगर और आदमी का लिवर खराब हो ही जाता है। चाय से ज्यादा चाह नुकसान दायक है। अपनो की हाय और हाय से अधिक पराये, अनजान लोगों के मुख से भाय या न भाय अपनी बुराई सुनना।

चाय, चाह और दारू- ये तीनों ही हानिकारक है। अनेकों आदमी-औरतों की आदत है- चाय पीना

हमारा विचार है कि- तीनों को एक बार आजमाकर देखने में कोई बुराई नहीं है। मन के हारे हार है, मन के जीते जीत… लोगों ने एक चलन बना रखा है कि- अमुक चीज खाने-पीने से हानि होगी। इस तरह के नकारात्मक विचार तन को तार नहीं पाते। आयुर्वेद के मुताबिक हमारे शरीर की बनावट ऐसी है कि- प्रबल इच्छा शक्ति की दम पर हम पत्थर को भी पचा सकते हैं। आधी से ज्यादा व्याधि, तो हम लोग केवल खाद्य-पदार्थ के बारे में गलत सोचने के कारण उत्पन्न कर लेते हैं। सन्सार में भाव-कुभाव का ही प्रभाव है। विकृत भाव पैदा करके हम जबरदस्ती तनाव की नाव में बैठ जाते हैं। इससे तन की नाव डूबने लगती है। हमारी माने, तो चाय के लिए किसी से राय या सलाह न लेवें। अमृतम आयुर्वेद का नियम है कि सबसे पहले तनाव त्यागे, इससे तन की नाव डूब जाती है। फिर ताव यानि क्रोध। थोड़े, ताव से भाव और विचार विकृत हो जाते हैं। खानपान का नियम- भाव से अभाव उत्पन्न होता है। किसी के भी प्रति पवित्र भाव, अच्छा प्रभाव दिखाता है। इसलिए कोई भी चीज के सेवन करते समय जैसा भाव या सोच रखेंगे वैसा ही खाद्य-पदार्थ में लोच आएगा। खाते-पीते समय जैसा भाव लाएंगे वैसे ही आपको लाभ या हानि पहुंचाएंगे। जैसी सोच, वैसी लोच… ¶~ इससे शरीर की शक्ति दिनों-दिन क्षीण होती चली जाती है। जिससे सेक्स में सफल नहीं हो पाते। ¶~ रोगप्रतिरोधक क्षमता मृतप्राय हो जाती है। ¶~ इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। ¶~ पाचनतंत्र बिगड़ जाता है। आपको जो भी शौक है, उसे पूरा कीजिये। दुनिया में बहुत से लोग ऐसे हैं, जो दिन भर में 15 से 20 कप चाय पीते हैं और रोज-रोज दारू पीते हैं! प्यार भी कर लेते हैं, फिर भी स्वस्थ्य हैं। “शराब या दारू” के अनेकों फायदे हैं.. दारू दो शब्दों से मिलकर बना है- दा+रु अर्थात दा से बना दाह, यानि अग्नि, ऊर्जा-शक्ति, पॉवर और रु यानि रूह – शरीर का रग-रग। दारू से अर्थ है, जो तन-मन की रूह में शक्ति उत्पन्न कर दे, जो शरीर को ऊर्जा से भर दे, उसे दारू कहते हैं। यदि आप सोचते हैं कि दारू से हानि होगी, तो इसे भूलकर भी न पीयें। वैसे पीने वाले या बिना पीने वाले दोनों ही जब कभी बीमार भी पड़ते हैं। पीने से प्यार में सफलता.. लड़खड़ाये कदम तो गिरे उनकी बाँहों मे, आज हमारा पीना ही हमारे काम आ गया। पीने वालों की पॉजिटिव सोच.. मैं खुदा का नाम लेकर पी रहा हूँ दोस्तों, ज़हर भी इसमें अगर होगा, तो दवा हो जाएगा, सब उसी के हैं- हवा, खुशबू, ज़मीनो-आसमाँ, मैं जहाँ भी जाऊँगा उसको पता हो जाएगा।

गुलजार साहब लिखते हैं दारु चढ के उतर जाती है पैसा चढ जाये तो उतरता नहीं आप अपने नशे में जीते है हम जरा सी शराब पीते है..

कुछ लोग चाहत, मोहब्बत के मारे-अच्छे मन से सिगरेट, दाऊ, शराब सब पीते हैं- यह सोचकर कि. मोहब्बत से गुजरा हूँ, अब शराब पीने चलते हैं। दोनों एक जैसे हैं, बस होश ही तो गंवाना है।

दारू पीकर कभी कुछ लोग अच्छे इन्सान भी बन जाते हैं- उस शख्स पर शराब का पीना हराम है! जो रहके मयखाने में भी इन्सां न हो सका!! चाह यानि आशिकी की इबादत तथा शराब की आदत… दोनों में नशा बराबर का है। वैसे स्वस्थ्य और सफल जीवन के लिए आशिकी एवं शराब दोनों से बचना चाहिए- शराब ओर आशिकी में समानता यही है कि- शराब ज्यादा हो जाए तो लड़का उल्टी करता है। आशिकी ज्यादा हो जाए तो लड़की। कुछ जानकर यह भी बताते हैं कि- लड़की ज्यादा सिसकी भरे, तो आने वाले भविष्य में उल्टी करेगी और लड़का ज्यादा व्हिस्की भरे, तो वोमिटिंग करेगा। हालांकि शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। बोतल पर चाहें कितने बड़े अक्षरों से खतरा लिखा हो, लेकिन भारतीय लोग भी खतरों के खिलाड़ी होते हैं। ये पीकर तंदुरुस्त भी रहते हैं। शादी-विवाह की शर्तें भी कुछ विचित्र होती हैं! जैसे- लड़का खाते-पीते घर का हो, और लड़का खाता पीता न हो।

कुछ बीमारी के कलयुगी अर्थ- ■ सरबाइकल पेन क्या है- इसका अर्थ हमारी भाषा में यह है कि- सर+बाइ+कल अर्थात जिसके सिर पर बाई यानि पत्नी का बहुत जोर या दवाब हो और कल की चिन्ता में मरा जा रहा हो। इनसे बच नहीं सकते। जवानी में नारी एवं बुढापे में बीमारी के चक्कर में व्यक्ति उलझ ही जाता है। अभी बहुत कुछ शेष है- अमृतम के मयखाने में हमेशा स्वस्थ रहने के लिए चाय-चाह के साथ-साथ अमृतम गोल्ड माल्ट का सेवन करें।


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खुले गायवान में पकी हरी चाय की पत्तियाँ
किण्वन की विभिन्न श्रेणियों में चाय

हरी चाय (अंग्रेज़ी: ग्रीन टी) एक प्रकार की चाय होती है, जो कैमेलिया साइनेन्सिस नामक पौधे की पत्तियों से बनायी जाती है। इसके बनाने की प्रक्रिया में ऑक्सीकरण न्यूनतम होता है। इसका उद्गम चीन में हुआ था और आगे चलकर एशिया में जापान से मध्य-पूर्व की कई संस्कृतियों से संबंधित रही। इसके सेवन के काफी लाभ होते हैं।[1] प्रतिदिन कम से कम आठ कप ग्रीन टी हृदय रोग होने की संभावनाओं को कम करने व कोलेस्ट्राल को कम करने के साथ ही शरीर के वजन को भी नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध होती है। प्रायः लोग ग्रीन टी के बारे में जानते हैं लेकिन इसकी उचित मात्र न ले पाने की वजह से उन्हें उनका पूरा लाभ नहीं मिल पाता है।

हरी चाय का फ्लेवर ताज़गी से भरपूर और हल्का होता है तथा स्वाद सामान्य चाय से अलग होता है। इसकी कुछ किस्में हल्की मिठास लिए होती है, जिसे पसंद के अनुसार दूध और शक्कर के साथ बनाया जा सकता है।[2] ग्रीन टी बनाने के लिए एक प्याले में २-४ ग्राम चाय पड़ती है। पानी को पूरी तरह उबलने के बाद २-३ मिनट के लिए छोड़ देते हैं। प्याले में रखी चाय पर गर्म पानी डालकर फिर तीन मिनट छोड़ दें। इसे कुछ देर और ठंडा होने पर सेवन करते हैं। विभिन्न ब्रांड के अनुसार एक दिन में दो से तीन कप ग्रीन टी लाभदायक होती है। इसका अर्थ है कि एक दिन में ३००-४०० मिलीग्राम ग्रीन टी पर्याप्त होती है। अब तक ग्रीन टी का सिर्फ एक ही नुकसान ज्ञात हुआ है, अनिद्रा यानी नींद कम आने की बीमारी।[2] इसका कारण चाय में उपस्थित कैफीन है। हालाँकि इसमें कॉफी के मुकाबले कम कैफीन होता है।

लाभसंपादित करें

 
आसाम की हरी चाय

एक व्यस्क व्यक्ति द्वारा इसका नियमित सेवन कई रोगों से छुटकारा ही नहीं दिलाता बल्कि कई रोगों के प्रति शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाती है। ग्रीन टी एंटी-एजिंग के साथ-साथ एंटी-ऑक्सीडेंट का काम भी करती है। अति व्यस्तता के कारण नियमित व्यायाम न कर पाने वाले लोगों के लिये उन्हें ग्रीन टी का नियमित सेवन करना काफी लाभदायक सिद्ध होता है। इसमें दूध नहीं मिलाना चाहिए क्योंकि इससे उसकी एंटी-आक्सीडेंट तत्व समाप्त हो जाती है।[1] यह चाय कालेस्ट्रोल को भी नियत्रित करने में सहायक होती है। इसका प्रयोग शरीर में उपापचय दर या वसा ऑक्सीकरण को भी बढ़ाता है। इसके सेवन से मस्तिष्क के उत्तकों को मृत होने से रोका जा सकता है। ग्रीन टी को भाप पर बनाना चाहिए।

ग्रीन टी के नियमित सेवन से न सिर्फ वजन नियंत्रित होता है, बल्कि उनमें कई तरह की बीमारियों के होने की संभावना भी कम हो जाती है। इसके सेवन से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से भी बचा जा सकता है। जापान में आमतौर पर लोग खाने के दौरान भी ग्रीन टी का सेवन करते हैं जो खाना पचाने में तो मदद करती ही है और हृदय रोग से भी सहायक सिद्ध होती है।[1]

 
चाय के बागान

अध्ययनों के अनुसार दाँतों के लिए भी ग्रीन-टी काफी लाभदायक है। जीवाणु, विषाणु और गले के संक्रमण से भी यह बचाव करती है। ग्रीन टी में पॉलीफिनोल्स होते हैं, जो दाँतों को केविटी से बचाते हैं। इसके अलावा कैंसर से बचाव, ब्लैडर, कोलन, इसोफेगल, पैनक्रियाज, रेक्टम और पेट के कैंसर से ग्रीन टी काफी बचाव करती है। इसमें उपस्थित तत्व ऐसी कोशिकाओं को कम या न के बराबर पनपने देते हैं। इससे खून के थक्के जमने की समस्या भी कम होती एंटी इंफ्लेमेटरी होने के कारण इसमें दर्द को कम करने की क्षमता होती है। इसमें उपस्थित कुछ एंटी-ऑक्सीडेंट्स ऑर्थराइटिस के खतरे को कम भी करते हैं। ग्रीन टी यकृत की दो तरह से सुरक्षा करती है। पहले तो यह लीवर की कोशिकाओं की सुरक्षा करती है और दूसरे प्रतिरोधी प्रणाली को भी मजबूत बनाती है। गर्भावस्था के दौरान यह शरीर को लौह, कैल्शियम और मैग्नेशियम की मात्रा देती है।[3] रात को सोते वक्त और भूख लगने पर कैफीन नहीं पीना चाहिये। रात को पीने से यह भूख बढ़ाता है और नींद में समस्या आती है। जबकि ग्रीन टी रात में भी पी सकते हैं, क्योंकि इसमें सिर्फ कैफीन की मात्रा कम होती है।

ग्रीन टी में एल॰ थिएनिन नामक एमिनो एसिड पाया जाता है, जो तनाव को कम करने में काफी कारगर होता है। ग्रीन टी में मौजूद थिएनिन इसी कोर्टिसोल की मात्रा को संचालित करती है एवं इसे बढ़ने नहीं देती जिसका सीधा असर हमारे तनाव पर होता है और हमें जल्दी तनाव नहीं होता है।[4]

चीनी चायसंपादित करें

हुनान प्रांतसंपादित करें

जुनशान यिनज़ेन (सिल्वर नीडल टी), चीन की सर्वोत्तम दस चायों में से एक, श्वेत चाय की एक किस्म है। इसकी खेती जुनशान द्वीप, युएयांग शहर, हुनान प्रांत में की जाती है।

जेजियांग प्रांतसंपादित करें

जेजियांग में सबसे प्रसिद्ध चाय, शी हू लोंगजिंग का केन्द्र है। इसके अलावा भी अन्य कई उच्च-किस्में यहाँ उगाई जाती हैं।

यह हांगजोउ से प्रसिद्ध चाय है, जिसका चीनी में अर्थ है अज़दहे का कुआँ। इसे चौड़े मुँह के खास बर्तन में बनाया जाता है। इस किस्म की अधिकांश मात्रा का उत्पादन लोंगजिंग में होता है।
जेजियांग के एक मंदिर के नाम पर बनी।
काईहुआ काउंटी की एक चाय जिसे ड्रैगन माउंटेन कहते हैं।
तियानताई काउंटी की एक चाय, जिसका नाम तियानताई पर्वत शृंखला के ऊपर रखा हुआ है।
तियान मु की एक चाय, जिसे ग्रीन टॉप भी कहते हैं।
जुचा नामक चाय, जिसका उद्गम जेजियांग में हुआ, किन्तु अब चीन में अन्य स्थानों पर उगाई जाती है।

जियांगसू प्रांतसंपादित करें

 
चीन के जियांग सू प्रांत की बी लुओ चुन चाय, की पत्तियाँ।
चीन की एक प्रसिद्ध चाय, जिसे ग्रीन स्नेल स्प्रिंग भी कहते हैं, डोंग टिंग से है।
नानजिंग की एक प्रसिद्ध चाय।

फ़ूजियान प्रांतसंपादित करें

 
कैमेलिया साइनेसिस, चाय का पौधा
फ़ूजियान प्रांत में पहाड़ी क्षेत्र में उगायी जाने वाली ऑर्गैनिक चाय तथा वाइट एवं ऊलोंग चाय प्रसिद्ध हैं। इन चायों के लिये तटीय पर्वतीय क्षेत्र उपयुक्त होते हैं। हरी चाय यहाँ वसंत ऋतु और ग्रीष्म ऋतुओं में चुनी जाती हैं।
चीन की मुख्य भूमि के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र की प्रसिद्ध किस्मों में माओ फेंग ("फर टिप"), कुइ जियान ("जेड स्वोर्ड") एवं मो ली हुआ चा ("ड्रैगन पर्ल ") ग्रीन टी तथा बाइ मू दान (वाइट पियॉनी) श्वेत चाय और ती क्वान यिन ("आयरन गॉडेस") ऊलॉग टी आती हैं। हरी चाय ओवन में सुखायी जाती है। और श्वेत चाय फास्ट-ड्राई तथा ऊलोंग चाय ध्यानपूर्वक नियंत्रित फर्मेन्टेशन द्वारा ऑक्सीकृत की जातीं हैं।

हुबेइ प्रांतसंपादित करें

ग्योकुरो (जेड ड्यू) भाप से बानायी गई एक चाय जापानी शैली में बनायी जाती है।

हेनान प्रांतसंपादित करें

 
कुछ ऊंची किस्म की चीनी हरी चाय, माओ जियान
चीन की प्रसिद्ध चाय, ग्रीन टिप या टिपी ग्रीन होती है।

जियांगज़ी प्रांतसंपादित करें

इसके नाम का अर्थ है "मूल्यवान भ्रू"; और ये जियांगज़ी से है। अब अन्य स्थानों में भि उगायी जाती है।
एक चीनी चाय जिसे कई चीनी राष्ट्रीय सम्मान मिले हैं।
इस चाय का अन्य नाम है क्लाउद एण्ड मिस्ट अर्थात बादल और धुंध।

अन्हुई प्रांतसंपादित करें

अन्हुई प्रांत में विभिन्न किस्म की चायें उगायी जाती हैं। इनमें तीन प्रमुख हैं:

माउंट हुआंगशान की एक चाय, जिसे बिग स्क्वायर सुनीट भि कहते हैं।
माउंट हुआंग की प्रसिद्ध चीनी चाय।
प्रसिद्ध चीनी चाय, जिसे मैलन सीड भी कहते हैं।
एक प्रसिद्ध चीनी चाय किस्म जिसे मंकी टी भी कहते हैं।
तुनज़ी जिले की एक चाय।
जिंग काउंटी की एक चाय, जिसे फ़ायर ग्रीन भी कहते हैं।
एक पूर्व-कृषित चीनी चाय़।

सिनचुआन प्रांतसंपादित करें

चाय जिसे मेंग डिंग कुई ज़ू या ग्रेट बैम्बू भी कहते हैं।
पीली-हरी चाय, जिसको पीने के बाद मीठा स्वाद आता है।

सन्दर्भसंपादित करें

  1. ग्रीन टी Archived 2015-08-27 at the Wayback Machine। हिन्दुस्तान लाइव। ६ जनवरी २०१०
  2. ग्रीन टी इज बेस्ट[मृत कड़ियाँ]। दैनिक भास्कर। १ मार्च २००८
  3. ग्रीन टी - फायदे ही फायदे। Archived 2010-01-14 at the Wayback Machine। दैनिक भास्कर। ३१ मार्च २००९
  4. Team, Zealthy Editorial (2019-05-22). "तनाव से हैं परेशान तो ग्रीन टी का करें इस्तेमाल - Stress and green tea". Zealthy. अभिगमन तिथि 2020-06-12.

साहित्यसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें