हेतुचक्र एक दार्शनिक संस्कृत ग्रन्थ है जिसके रचयिता दिग्नाग (४८० ईसवी - ५४० ईसवी) हैं। इसमें त्रैरूप्य का वर्णन है।

अनाकर (Anacker 2005: p. 34), ने वासुबन्धु के वाद-विधि (Method for Argumentation) नामक संस्कृत ग्रन्थ का परिचय कराते हुए लिखा है-

Vasubandhu's criteria for a valid inference-schema are concise and precise, and there is nothing essential omitted. Dignāga's 'wheel of justifications' (hetu-cakra), sometimes held to be the first complete Indian formulation of what constitutes the validity and invalidity of an argument, is in fact nothing of the kind: it is a pedagogic device mapping out in detail what Vasubandhu's criteria already presuppose.[1]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें